{"_id":"5e9a0a108ebc3e71195f9e14","slug":"received-only-assurance-ration-was-not-delivered-city-desk-news-ald2736005143","type":"story","status":"publish","title_hn":"मिला सिर्फ आश्वासन, नहीं पहुंचा राशन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मिला सिर्फ आश्वासन, नहीं पहुंचा राशन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लॉकडाउन में फंसे छात्र-छात्राओं के लिए एक-एक दिन काटना मुश्किल हो गया है। सरकारी राशन का वितरण शुरू हुआ तो छात्र-छात्राओं की लाइन लग गई, लेकिन राशन कार्ड न होने के कारण उन्हें इस सुविधा से वंचित होना पड़ गया है। जब हेल्पलाइन नंबर पर राहत मांगी गई तो केवल आश्वासन मिला। कभी 24 तो कभी 48 घंटे के लिए इंतजार करने को कहा गया है, लेकिन राशन नहीं पहुंचा।
मधुलिका राय शिवकुटी स्थित एक लॉज में रहती हैं। उनके लॉज में केवल दो छात्राएं बची हैं और बाकी लॉकडाउन से पहले घर लौट गईं थी। मधुलिका हर माह घर से राशन लेकर आती थीं, लेकिन अब वह लॉकडाउन में फंसी हैं। गोविंदपुर की सुजाता सिंह और अल्लापुर की रश्मि मिश्रा भी किराये के कमरे में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं। दोनों लॉकडाउन में फंसी हैं। यूपीपीएससी ने जो परीक्षाएं स्थगित की हैं, उनमें से कुछ परीक्षाओं में इन्हें भी शामिल होना था। परीक्षा तो टल गई, लेकिन सुजाता और रश्मि घर नहीं जा सकीं। कटरा की प्रियंका भी लॉकडाउन के कारण घर नहीं लौट सकीं। सब्जी, राशन आदि के लिए जो पैसा बचा था, अब वह भी खत्म होता जा रहा है।
सरकारी राशन का जब वितरण शुरू हुआ तो इनके जैसे तमाम प्रतियोगी छात्र-छात्राओं ने हेल्पलाइन नंबर पर फोन करके मदद मांगी। किसी से कहा गया कि 24 घंटे में आपकी समस्या का समाधान होगा तो किसी को अपने क्षेत्र के तहसीलदार या किसी अन्य प्रशासनिक अफसर से बात करने की सलाह दी गई। राजापुर के एक प्रतियोगी छात्र ने सीधे राशन की दुकान चलाने वाले को फोन किया तो वहां से जवाब मिला कि राशन वितरण सिर्फ कार्डधारकों को किया जा रहा है। जिनके पास कार्ड नहीं हैं, उन्हें राशन नहीं मिलेगा। कुछ छात्रों को यह आश्वासन भी दिया गया कि 24 से 72 घंटे तक इंतजार करिए, मदद आप तक पहुंचेगी, लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला।
विज्ञापन
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय का आरोप है कि प्रशासनिक महकमा छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा है। प्रतियोगी छात्र-छात्राएं यहां किराये के मकान में रहते हैं। उनके पास यहां के स्थायी पते का कोई प्रूफ नहीं है। ऐसे में वे राशन कार्ड नहीं बनवा सकते हैं। अवनीश ने जिला प्रशासन से मांग की है कि प्रतियोगी छात्र-छात्राओं को एक-दो माह के लिए अस्थायी राशन कार्ड बनाकर दिया जाए, ताकि लॉक डाउन की अवधि में छात्र-छात्राओं को राशन के लिए भटकना न पड़े। प्रशासन चाहे तो लॉक डाउन समाप्त होने के बाद अस्थायी कार्ड की वैधता को समाप्त कर सकता है लेकिन तब तक के लिए छात्र-छात्राओं की समस्या का ठोस निराकरण होना चाहिए।
पीसीबी हॉस्टल के छात्रों ने भी लगाई मदद की गुहार
पीसीबी हॉस्टल के छात्रों ने भी इविवि प्रशासन और जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। मेस बंद हो जाने के कारण भोजन को लेकर समस्या उत्पन्न हो गई है। छात्रों के पास राशन भी नहीं है। छात्र धनंजय कुुशवाहा, अंबरीश सिंह, अविनाश सिंह, अमित पांडेय, रवि कुमार, गौरव कुमार, दिनेश कुमार, सिद्धार्थ सिंह, अजीत सोनकर, शिवम कुमार, रजनीश् कुमार, संतोष यादव, पंकज कुमार, विकास कुमार आदि का कहना है कि हॉस्टल में स्थिति काफी खराब है। राशन उपलब्ध नहीं है और रेस्टोरेंट एवं ढाबे बंद होने के कारण बारह भोजन भी नहीं किया सकता। उन्होंने इविवि एवं जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।
विज्ञापन
मधुलिका राय शिवकुटी स्थित एक लॉज में रहती हैं। उनके लॉज में केवल दो छात्राएं बची हैं और बाकी लॉकडाउन से पहले घर लौट गईं थी। मधुलिका हर माह घर से राशन लेकर आती थीं, लेकिन अब वह लॉकडाउन में फंसी हैं। गोविंदपुर की सुजाता सिंह और अल्लापुर की रश्मि मिश्रा भी किराये के कमरे में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं। दोनों लॉकडाउन में फंसी हैं। यूपीपीएससी ने जो परीक्षाएं स्थगित की हैं, उनमें से कुछ परीक्षाओं में इन्हें भी शामिल होना था। परीक्षा तो टल गई, लेकिन सुजाता और रश्मि घर नहीं जा सकीं। कटरा की प्रियंका भी लॉकडाउन के कारण घर नहीं लौट सकीं। सब्जी, राशन आदि के लिए जो पैसा बचा था, अब वह भी खत्म होता जा रहा है।
विज्ञापन
सरकारी राशन का जब वितरण शुरू हुआ तो इनके जैसे तमाम प्रतियोगी छात्र-छात्राओं ने हेल्पलाइन नंबर पर फोन करके मदद मांगी। किसी से कहा गया कि 24 घंटे में आपकी समस्या का समाधान होगा तो किसी को अपने क्षेत्र के तहसीलदार या किसी अन्य प्रशासनिक अफसर से बात करने की सलाह दी गई। राजापुर के एक प्रतियोगी छात्र ने सीधे राशन की दुकान चलाने वाले को फोन किया तो वहां से जवाब मिला कि राशन वितरण सिर्फ कार्डधारकों को किया जा रहा है। जिनके पास कार्ड नहीं हैं, उन्हें राशन नहीं मिलेगा। कुछ छात्रों को यह आश्वासन भी दिया गया कि 24 से 72 घंटे तक इंतजार करिए, मदद आप तक पहुंचेगी, लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला।
विज्ञापन
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय का आरोप है कि प्रशासनिक महकमा छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा है। प्रतियोगी छात्र-छात्राएं यहां किराये के मकान में रहते हैं। उनके पास यहां के स्थायी पते का कोई प्रूफ नहीं है। ऐसे में वे राशन कार्ड नहीं बनवा सकते हैं। अवनीश ने जिला प्रशासन से मांग की है कि प्रतियोगी छात्र-छात्राओं को एक-दो माह के लिए अस्थायी राशन कार्ड बनाकर दिया जाए, ताकि लॉक डाउन की अवधि में छात्र-छात्राओं को राशन के लिए भटकना न पड़े। प्रशासन चाहे तो लॉक डाउन समाप्त होने के बाद अस्थायी कार्ड की वैधता को समाप्त कर सकता है लेकिन तब तक के लिए छात्र-छात्राओं की समस्या का ठोस निराकरण होना चाहिए।
पीसीबी हॉस्टल के छात्रों ने भी लगाई मदद की गुहार
पीसीबी हॉस्टल के छात्रों ने भी इविवि प्रशासन और जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। मेस बंद हो जाने के कारण भोजन को लेकर समस्या उत्पन्न हो गई है। छात्रों के पास राशन भी नहीं है। छात्र धनंजय कुुशवाहा, अंबरीश सिंह, अविनाश सिंह, अमित पांडेय, रवि कुमार, गौरव कुमार, दिनेश कुमार, सिद्धार्थ सिंह, अजीत सोनकर, शिवम कुमार, रजनीश् कुमार, संतोष यादव, पंकज कुमार, विकास कुमार आदि का कहना है कि हॉस्टल में स्थिति काफी खराब है। राशन उपलब्ध नहीं है और रेस्टोरेंट एवं ढाबे बंद होने के कारण बारह भोजन भी नहीं किया सकता। उन्होंने इविवि एवं जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।