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Prayagraj News: ध्वस्त होगा रानी बेतिया का महल, बनेगा विशिष्ट अतिथि गृह, डीएम ने जारी किया आदेश

Fri, 13 Jun 2025 01:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 13 Jun 2025 01:52 AM IST
सार

बिहार सरकार ने बेतिया राज की सभी तरह की संपत्तियों को कब्जे में लेने का निर्णय लिया है। प्रयागराज में फिलहाल दो भूखंड सिविल लाइंस एवं कीडगंज में चिह्नित किए गए हैं, जिन पर बिहार की ओर से दावा किया गया था।

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Queen Betiya's palace will be demolished, a special guest house will be built
रानी बेतिया का महल। अमर उजाला। - फोटो : shiv tripathi

विस्तार

सिविल लाइंस के स्ट्रैची रोड स्थित रानी बेतिया का महल ध्वस्त किया जाएगा। उसकी जगह अतिथि विशिष्ट गृह का निर्माण कराया जाएगा। अतिथि गृह के निर्माण के लिए डीएम की ओर से आदेश दे दिया गया है।

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बिहार सरकार ने बेतिया राज की सभी तरह की संपत्तियों को कब्जे में लेने का निर्णय लिया है। प्रयागराज में फिलहाल दो भूखंड सिविल लाइंस एवं कीडगंज में चिह्नित किए गए हैं, जिन पर बिहार की ओर से दावा किया गया था। सिविल लाइंस स्थित भूखंड को रानी बेतिया का महल व कीडगंज की जमीन को रानी बेतिया का हाता के नाम से जाना जाता है।
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बिहार सरकार की ओर से दावा किया गया तो छानबीन में पता चला कि सिविल लाइंस में स्ट्रैची रोड स्थित रानी बेतिया का भवन नजूल भूमि पर बना है। रानी ने आजादी से पहले इसे किराये पर लिया था। यानि, यह उत्तर प्रदेश सरकार की ही जमीन है। इस तथ्य से बिहार सरकार को अवगत करा दिया गया है।
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डीएम रविंद्र कुमार मांदड़ ने बताया इस पर विशिष्ट अतिथि गृह बनाने का आदेश दिया है। इसके निर्माण के लिए जमीन लोक निर्माण विभाग को सौंप दी गई है। आगे की प्रक्रिया पूर कर जल्द ही निर्माण शुरू होगा।

11,000 वर्गमीटर में बना है रानी बेतिया का महल

रानी बेतिया का महल 11,000 वर्ग मीटर में बना है। हरेंद्र किशोर सिंह बेतिया राज के आखिरी राजा थे, जिनका मार्च 1993 में निधन हो गया था। इसके बाद इनकी पहली पत्नी रतन कुंवर बेतिया राज की महारानी बनीं लेकिन उनका भी 1896 में निधन हो गया। इनके बाद दूसरी पत्नी महारानी जानकी कुंवर ने बेतिया राज को संभाला लेकिन बिहार सरकार ने इन्हें अयोग्य घोषित कर दिया और पूरी संपत्ति बिहार सरकार ने ले ली। इसके बाद महारानी जानकी कुंवर प्रयागराज आ गईं और सिविल लाइंस में स्ट्रैची रोड पर भवन बनाकर रहने लगीं। बिहार सरकार के दस्तावेज के अनुसार इसी भवन में 24 नवंबर 1954 को उनका निधन हो गया। जांच में पता चला कि यह नजूल भूमि है।

अतिथि गृह बनाने का पहले ही लिया जा चुका था निर्णय

रानी बेतिया के महल से संबंधित भूखंड पर एक साल पहले ही विशिष्ट अतिथि गृह के निर्माण का निर्णय ले लिया गया था लेकिन अलग-अलग कारणों से निर्माण शुरू नहीं हो सका। हालांकि, अब डीएम के आदेश के बाद रास्ता साफ हो गया है। इस परिसर में अभी औद्योगिक न्यायाधिकरण एवं श्रम न्यायालय के रजिस्ट्रार का मुख्यालय है। यह कार्यालय अब भी इसी में रहेगा। श्रम न्यायालय का निर्माण 1,000 वर्गमीटर में कराया जाएगा। शेष 10000 वर्गमीटर में विशिष्ट अतिथि गृह का निर्माण कराया जाएगा।

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