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वर्षों से विवि कर्मियों के क्यों नहीं हुए काम : हांगलू

अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद Updated Wed, 08 Mar 2017 12:38 AM IST
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 इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू ने कर्मचारियों की ज्यादातर मांग पर सहमति जताई लेकिन हड़ताल के औचित्य पर सवाल उठाया। उन्होंने इसे अवैध भी बताया। अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि  ज्यादातर मांगें वर्षों पुरानी हैं। इसमें वर्तमान प्रशासन का क्या दोष है। अब तो उनकी मांग पर काम हो रहा है। फिर यह हड़ताल क्यों?
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कुलपति ने कहा कि  लोगों के पास प्रमोशन लेटर है लेकिन नियुक्ति पत्र नहीं है। ऐसा क्यों हुआ और पत्रावली किसने गायब की। मेडिकल सेल में ही 800 फाइलें लंबित हैं। कर्मचारियों का स्थायीकरण 20 साल बाद अब हुआ है। इसी तरह अन्य काम भी वर्षों से लंबित हैं। इसके लिए कौन जिम्मेदार है। संविदा कर्मियों को स्थाई किए जाने के मुद़्दे पर उन्होंने कहा कि 400 कर्मियाें की नियुक्ति होनी हैं। इन पर दूसरे प्रदेश के लोगों की तो नियुक्ति नहीं होगी। इनकी सभी मांगों पर गंभीरता से काम हो रहा है। वर्षों से सबकुछ ठप है। इसे ठीक करने में समय तो लगेगा ही। उन्होंने कर्मचारियों की मांग पर बिंदुवार प्रगति बताई।

उन्होंने बताया कि कार्यपरिषद के आदेश के क्रम में दैनिक वेतन पर कार्यरत कर्मचारियों की सूची मांगी गई है। पे पैरिटी के 10 फीसदी के भुगतान के लिए यूजीसी को पत्र भेज दिया गया है। कर्मचारियों के स्थायीकरण का आदेश जारी कर दिया गया है। प्रोन्नति का काम प्रगति पर है। विश्वविद्यालय प्रशासन मृतक आश्रित कर्मचारियाें की नियुक्ति के लिए भी कदम बढ़ा चुका है। कुलपति ने बताया कि इस बाबत कार्यपरिषद के अनुमोदन के बाद प्रस्ताव मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेजा जाएगा। यह प्रस्ताव कार्यपरिषद की आगामी बैठक में ही रखा जाएगा। मेडिकल भुगतान के 160 पत्रवालियों का भुगतान हो चुका है। अन्य पर काम हो रहा है। प्रयोगशाला सहायक के वेतन के संदर्भ में पत्रावलियों की जांच की जा रही है। पाल्यों को प्रवेश कोटा संबंधी प्रस्ताव एकेडमिक काउंसिल की अगली बैठक में रखा जाएगा। रिटायरमेंट के दिन ही भुगतान का आदेश है। आवास आवंटन समिति, जीपीएफ, हाउस लोन, सस्ते दर पर कैंटीन आदि मांगों पर भी प्रक्रिया शुरू की गई है। अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालय की तरह के सभी वर्ग के कर्मचारियों को भी अवकाश मिलेगा।

कर्मचारी वीसी से वार्ता पर अड़े, हड़ताल जारी
इलाहाबाद। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कर्मचारियों की हड़ताल मंगलवार को भी जारी रही। इसकी वजह से परिसर में लगातार सातवें दिन सभी काम ठप रहे। ऐसे में डिग्री आदि लेने पहुंचे छात्र-छात्रा भटकते रहे। रजिस्ट्रार तथा अध्यापकों ने वार्ता करनी चाही लेकिन कर्मचारी कुलपति से वार्ता की मांग पर अड़े हैं। उनका कहना है कि रजिस्ट्रार ने ज्यादातर मांगें माने जाने में असमर्थता जताई है। इसलिए कुलपति की मौजूदगी में ही इन अफसरों के साथ वार्ता होनी चाहिए। कुलपति को लिखे पत्र में कर्मचारियाें ने यह भी मांग रखी है कि पत्र व्यवहार तथा वार्ता संयुक्त परिषद के तहत होगी। संयुक्त परिषद में छात्रसंघ के पदाधिकारी भी शामिल हैं। इसके विपरीत रजिस्ट्रार प्रोफेसर एनके शुक्ला का कहना है कि इस तरह का पत्र दुर्भाग्यपूर्ण है।
पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार कर्मचारियों और छात्रसंघ पदाधिकारियों का सीनेट परिसर में जमावड़ा हुआ।

इस दौरान हुई सभा में उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। उनका कहना था कि मांग पूरी होने के बाद ही वे हड़ताल समाप्त करेंगे। मांग की समीक्षा के लिए रजिस्ट्रार की ओर से कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों के नाम से पत्र भेजा गया लेकिन उन्होंने वार्ता से मना कर दिया। आंदोलन के समर्थन में कर्मचारियों और छात्रों का प्रतिनिधिमंडल सांसद विनोद सोनकर से भी मिला। सांसद ने इस बाबत कुलपति से वार्ता करने का आश्वासन दिया। केंद्रीय कर्मचारी संघ समन्वयक समिति ने भी कर्मचारियों की मांग का समर्थन किया है। बैठक में पदाधिकारियों का कहना था कि विश्वविद्यालय प्रशासन वार्ता कर समस्याओं का शीघ्र समाधान करे। दमन एवं उत्पीड़न की स्थिति में कर्मचारियों का सक्रिय सहयोग किया जाएगा। बैठक में टीपी मिश्रा, कृपाशंकर श्रीवास्तव, सुभाष पांडेय, बजरंग बली गिरि, रामबिलास सिंह, प्रमोद राय, नरोत्तम त्रिपाठी आदि मौूद रहे।
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