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प्रयागराज : हिंदी के युग प्रवर्तक आचार्य महावीर प्रसाद के बारे में रेलवे ने लगाया गलत शिलापट

Fri, 10 May 2024 05:17 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 10 May 2024 05:17 PM IST
सार

इसे लेकर आरएसएस के प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ. मुरारजी त्रिपाठी ने एनसीआर के जीएम को पत्र लिख कर शिकायत की है। आरएसएस के प्रचार प्रमुख ने पत्र में लिखा है कि आचार्य महावीर प्रसाद लखनऊ से निकलने वाली किसी पत्रिका के संपादक नहीं थे। देश में हिंदी साहित्य को दिशा देने वाली सरस्वती पत्रिका प्रयागराज से प्रकाशित होती रही है, लखनऊ से नहीं।

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Railways has put a wrong inscription about Acharya Mahavir Prasad, the originator of the era of Hin
आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

हिंदी के युग प्रवर्तक आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के बारे में रेलवे की ओर से गलत जानकारी दी जा रही है। झांसी रेलवे स्टेशन पर उनके बारे में लगाए गए शिलापट में उन्हें लखनऊ से निकलने वाली सरस्वती पत्रिका का संपादक बताया गया है। जबकि, सरस्वती पत्रिका का प्रकाशन इंडियन प्रेस से प्रयागराज से होता रहा है। शिलापट पर अंकित इस गलत तथ्य की शिकायत राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ. मुरार जी त्रिपाठी ने एनसीआर के जीएम रवींद्र गोयल से को पत्र भेजकर की है।

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दरअसल आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी एक जमाने में मुंबई स्थित इंडियन मिडलैंड रेलवे में तार बाबू के पद पर तैनात थे। उन्होंने खंडवा, हरदा, इटारसी स्टेशनों पर अपनी सेवाएं दी थीं। वर्ष 1904 में झांसी स्थित मंडल रेल कार्यालय में अपनी नौकरी से उन्होंने त्यागपत्र दे दिया था। इस बात का उल्लेख झांसी रेलवे स्टेशन पर लगे रेलवे के एक शिलापट में किया गया है। इस शिलापट में लिखा गया है कि आचार्य द्विवेदी ने झांसी में रेलवे की नौकरी से इस्तीफा दिया और लखनऊ से प्रकाशित सरस्वती नामक पत्रिका के संपादक का कार्यभार संभाला।
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इस शिलापट में लिखा गया है कि आचार्य द्विवेदी ने हिंदी खड़ी बोली को काव्य की भाषा बनाने का श्रेयस्कर कार्य किया। साथ ही हिंदी भाषा साहित्य एक नई दिशा और गति प्रदान की। इसके फलस्वरूप उनको आचार्यत्व का पद प्राप्त हुआ। शिलापट पर यह भी अंकित है कि इस साहित्यकार का स्वर्गवास 21 दिसंबर 1938 में हुआ। इस शिलापट को जारी करने वाले अधिकारी का नाम, पद और विभाग उस पर अंकित नहीं है।
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इसे लेकर आरएसएस के प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ. मुरारजी त्रिपाठी ने एनसीआर के जीएम को पत्र लिख कर शिकायत की है। आरएसएस के प्रचार प्रमुख ने पत्र में लिखा है कि आचार्य महावीर प्रसाद लखनऊ से निकलने वाली किसी पत्रिका के संपादक नहीं थे। देश में हिंदी साहित्य को दिशा देने वाली सरस्वती पत्रिका प्रयागराज से प्रकाशित होती रही है, लखनऊ से नहीं। ऐसे में रेलवे को अपनी इस गलती में सुधार करना चाहिए। ताकि लोगों को आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के बारे में गलत जानकारी देने से रोका जा सके।

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