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Prayagraj News: अशासकीय और राजकीय कॉलेजों में एक साथ शुरू होगी भर्ती

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 02 May 2024 05:51 AM IST
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Recruitment will start simultaneously in non-government and government colleges
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प्रदेश के सहायता प्राप्त अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों और राजकीय महाविद्यालयों में पाठ्यक्रम तो एक हैं, लेकिन सहायक अध्यापक के पद पर भर्ती के लिए अर्हताएं अलग-अलग हैं। नए शिक्षा सेवा चयन बोर्ड का गठन होने के बाद अब अर्हताओं में समानता लाने की तैयारी है। समकक्ष अर्हता के निर्धारण की प्रक्रिया चल रही है, जिसके स्पष्ट होने के बाद अशासकीय और राजकीय महाविद्यालयों में नई भर्तियां शुरू होंगी।
अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में हिंदी विषय में सहायक अध्यापक (टीजीटी) के पद पर भर्ती के लिए इंटर में संस्कृत के साथ बीएड एवं बीए में हिंदी की डिग्री अथवा बीए में हिंदी एवं संस्कृत और बीएड की डिग्री अनिवार्य है। वहीं, राजकीय विद्यालयों में सहायक अध्यापक पद के लिए इंटर में संस्कृत, बीए में हिंदी एवं बीएड की डिग्री अनिवार्य है। ऐसे में अशासकीय और राजकीय विद्यालयों में सहायक अध्यापक पद की अर्हता में अंतर है।
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इसी तरह अशासकीय विद्यालयों में कला विषय में सहायक अध्यापक पद पर भर्ती की अर्हता इंटर में टेक्निकल आर्ट एवं बीए की डिग्री और राजकीय विद्यालयों में बीएफए एवं बीएड की डिग्री है। अशासकीय विद्यालयों में अंग्रेजी विषय में शिक्षक भर्ती के लिए बीए में अंग्रेजी साहित्य एवं बीएड अथवा बीए में अंग्रेजी भाषा एवं बीएड और राजकीय विद्यालयों में बीए में अंग्रेजी साहित्य एवं बीएड की डिग्री अनिवार्य है।
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अभ्यर्थी लंबे समय से सवाल उठाते रहे हैं कि जब अशासाकीय और राजकीय विद्यालयों में समान पाठ्यक्रम लागू हैं तो शिक्षकों के पद पर भर्ती के लिए अर्हताएं अलग-अलग क्यों हैं। अर्हता के विवाद के कारण अक्सर मामले कोर्ट में चले जाते हैं और इसकी वजह से भर्तियां अटक जाती है। इस समस्या के समाधान के लिए अब शासन स्तर से समकक्ष अर्हता का निर्धारण किया जाना है।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) को काफी पहले राजकीय विद्यालयों में सहायक अध्यापन के छह हजार पदों पर भर्ती के लिए रिक्त पदों का अधियाचन मिला चुका है। शासन स्तर से समकक्ष अर्हता का निर्धारण होने के बाद आयोग की ओर से भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया जाएगा। इससे पूर्व वर्ष 2018 में इस भर्ती का विज्ञापन आया था। अभ्यर्थियों को छह साल से नई भर्ती का इंतजार है।

वहीं, नए आयोग को टीजीटी-पीजीटी के 4163 पदों पर भर्ती करनी है। इसका विज्ञापन दाे साल पहले जारी हो चुका है और आवेदन की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। ऐसे में पूर्व निर्धारित अर्हता के आधार पर ही भर्ती होगी, लेकिन इसके बाद जो भी नई भर्तियां आएंगी, उनमें समकक्ष अर्हता में बदलाव संभावित है। प्रतियोगी छात्र मोर्चा के अध्यक्ष विक्की खान का कहना है कि शिक्षक भर्ती में अर्हताएं एक समान होनी चाहिए, ताकि भर्ती में अर्हता को लेकर अभ्यर्थियों के बीच कोई असमंजस न रहे।
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