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Raksha Bandhan 2020: भाइयों की कलाई नहीं रहेगी सूूनी, 50 हजार घरों तक पहुंचाई राखी
Mon, 03 Aug 2020 12:14 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 03 Aug 2020 12:14 AM IST
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राखी के लिए स्पेशल लिफाफा
- फोटो : ANI
सोमवार को रक्षाबंधन पर भाइयों की कलाई सूनी नहीं रहेगी। डाक विभाग के विशेष प्रयास से रविवार को करीब 500 डाकियों ने साधारण डाक और स्पीड पोस्ट से आईं करीब 50 राखियों की डाक लोगों के घरों तक पहुंचाई। सोमवार को भी राखी पहुंचाने का काम जारी रहेगा।
कोरोना संक्रमण काल में ट्रेनों के न चलने से सर्वाधिक प्रभावित डाक सेवाएं हुईं। अनलॉक के साथ लोगों तक चिट्ठियां और अन्य डाक पहुंचाने के लिए सड़क मार्ग का सहारा लिया गया। नार्थ ईस्ट और पश्चिम बंगाल के साथ सुदूर क्षेत्रों में दस से बारह दिन तथा अन्य क्षेत्रों में पांच से सात दिन में डाक पहुंचाने का काम करने का दावा डाक विभाग के अफसरों ने किया है।
बताते हैं कि 15 जुलाई से राखी पहुंचाने का काम विशेष रूप से किया जा रहा है। इसके लिए समय सीमा निर्धारित कर पावती देते समय डाकियों से फोटो खींचकर अपलोड कराए जा रहे हैं। रविवार सुबह प्रधान डाकघर में करीब 50 हजार राखियां आईं। शनिवार को अवकाश के कारण रविवार को डाकियों को बुलाया गया। दिन भर में सभी राखी डाक का वितरण कराया गया।
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दो दिन पहले चंदन ने बताया कि उसे राखी और मिठाई मिल गई है। वहीं अमृतसर में रहने वाली गौरी ने भी अपने भाई विनायक को राखी और मिठाई ऑनलाइन भिजवाई है। वहीं विवेक सहगल को राखी रक्षा बंधन के दिन सुबह मिल जाएगी। उसने ऑनलाइन ट्रैकिंग कर राखी की लोकेशन जांची। डाक अफसरों से परेशानी बताई तो उन्होंने स्पीड पोस्ट से भेजी गई राखी डाक सोमवार सुबह उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।
उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका के मिशन निदेशक सुजीत कुमार ने बताया की प्रयागराज के साथ प्रदेश में राखी निर्माण के कार्य में करीब 300 समूहों तथा लगभग दो हजार महिलाएं लगी हुई है। राखियों को बनाने में स्वदेशी सामग्री का ही प्रयोग किया गया। राखियों में बच्चों के लोकप्रिय कार्टून कैरेक्टर को भी शामिल किया गया है। डोरेमोन, मोटू-पतलू, छोटा भीम जैसे करेक्टर की कार्टून राखी बनाई जा रही है। राखी की बिक्री से समूह की महिलाओं का हौसला बढ़ेगा। स्वदेशी राखियां चीन की राखियों को मात दे रही हैं। लोकल को वोकल को मजबूती देने के लिहाज से उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन पूरा कर कार्य कर रहा है।
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कोरोना संक्रमण काल में ट्रेनों के न चलने से सर्वाधिक प्रभावित डाक सेवाएं हुईं। अनलॉक के साथ लोगों तक चिट्ठियां और अन्य डाक पहुंचाने के लिए सड़क मार्ग का सहारा लिया गया। नार्थ ईस्ट और पश्चिम बंगाल के साथ सुदूर क्षेत्रों में दस से बारह दिन तथा अन्य क्षेत्रों में पांच से सात दिन में डाक पहुंचाने का काम करने का दावा डाक विभाग के अफसरों ने किया है।
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बताते हैं कि 15 जुलाई से राखी पहुंचाने का काम विशेष रूप से किया जा रहा है। इसके लिए समय सीमा निर्धारित कर पावती देते समय डाकियों से फोटो खींचकर अपलोड कराए जा रहे हैं। रविवार सुबह प्रधान डाकघर में करीब 50 हजार राखियां आईं। शनिवार को अवकाश के कारण रविवार को डाकियों को बुलाया गया। दिन भर में सभी राखी डाक का वितरण कराया गया।
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विदेशों से बहनों ने भेजा ऑनलाइन राखी और मिठाई
कोरोना संक्रमण काल में अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें बंद होने के कारण इस बार रक्षाबंधन पर विदेशों से राखी आने और वहां राखी भेजने का काम लगभग ठप रहा। नाममात्र की राखियां डाक या कोरियर से भेजी गईं। इस बार देश विदेश से राखियां, मिठाई भेजने का काम ऑनलाइन किया गया। बैरहना निवासी चंदन जद्दा में हैं, उसकी छोटी बहन ने अमेजन से भाई को राखी और मिठाई भिजवाई है।दो दिन पहले चंदन ने बताया कि उसे राखी और मिठाई मिल गई है। वहीं अमृतसर में रहने वाली गौरी ने भी अपने भाई विनायक को राखी और मिठाई ऑनलाइन भिजवाई है। वहीं विवेक सहगल को राखी रक्षा बंधन के दिन सुबह मिल जाएगी। उसने ऑनलाइन ट्रैकिंग कर राखी की लोकेशन जांची। डाक अफसरों से परेशानी बताई तो उन्होंने स्पीड पोस्ट से भेजी गई राखी डाक सोमवार सुबह उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।
- राखी वितरण के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। बार कोड से लोकेशन ट्रेस कर लोगों तक रक्षाबंधन के लिए राखी पहुंचाई जा रही है। सोमवार को सुबह से शाम तक राखी डाक का वितरण विशेष रूप से किया जाएगा। कोशिश है कि त्योहार पर लोगों तक राखी पहुंच जाए। - संजय डी अखाड़े प्रवर अधीक्षक डाक (एसएसपी डाक सेवाएं)
प्रयागराज के 50 समूहों द्वारा तैयार की गईं 50 हजार राखियां
उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत गठित स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा प्रेरणा राखी इस बार बनाई गई है। प्रदेश भर के तमाम जिलों में 80 लाख रुपये की राखी तैयार की गई है। इसमें प्रयागराज की बात करें तो यहां 50 समूहों द्वारा 50 हजार राखियां तैयार की गईं हैं। जिसका बाजार मूल्य लगभग 10 लाख रुपये है। इन राखियों को समूह की दीदियों द्वारा स्टाल लगाकर बेचा जा रहा है। इसके लिए विकास भवन परिसर में भी स्टाल लगाया गया है। साथ ही जिले की कई तहसीलों तथा ब्लॉकों में भी स्टॉल लगाकर समूह की बहनों द्वारा राखी की बिक्री की गई है।उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका के मिशन निदेशक सुजीत कुमार ने बताया की प्रयागराज के साथ प्रदेश में राखी निर्माण के कार्य में करीब 300 समूहों तथा लगभग दो हजार महिलाएं लगी हुई है। राखियों को बनाने में स्वदेशी सामग्री का ही प्रयोग किया गया। राखियों में बच्चों के लोकप्रिय कार्टून कैरेक्टर को भी शामिल किया गया है। डोरेमोन, मोटू-पतलू, छोटा भीम जैसे करेक्टर की कार्टून राखी बनाई जा रही है। राखी की बिक्री से समूह की महिलाओं का हौसला बढ़ेगा। स्वदेशी राखियां चीन की राखियों को मात दे रही हैं। लोकल को वोकल को मजबूती देने के लिहाज से उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन पूरा कर कार्य कर रहा है।