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उपेक्षा से नाराज पुरी शंकराचार्य नहीं लगाएंगे शिविर
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
Updated Thu, 13 Dec 2018 01:00 AM IST
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प्रयागराज
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो,प्रयागराज
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कुंभ मेले में उचित जगह पर जमीन न दिए जाने से पुरी पीठाधीश्वर बेहद नाराज और व्यथित हैं। प्रदेश सरकार और कुंभ मेला प्रशासन की उपेक्षा से नाराज पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने बुधवार को कहा कि इस बार कुंभ में उनका शिविर नहीं लगेगा। वह कुंभ के दौरान प्रयाग तो आएंगे लेकिन मेले की बजाए झूंसी आश्रम रुकेंगे। वहीं से ही गंगा स्नान भी करेंगे।
नई झूंसी स्थित शिवगंगा आश्रम में पत्रकारों से बातचीत में गोवर्धनमठ पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने कहा कि कुंभ मेले में शासन और प्रशासन उनकी भारी उपेक्षा कर रहा है। उन्हें नाले के बगल में जमीन आवंटित की गई है। ऐसी स्थिति में वहां शिविर लगाना संभव नहीं है। कहा कि तीर्थराज को प्रणाम करता हूं और समय-समय पर आता रहूंगा। अर्द्ध कुंभ के दौरान भी आएंगे लेकिन, झूंसी के शिवगंगा आश्रम में रुकेंगे।
कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कुंभ मेले के स्नान पर्वों की अंकतालिका का लोकार्पण कराने उनके पास वृंदावन तक आए। उनका भी दायित्व था कि शंकराचार्य की गरिमा के अनुरूप कुंभ मेले में उचित स्थान दिलवाते। कहा कि आक्सफोर्ड, कैंब्रिज विश्वविद्यालय, दक्षिण कोरिया तथा उत्तर कोरिया के गणितज्ञ उनके पास गणित की जटिल पहेली सुलझाने के लिए आते हैं। बावजूद इसके शासनतंत्र ने उन्हें हमेशा उपेक्षित रखा। श्री रामजन्म भूमि पर मंदिर निर्माण को लेकर कहा कि अगर उन्होंने रामालय ट्रस्ट पर हस्ताक्षर कर दिया होता तो भगवान राम मंदिर तंबु में नहीं भव्य मंदिर में होते। अगल-बगल या आमने-सामने मस्जिद भी होती।
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नई झूंसी स्थित शिवगंगा आश्रम में पत्रकारों से बातचीत में गोवर्धनमठ पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने कहा कि कुंभ मेले में शासन और प्रशासन उनकी भारी उपेक्षा कर रहा है। उन्हें नाले के बगल में जमीन आवंटित की गई है। ऐसी स्थिति में वहां शिविर लगाना संभव नहीं है। कहा कि तीर्थराज को प्रणाम करता हूं और समय-समय पर आता रहूंगा। अर्द्ध कुंभ के दौरान भी आएंगे लेकिन, झूंसी के शिवगंगा आश्रम में रुकेंगे।
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कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कुंभ मेले के स्नान पर्वों की अंकतालिका का लोकार्पण कराने उनके पास वृंदावन तक आए। उनका भी दायित्व था कि शंकराचार्य की गरिमा के अनुरूप कुंभ मेले में उचित स्थान दिलवाते। कहा कि आक्सफोर्ड, कैंब्रिज विश्वविद्यालय, दक्षिण कोरिया तथा उत्तर कोरिया के गणितज्ञ उनके पास गणित की जटिल पहेली सुलझाने के लिए आते हैं। बावजूद इसके शासनतंत्र ने उन्हें हमेशा उपेक्षित रखा। श्री रामजन्म भूमि पर मंदिर निर्माण को लेकर कहा कि अगर उन्होंने रामालय ट्रस्ट पर हस्ताक्षर कर दिया होता तो भगवान राम मंदिर तंबु में नहीं भव्य मंदिर में होते। अगल-बगल या आमने-सामने मस्जिद भी होती।
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