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टीईटी 2017 के परिणाम में हस्तक्षेप से इंकार

Tue, 30 Jan 2018 02:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Tue, 30 Jan 2018 02:05 AM IST
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Refusal to intervene in TET 2017 results
allahabad high court
शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) 2017 के परिणाम में हस्तक्षेप करने से हाईकोर्ट ने इंकार कर दिया है। परिणाम में त्रुटियों को ठीक करने की मांग को लेकर दर्जनों याचिकाएं दाखिल की गई थीं। याचिकाओं में मांग की गई थी कि ओएमआर सीट भरने में गलती को सुधार का मौका दिया जाए और उसके अनुसार परिणाम संशोधित किया जाए। कोर्ट ने कहा कि परिणाम घोषित होने के बाद यदि उसमें भूल सुधार की अनुमति दी गई तो परीक्षा की शुचिता पर सवाल उठेगा।
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ओएमआर सीट पर उसे सावधानी से भरने का निर्देश होने के बावजूद अभ्यर्थियों की गलतियां की हैं। इनको मानवीय त्रुटि के आधार पर सुधारने की अनुमति परिणाम घोषित हो जाने के बाद नहीं जा सकती है। यदि विभाग ने त्रुटियों को सुधारने से मना कर दिया है तो इसमें कोई अवैधानिकता नहीं है। कंचन बाला सहित 172 अन्य याचिकाओं पर न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने सुनवाई की। याचिकाओं पर वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे, आलोक मिश्र और प्रदेश सरकार की ओर से राजेश्वर त्रिपाठी, बिपिन बिहारी पांडेय जबकि बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से एके यादव और भूपेंद्र सिंह यादव आदि अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा।
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याचिकाओं में कहा गया कि ओएमआर सीट में पंजीकरण संख्या, अनुक्रमांक, बुकलेट सीरिज आदि भरने में याचीगण से त्रुटि हुई है, इसकी वजह से परीक्षा में अधिक अंक पाने के बावजूद वह सफल घोषित नहीं किए, जबकि उनसे कम अंक पाने वालों को सफल कर दिया गया। दलील दी गई ओएमआर सीट में इस प्रकार की गलतियां मानवीय त्रुटि है और इसको सुधारने का मौका दिया जाना चाहिए। बेसिक शिक्षा परिषद ने गलतियां सुधारने से मना कर दिया, तब यह याचिकाएं दाखिल की गई हैं। मांग की गई कि उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन मैन्युअली किया जाए।
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कोर्ट का कहना था कि मूल्यांकन कंप्यूटर से करने पर गलतियां कम होंगी। समय और खर्च भी कम आएगा। कंप्यूटर के प्रयोग से प्रक्रिया का दुरुपयोग करने का मौका भी कम मिलेगा। यदि मानवीय त्रुटि को सुधारने की इजाजत दी गई तो इसका परिणाम गंभीर हो सकता है। कोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद के निर्णय को सही करार देते हुए याचिकाएं खारिज कर दी हैं।
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