प्रोफेसर फात्मी बोले : जिस जगह बने थे मकान, वह फ्री होल्ड हो तभी करेंगे दोबारा निर्माण, हमें अतीक से क्या लेना
इलाहाबाद विश्वविद्यालय उर्दू विभाग के विभागाध्यक्ष रहे प्रोफेसर अली अहमद फात्मी ने अतीक से जोड़कर उनका मकान गिराए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कहा कि उनका अतीक से क्या लेना देना है। उन्होंने न्याय देने के लिए सुप्रीम कोर्ट के प्रति आभार जताया है। कहा कि जमीन को फ्री होल्ड करने पर ही वह फिर से मकान का निर्माण कराएंगे।
विस्तार
साहित्यकार प्रो. अली अहमद फातमी समेत आठ लोगों के भवनों को ध्वस्त करने से खाली हुई जमीन फ्री होल्ड होने पर ही पीड़ित वहां फिर मकान बनवाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों ही पांच पीड़ितों को 10-10 लाख का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। जिनके मकान ध्वस्त हुए, उनमें राजीव, शाहिद और राना की मौत हो चुकी है।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के अध्यक्ष रहे साहित्यकार प्रो. अली अहमद फातमी, उनकी बेटी नायला फातमी, शहनाज, मेमुना, जुल्फीकार अहमद, राजीव खखंदा, शाहिद, राना फातमी सहित आठ घरों को ध्वस्त कर दिया था। इसके खिलाफ प्रो. फातमी, जुल्फिकार अहमद, नायला, शहनाज, मेमुना सहित पांच लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में दस्तक दी थी।
कोर्ट ने छह हफ्ते के अंदर 10-10 लाख मुआवजा देने का निर्देश दिया है। आठ मकान ध्वस्त कराए गए थे, उसका मलबा वहीं पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने समुचित प्रक्रिया का पालन किए बगैर बुलडोजर चलाने को असंवैधानिक और अमानवीय कार्रवाई बताया था।
प्रो. फातमी ने कहा, हम सुप्रीम कोर्ट के शुक्रगुजार हैं कि उनकी फरियाद सुनी। अब प्रशासन अगर भूखंड फ्री होल्ड करता है तो ही वहां घर बनाएंगे। लीज पर दोबारा भूमि नहीं लूंगा। सवाल किया कि राजापुर और सिविल लाइन भी नजूल भूमि पर है, यहां कार्रवाई क्यों नहीं की गई। आठ लोगों के मकान पीडीए ने गिराए।
अतीक से क्या लेना-देनाः प्रो. फातमी
प्रो. फातमी ने अतीक से संबंध जोड़ने पर कड़ा प्रतिवाद किया। बताया, वर्ष 1988 में महमूदा बेगम से प्लॉट की रजिस्ट्री कराई थी। बेटी नायला फातमी के लिए भी पड़ोस में प्लॉट लेकर घर बनवाया था। नजूल भूमि के पट्टे की सीमा 1999 में खत्म होने से पहले ही नवीनीकरण के लिए पैसा जमा कर दिया था। लेकिन, नवीनीकरण नहीं किया गया। हमें बेवजह अतीक से जोड़ कर 32 वर्षों की कमाई रेत की तरह पीडीए ने ध्वस्त कर दी। कहा, जीवनभर छात्रों को पढ़ाया, समाज की सेवा की। हमें अतीक से क्या लेना।
इस मामले में जिला प्रशासन की कोई भूमिका नहीं है। हम पक्षकार भी नहीं हैं। यह मामला पीडीए से संबंधित है। वही निर्णय लेगा। - रविंद्र मांदड़, जिलाधिकारी
लूकरगंज में नोटिस देने के बाद ही नजूल भूमि से अवैध निर्माण हटाए गए थे। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला हमें मान्य है। फैसले की कापी मिलने के बाद ही कुछ आगे बता सकूंगा। - अजीत कुमार सिंह, सचिव, पीडीए