हाईकोर्ट : पीएम पर विवादास्पद टिप्पणी करने वाले के खिलाफ उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक
यह आदेश न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति नंद प्रभा शुक्ला की खंडपीठ ने प्रयागराज के करेली थाने में मोहम्मद फरहान की ओर से प्राथमिकी को रद्द करने की मांग वाली दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विवादास्पद टिप्पणी करने वाले ऑल इंडिया मजलिस-ए- इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के उत्तर प्रदेश के प्रवक्ता मोहम्मद फरहान को अंतरिम राहत प्रदान की है। कोर्ट ने कहा है कि प्रथमदृष्टया याची फरहान द्वारा कहे गए शब्द आईपीसी की धारा 504 के दायरे में नहीं आते हैं। लिहाजा, पुलिस रिपोर्ट जमा होने तक उसके खिलाफ कोई उत्पीड़नात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। कोर्ट ने मामले में प्रदेश सरकार से तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है।
यह आदेश न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति नंद प्रभा शुक्ला की खंडपीठ ने प्रयागराज के करेली थाने में मोहम्मद फरहान की ओर से प्राथमिकी को रद्द करने की मांग वाली दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
याची फरहान के खिलाफ आरोप है कि उसने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर अभद्र टिप्पणी की। याची का वीडियो वायरल होने के बाद उसके खिलाफ करेली थाने में पिछले वर्ष आईपीसी की धारा 504 और आईटी (संशोधन) एक्ट की धारा 66 के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। याची ने उसे चुनौती देते हुए रद्द करने की मांग की।
याची फरहान की ओर से तर्क दिया कि उसके द्वारा कहा गया शब्द अपमानजनक या अशोभनीय नहीं कहा जा सकता है, जो आईपीसी की धारा 504 के दायरे में आता है। याची ने कहा कि यह धारा तब लागू होती है जब व्यक्ति जानबूझकर किसी अन्य व्यक्ति को उकसाकर उसका अपमान करता है, जिससे शांति भंग होती हो। याची ने ऐसा नहीं कहा। याची द्वारा की गई टिप्पणी राजनीतिक थी, जिसके जरिए सार्वजनिक शांति भंग करने या किसी अपराध पर टिप्पणी करने के लिए उकसाने के लिए नहीं की गई थी।
हालांकि सरकारी अधिवक्ता ने इसका विरोध किया। कहा कि याची ने प्राथमिकी में आरोपों से इंकार नहीं किया है। वह एक राजनीतिक दल का प्रवक्ता है और अराजनीतिक बयान दिया, जिसे वायरल कर दिया गया। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि मौजूदा मामला आईपीसी की धारा 504 के दायरे में नहीं आता है। इस मामले में विचार करने की आवश्यकता है। लिहाजा, आरोपी को अंतरिम राहत दी जाती है। कोर्ट ने मामले में यूपी सरकार से तीन हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा है।