{"_id":"67693184d76c13fae70a4e4b","slug":"recovery-of-excess-salary-paid-from-retirement-benefits-is-illegal-recovery-order-of-sp-of-kanpur-2024-12-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"High Court : सेवानिवृत्ति लाभों से भुगतान हुए अधिक वेतन की वसूली अवैध, कानपुर देहात के एसपी का वसूली आदेश रद्द","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
High Court : सेवानिवृत्ति लाभों से भुगतान हुए अधिक वेतन की वसूली अवैध, कानपुर देहात के एसपी का वसूली आदेश रद्द
Mon, 23 Dec 2024 03:16 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 23 Dec 2024 03:16 PM IST
सार
यह आदेश न्यायमूर्ति नीरज तिवारी की अदालत ने कानपुर देहात के सेवानिवृत्त उपनिरीक्षक राजेंद्र पाल की याचिका स्वीकार करते हुए दिया है। कोर्ट ने याची के खिलाफ कानपुर देहात के एसपी की ओर से जारी वसूली आदेश रद्द कर दिया।
विज्ञापन
अदालत।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि विभागीय गलती से भुगतान हुए अधिक वेतन की वसूली कर्मचारी के सेवानिवृत्ति लाभों से नहीं की जा सकती। ऐसा करना अवैधानिक है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने गलत निर्धारण के चलते पुलिसकर्मी को भुगतान हुए अधिक वेतन की सेवानिवृत्ति लाभों से वसूली गई राशि तीन माह में वापस करने का आदेश दिया है। निर्धारित अवधि में वापसी न होने पर वसूली गई राशि सात प्रतिशत ब्याज संग भुगतान करना होगा।
विज्ञापन
यह आदेश न्यायमूर्ति नीरज तिवारी की अदालत ने कानपुर देहात के सेवानिवृत्त उपनिरीक्षक राजेंद्र पाल की याचिका स्वीकार करते हुए दिया है। कोर्ट ने याची के खिलाफ कानपुर देहात के एसपी की ओर से जारी वसूली आदेश रद्द कर दिया।
विज्ञापन
अधिवक्ता इरफान अहमद मलिक ने दलील दी कि याची मई 2022 में उपनिरीक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुआ है। इसके बाद एसपी ने भुगतान हुए अधिक वेतन की वसूली याची के सेवानिवृत्ति लाभों से करने का आदेश जारी कर दिया। याची से 2,32,132 रुपये की वसूली भी कर ली गई। वसूली आदेश जारी करने और वसूली करने से पहले उसको सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया, जो सुप्रीम कोर्ट की ओर से रफीज मसीह के मामले में दी गई विधि व्यवस्था के विपरीत है।
विज्ञापन
क्या है रफीज मसीह का मामला
सुप्रीम कोर्ट ने रफीज मसीह के मामले में विधि व्यवस्था निर्धारित की है कि बिना सुनवाई का अवसर दिए तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के सेवानिवृत्त कर्मचारियों से भुगतान हुए अधिक वेतन की वसूली नहीं की जा सकती। वसूली से पहले नैसर्गिक न्याय का पालन करना जरूरी होगा।