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अभियुक्तों को आई चोटें साबित करने का भार अभियोजन पर: हाईकोर्ट
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Prosecution burden on accused to prove injuries: High court
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि मारपीट या हत्या की घटना में अभियुक्त पक्ष को आईं चोटों को साबित करने की जिम्मेदारी अभियोजन पक्ष की है। यदि अभियोजन यह नहीं बता पाता है कि अभियुक्त को चोटें कैसे आई हैं तो इसका यह अर्थ होगा अभियोजन घटना की सच्चाई को सामने नहीं लाया पाया है और उसके द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य व गवाह विश्वसनीय नहीं हैं। हत्या के एक मामले में सजायाफ्ता छह अभियुक्तों की अपील पर सुनवाई करते हुए निर्णय न्यायमूर्ति शेखर यादव ने सुनाया।
अपील की सुनवाई न्यायमूर्ति अमित बी स्थालकर और न्यायमूर्ति शेखर यादव की पीठ कर रही है। कोर्ट ने सभी अभियुक्तों की अपील लंबित रहने के दौरान जमानत मंजूर कर ली है। अदालत का कहना था कि यह तय विधि सिद्धांत है कि यदि घटना के दौरान अभियुक्त पक्ष को चोटें आई हैं तो अभियोजन की जिम्मेदारी है कि वह इन चोटों को साबित करे कि किन हालात में चोटें आई हैं। ऐसा नहीं करने से अभियुक्त पक्ष जमानत पाने का हकदार है। इस मामले में अभियोजन द्वारा अभियुक्तों को आई चोटों को साबित नहीं किया गया है। जबकि अभियुक्त पक्ष के भी चार लोगों की घटना के दौरान गंभीर चोटें आई थी।
मामले के अनुसार आगरा के कंगरोल थाने में 10 अगस्त 2009 को वादी रमेश सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी की खेत की नाप जोख के दौरान उसके गांव के ही सूरजभान, जोमदार, महेश, शिशुपाल, सुरेंद्र और सत्येंद्र ने उसके सहित भाई राजीव पिता हरचरन व एक अन्य राजन सिंह पर जानलेवा कर दिया।
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देशी पिस्तौल से गोलियां चलाईं, जिसमें राजीव की मौके पर ही मौत हो गई और शिकायतकर्ता व उसके पिता गंभीर रूप से घायल हुए। इस मामले में क्रास केस दर्ज हुआ है। सेशन कोर्ट आगरा ने अभियुक्त पक्ष के छह लोगों को उम्रकैद और शिकायतकर्ता पक्ष के चार लोगों सहित कुल दस लोगों को सजा सुनाई है। सजा के खिलाफ सभी छह अभियुक्तों ने अपील दाखिल की है। कोर्ट ने अपील लंबित रहने के दौरान सूरजभान, जोमदार, महेश, शिशुपाल, सुरेंद्र और सत्येंद्र की जमानत मंजूर कर ली है।
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अपील की सुनवाई न्यायमूर्ति अमित बी स्थालकर और न्यायमूर्ति शेखर यादव की पीठ कर रही है। कोर्ट ने सभी अभियुक्तों की अपील लंबित रहने के दौरान जमानत मंजूर कर ली है। अदालत का कहना था कि यह तय विधि सिद्धांत है कि यदि घटना के दौरान अभियुक्त पक्ष को चोटें आई हैं तो अभियोजन की जिम्मेदारी है कि वह इन चोटों को साबित करे कि किन हालात में चोटें आई हैं। ऐसा नहीं करने से अभियुक्त पक्ष जमानत पाने का हकदार है। इस मामले में अभियोजन द्वारा अभियुक्तों को आई चोटों को साबित नहीं किया गया है। जबकि अभियुक्त पक्ष के भी चार लोगों की घटना के दौरान गंभीर चोटें आई थी।
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मामले के अनुसार आगरा के कंगरोल थाने में 10 अगस्त 2009 को वादी रमेश सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी की खेत की नाप जोख के दौरान उसके गांव के ही सूरजभान, जोमदार, महेश, शिशुपाल, सुरेंद्र और सत्येंद्र ने उसके सहित भाई राजीव पिता हरचरन व एक अन्य राजन सिंह पर जानलेवा कर दिया।
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देशी पिस्तौल से गोलियां चलाईं, जिसमें राजीव की मौके पर ही मौत हो गई और शिकायतकर्ता व उसके पिता गंभीर रूप से घायल हुए। इस मामले में क्रास केस दर्ज हुआ है। सेशन कोर्ट आगरा ने अभियुक्त पक्ष के छह लोगों को उम्रकैद और शिकायतकर्ता पक्ष के चार लोगों सहित कुल दस लोगों को सजा सुनाई है। सजा के खिलाफ सभी छह अभियुक्तों ने अपील दाखिल की है। कोर्ट ने अपील लंबित रहने के दौरान सूरजभान, जोमदार, महेश, शिशुपाल, सुरेंद्र और सत्येंद्र की जमानत मंजूर कर ली है।