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अतिथि प्रवक्ता की नियुक्ति पर उठे सवाल
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 01 Jul 2017 02:11 AM IST
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में इन दिनों चल रही अतिथि प्रवक्ताओं की नियुक्ति सवालों के घेरे में है। मामले में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को शिकायत भेजकर आरोप लगाया गया है कि नियुक्ति में यूजीसी के मानकों का अनुपालन नहीं किया गया है। वहीं, इविवि प्रशासन का दावा है कि नियुक्तियां यूजीसी के मानक के अनुरूप हो रही हैं।
अतिथि प्रवक्ताओं की इंटरव्यू प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। इसके लिए अलग-अलग संकायों के डीन के नेतृत्व में साक्षात्कार कमेटियों का भी गठन किया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सात जून को विज्ञापन जारी कर अतिथि प्रवक्ता पद पर नियुक्ति के लिए 20 जून तक आवेदन मांगे थे। छह जून को वेबसाइट पर भी इस बाबत सूचना जारी कर दी गई थी लेकिन अब इसको को लेकर नया विवाद उत्पन्न हो गया है। करेली निवासी डॉ. सगीरुल मेहंदी ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को पत्र लिखकर बताया है कि यूजीसी के ऑर्डिनेंस नंबर-19 के तहत आवेदन के लिए विज्ञापन की तिथि से कम से कम 30 दिन का समय अभ्यर्थियों को मिलना चाहिए लेकिन इविवि प्रशासन ने इसके लिए 13 दिन का समय दिया।
इसके अलावा यूजीसी का मानक है कि अतिथि प्रवक्ताओं की नियुक्ति की प्रक्रिया भी नियमित शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया के समान होनी चाहिए लेकिन इस मानक का आधा-अधूरा अनुपालन हुआ। उधर, इविवि के फैकेल्टी रिकूटमेंट सेल के निदेशक प्रो. अनुपम दीक्षित का कहना है कि तीन जुलाई से विश्वविद्यालय खुल रहा है। यूजीसी से स्पष्ट निर्देश न मिलने के बाद नियमित शिक्षकों की नियुक्तियां अटकी हुई हैं जबकि इसके लिए अप्रैल में ही विज्ञापन कर दिया गया था। विश्वविद्यालय खुलने पर 25 हजार से अधिक छात्र आएंगे और उन्हें पढ़ाने के लिए महज 300 शिक्षक हैं, सो इविवि का लक्ष्य है कि अतिथि प्रवक्ताओं की नियुक्ति प्रक्रिया हर हाल में चार जुलाई तक पूरी कर ली जाए। सबकुछ यूजीसी के मानक के अनुरूप हो रहा है। आवेदन के लिए विज्ञापन जारी किया गया और साक्षात्कार के लिए कमेटियां भी बनाई गईं। पूरी नियुक्ति प्रक्रिया पर सीधे वीसी निगरानी रख रहे हैं।
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अतिथि प्रवक्ताओं की इंटरव्यू प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। इसके लिए अलग-अलग संकायों के डीन के नेतृत्व में साक्षात्कार कमेटियों का भी गठन किया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सात जून को विज्ञापन जारी कर अतिथि प्रवक्ता पद पर नियुक्ति के लिए 20 जून तक आवेदन मांगे थे। छह जून को वेबसाइट पर भी इस बाबत सूचना जारी कर दी गई थी लेकिन अब इसको को लेकर नया विवाद उत्पन्न हो गया है। करेली निवासी डॉ. सगीरुल मेहंदी ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को पत्र लिखकर बताया है कि यूजीसी के ऑर्डिनेंस नंबर-19 के तहत आवेदन के लिए विज्ञापन की तिथि से कम से कम 30 दिन का समय अभ्यर्थियों को मिलना चाहिए लेकिन इविवि प्रशासन ने इसके लिए 13 दिन का समय दिया।
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इसके अलावा यूजीसी का मानक है कि अतिथि प्रवक्ताओं की नियुक्ति की प्रक्रिया भी नियमित शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया के समान होनी चाहिए लेकिन इस मानक का आधा-अधूरा अनुपालन हुआ। उधर, इविवि के फैकेल्टी रिकूटमेंट सेल के निदेशक प्रो. अनुपम दीक्षित का कहना है कि तीन जुलाई से विश्वविद्यालय खुल रहा है। यूजीसी से स्पष्ट निर्देश न मिलने के बाद नियमित शिक्षकों की नियुक्तियां अटकी हुई हैं जबकि इसके लिए अप्रैल में ही विज्ञापन कर दिया गया था। विश्वविद्यालय खुलने पर 25 हजार से अधिक छात्र आएंगे और उन्हें पढ़ाने के लिए महज 300 शिक्षक हैं, सो इविवि का लक्ष्य है कि अतिथि प्रवक्ताओं की नियुक्ति प्रक्रिया हर हाल में चार जुलाई तक पूरी कर ली जाए। सबकुछ यूजीसी के मानक के अनुरूप हो रहा है। आवेदन के लिए विज्ञापन जारी किया गया और साक्षात्कार के लिए कमेटियां भी बनाई गईं। पूरी नियुक्ति प्रक्रिया पर सीधे वीसी निगरानी रख रहे हैं।
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