फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Public interest litigation filed with a spirit of vengeance is not acceptable: High Court

बदले की भावना से दायर जनहित याचिका स्वीकार्य नहीं: हाईकोर्ट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 15 May 2026 02:25 AM IST
विज्ञापन
Public interest litigation filed with a spirit of vengeance is not acceptable: High Court
विज्ञापन

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के ट्रॉमा सेंटर और सर सुंदरलाल अस्पताल में टेंडरों में भ्रष्टाचार की जांच की मांग वाली जनहित याचिका खारिज कर दी। कहा कि प्रतिद्वंद्विता और बदले की भावना या किसी छिपे व्यक्ति के इशारे पर दायर याचिका को जनहित का माध्यम नहीं बनाया जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने यह टिप्पणी अजय कुमार पांडेय की जनहित याचिका पर की। साथ ही कोर्ट ने बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर प्रभारी सौरभ सिंह समेत प्रतिवादी बनाए गए लोगों को राहत दे दी। याचिका में वाराणसी के बीएचयू ट्रॉमा सेंटर और सर सुंदरलाल अस्पताल की ओर से प्रतिवादी कंपनियों को दिए गए कई ठेकों को निरस्त करने, सीबीआई, सीवीसी और न्यायिक अधिकारी की संयुक्त जांच समिति गठित करने की मांग की गई थी।
विज्ञापन

आरोप लगाया गया था कि प्रोफेसर इंचार्ज के रिश्तेदारों को बाजार मूल्य से कहीं अधिक दरों पर टेंडर देकर बीएचयू को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाया गया। सुनवाई के दौरान सौरभ सिंह और अन्य की ओर से दलील दी गई कि इसी प्रकार के आरोपों वाली एक पूर्व आपराधिक रिट याचिका पहले विजय प्रकाश शुक्ला की ओर से दायर की गई थी, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। कोर्ट के समक्ष दोनों याचिकाओं के समान पैराग्राफ का तुलनात्मक चार्ट भी प्रस्तुत किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

याची की ओर से दाखिल हलफनामे में स्वीकार किया गया कि पूर्व याचिका से प्रेरणा लेकर कुछ पैराग्राफ शामिल किए गए थे। कोर्ट ने कहा कि याची ने स्वयं को केवल मानवाधिकार कार्यकर्ता और सामान्य नागरिक बताया है। जबकि उसके पेशे, योग्यता और तकनीकी जानकारी का कोई उल्लेख नहीं किया गया। रिकॉर्ड के अनुसार वह बलिया निवासी कृषक है। कोर्ट ने पूछा कि जीएम पोर्टल और टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी जटिल जानकारियां एक कृषक ने किस प्रकार प्राप्त की। इस पर याची पक्ष संतोषजनक जवाब नहीं दे सका।

कोर्ट ने कहा कि परिस्थितियों से यह स्पष्ट है कि याचिका किसी छिपे व्यक्ति के इशारे पर दायर की गई, जो स्वयं सामने नहीं आना चाहता। इसलिए ऐसी याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि याची के आचरण और अदालत में जो कुछ हुआ, उसे देखते हुए भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए था। लेकिन कोर्ट याची और इसमें शामिल लोगों को चेतावनी देकर छोड़ती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed