Railway News : एलएचबी रेक से लैस हुई कालिंदी एक्सप्रेस, बढ़ गईं 616 बर्थ, रोहतक और भिवानी की राह होगी आसान
प्रयागराज जंक्शन से हरियाणा के भिवानी जाने वाली कालिंदी एक्सप्रेस में अब सफर पहले से ज्यादा आरामदायक होगा। उत्तर मध्य रेलवे प्रशासन ने कालिंदी एक्सप्रेस को लिंक हाॅफमैन बुश (एलएचबी) रेक से लैस कर दिया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
प्रयागराज जंक्शन से हरियाणा के भिवानी जाने वाली कालिंदी एक्सप्रेस में अब सफर पहले से ज्यादा आरामदायक होगा। उत्तर मध्य रेलवे प्रशासन ने कालिंदी एक्सप्रेस को लिंक हाॅफमैन बुश (एलएचबी) रेक से लैस कर दिया है। बुधवार को इस ट्रेन में पुराने आईसीएफ रेक को हटाकर एलएचबी रेक लगा दिया गया। एलएचबी रेक लगने के बाद कालिंदी एक्सप्रेस में 616 बर्थ भी बढ़ गई। इसका फायदा दिल्ली, रोहतक एवं भिवानी जाने वाले यात्रियों को सीधे तौर पर मिला है।
कालिंदी एक्सप्रेस में एलएचबी रेक लगाए जाने के साथ ही उसके प्लेटफार्म संख्या में भी बुधवार से बदलाव हो गया। अभी तक यह ट्रेन प्लेटफार्म नंबर छह से रवाना हो रही थी, जो बुधवार से प्लेटफार्म नंबर एक से चलनी शुरू हो गई। पुराने आईसीएफ कोच के साथ कालिंदी में अभी तक 16 कोच ही थे, लेकिन अब इसमें कोच की संख्या 22 हो गई है। कालिंदी में अभी तक तीन ही एसी कोच थे, अब इसकी संख्या 11 हो गई है। वहीं, स्लीपर कोच की संख्या घटकर सात से पांच हो गई है।
ट्रेन में जनरल कोच पहले की तरह चार ही हैं। एक कोच लगेज जनरेटर ब्रेकवान का एवं एक कोच सेकंड क्लास लगेज कम दिव्यांगजन एवं ब्रेकवान का लगाया गया है। हालांकि, इसमें अब एसी फर्स्ट कोच की सुविधा यात्रियों को नहीं मिलेगी। क्योंकि, कालिंदी से अब एसी फर्स्ट कम टू का कोच हटा दिया गया है। इसके रेक का इस्तेमाल प्रयागराज-डा. अंबेडकरनगर एक्सप्रेस में भी होगा।
एलएचबी रेक की खूबियांं
- एलएचबी रेक वाली ट्रेनें 160 से 180 किमी की रफ्तार से दौड़ सकती हैं।
- एलएचबी कोच की लंबाई 23.54 मीटर एवं आईसीएफ कोच की लंबाई 21.77 मीटर होती है।
- आईसीएफ के मुकाबले एलएचबी कोच की खिड़कियां बड़ी और चौड़ी होती है।
- ट्रेन चलने पर एलएचबी कोच की आवाज 60 डेसिबल तक जबकि आईसीएफ 100 डेसिबल तक आवाज करते हैं।
- हादसा होने पर आईसीएफ के मुकाबले एलएचबी रेक वाली ट्रेनों में जान माल का कम होता है नुकसान।
- कोच की लंबाई ज्यादा होने से स्लीपर, एसी थ्री, एसी टू कोच में रहती हैं ज्यादा बर्थ ।
कालिंदी एक्सप्रेस में बर्थ की संख्या
कोच की श्रेणी : आईसीएफ : एलएचबी
स्लीपर : 504 : 400
एसी थ्री : 128 : 360
एसी इकोनॉमी : उपलब्ध नहीं : 320
एसी टू कम एसी फर्स्ट : 36 : उपलब्ध नहीं
एसी टू : उपलब्ध नहीं : 104
‘भिवानी जाने वाली कालिंदी एक्सप्रेस अब एलएचबी रेक से लैस हो गई है। इसमें आरक्षित बर्थ की भी संख्या पहले के मुकाबले तकरीबन दो गुना बढ़ी है। एनसीआर की 34 ट्रेनों में अब एलएचबी रेक लग गया है। अब आईसीएफ वाली 15 ट्रेन ही रह गई हैं।’ - शशिकांत त्रिपाठी, सीपीआरओ, एनसीआर।