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भ्रष्टाचार के मामले में जांच लंबित होने पर रोकी जा सकती है पदोन्नति : कैट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 16 Oct 2026 02:21 AM IST
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Promotions can be withheld pending corruption probe: CAT
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की इलाहाबाद पीठ ने कहा है कि भ्रष्टाचार के आरोप में दर्ज केस की जांच लंबित होने पर कर्मचारी को सतर्कता मंजूरी (विजिलेंस क्लीयरेंस) देने से इन्कार किया जा सकता है। विभागीय परीक्षा में सफल होने मात्र से कर्मचारी को पदोन्नति का पक्का अधिकार नहीं मिल जाता।
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संबंधित पद पर नियुक्ति के लिए निर्धारित शर्तों को पूरा करना भी जरूरी है। इसी टिप्पणी के साथ अधिकरण ने केंद्रीय विद्यालय संगठन के उपप्रधानाचार्य की प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नति रोकने के फैसले को सही ठहराते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी। यह आदेश न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति राजीव जोशी व प्रशासनिक सदस्य अंजनी नंदन शरन की पीठ ने दिया है।
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मुजफ्फरनगर के राजीव कुमार महाजन केंद्रीय विद्यालय संगठन में उपप्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने वर्ष 2022 में प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नति के लिए विभागीय प्रतियोगी परीक्षा दी थी। परीक्षा में सफल होने के बाद संगठन ने 16 अगस्त 2023 को उन्हें नियुक्ति पत्र जारी किया। हालांकि, जम्मू-कश्मीर के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में उनके खिलाफ दर्ज मामले के कारण 21 अगस्त 2023 को नियुक्ति पर रोक लगा दी गई। याची ने इसे कैट में चुनौती दी।
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याची का कहना था कि पद के लिए पात्रता तय करने की निर्णायक तारीख एक अप्रैल 2022 थी। उस समय तक उनके खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल नहीं हुआ था। आरोपपत्र नौ मई 2023 को दाखिल किया गया। इसलिए बाद की कार्रवाई के आधार पर उनकी पदोन्नति रोकना उचित नहीं है।

वहीं, केंद्रीय विद्यालय संगठन ने दलील दी कि याची के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में जांच चल रही थी। अभियोजन की मंजूरी भी मिल चुकी थी और नियुक्ति पत्र जारी होने से पहले आरोपपत्र अदालत में दाखिल हो गया था। ऐसे में सतर्कता मंजूरी के बिना उन्हें प्रधानाचार्य पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकता। पीठ ने पक्षों को सुनने के बाद याचिका खारिज कर दी।
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