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प्रो. एचसी वर्मा की पाठशाला : जीवन में सफल होने के लिए नंबर से ज्यादा जरूरी है सीखना

Mon, 28 Apr 2025 07:09 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 28 Apr 2025 07:09 PM IST
सार

मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्रीतम दास मेहता प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद पांच सौ से अधिक छात्र-छात्राओं व शिक्षकों को बहुत ही रोचक तरीके से बताया कि जीवन में सीखने और स्कूल में अच्छे अंक लाने में क्या फर्क है। खुद का उदाहरण देते हुए बताया कि 10 साल की उम्र में जब सीधे स्कूल पहंचे तो प्रधानाचार्य ने उनका इंटरव्यू लेने के बाद कक्षा-6 में प्रवेश दिया।

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Prof. HC Verma's School: Learning is more important than marks to succeed in life
मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में अमर उजाला की ओर से प्रो. एचसी वर्मा पाठशाला का आयोजन किया गया। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

हमने जीवन में जो सीखा उसका प्रयोग तो कर लेंगे लेकिन परीक्षा में मिले अंकों का प्रयोग कहां करेंगे। जीवन में सफल होना है तो नंबर से ज्यादा जरूरी है सीखना। भौतिक विज्ञान को बेहद रुचिकर और आसान तरीके से समझाने के लिए विख्यात पद्मश्री प्रो. एचसी वर्मा ने सोमवार को आयोजित अमर उजाला के कार्यक्रम ‘वर्मा सर की क्लास’ में छात्रों को यही नसीहत दी।

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मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्रीतम दास मेहता प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद पांच सौ से अधिक छात्र-छात्राओं व शिक्षकों को बहुत ही रोचक तरीके से बताया कि जीवन में सीखने और स्कूल में अच्छे अंक लाने में क्या फर्क है। खुद का उदाहरण देते हुए बताया कि 10 साल की उम्र में जब सीधे स्कूल पहंचे तो प्रधानाचार्य ने उनका इंटरव्यू लेने के बाद कक्षा-6 में प्रवेश दिया।

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उन्होंने 10 वर्ष की उम्र तक घर में रहकर या बाजार-हाट जाकर जो कुछ सीखा, वही काम आया। हालांकि, कक्षा-छह में फेल होने पर पिता उन्हें दूसरे स्कूल में प्रवेश दिलाने पहुंचे और इस बार नए स्कूल के प्रधानाचार्य ने उन्हें कक्षा-सात में प्रवेश दिया। वह भले फेल हुए थे लेकिन कक्षा-6 में स्कूल की पढ़ाई काम आई और वह कक्षा-सात के योग्य हो गए।

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तीसरी बार भी यही हुआ और फेल होने के बाद भी तीसरे स्कूल में कक्षा-8 में प्रवेश मिला। प्रो. वर्मा ने कहा कि सीखने के साथ-साथ स्कूल की पढ़ाई भी जरूरी है लेकिन नंबरों की दौड़ में शामिल न हों। सीखना हमारी स्वाभाविक प्रवृत्ति है। अपने भीतर जिज्ञासा पैदा करें, क्योंकि यही जिज्ञासा आपको जीवन में आगे ले जाएगी।


इससे पूर्व प्रो. एचसी वर्मा, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. केएन उत्तम, मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य प्रो. वत्सला मिश्रा, ट्रिपलआईटी के स्टेट ऑफिसर डॉ. अखिलेश तिवारी, नासी के कार्यकारी सचिव संतोष शुक्ला व मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग के प्रो. संतोष सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। संचालन माधव दुबे ने किया।


जरूरी नहीं कि जेईई ही करें

प्रो. एचसी वर्मा ने कहा कि जरूरी नहीं कि जेईई ही करें। उन्होंने भी नहीं किया। यहां तक कि राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (नासी) जैसी संस्था से जुड़े देश के शीर्ष वैज्ञानिकों में से 90 फीसदी ने जेईई नहीं किया है।

स्कूल नंबर दिलाने के लिए नहीं, बल्कि सिखाने के लिए हैं

प्रो. वर्मा ने कहा कि स्कूल नंबर दिलाने के लिए नहीं, बल्कि सिखाने के लिए हैं। उन्होंने दर्शक दीर्घा में बैठे विद्यार्थियों से पूछा कि जो भविष्य में शिक्षक बनना चाहे हैं, अपना हाथ उठाएं। महज चार फीसदी बच्चों ने अपने हाथ उठाए तो प्रो. वर्मा बोले कि हम बच्चों को उन्हीं स्कूलों में पढा़ते हैं, जहां अच्छे शिक्षक होते हैं। अगर कोई शिक्षक नहीं बनेगा तो स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी में अच्छे शिक्षक कहां से आएंगे और आपकी अगली पीढ़ी को कौन सिखाएगा।

अपने एजेंडे पर भी करें काम

प्रो. वर्मा ने विद्यार्थियों से कहा कि भविष्य में किसी भी संस्था के लिए काम करें लेकिन अपना एक एजेंडा भी साथ लेकर चलें, जो सोसाइटी के काम आए। आप किसी भी प्रोफेशन में हों लेकिन यह विचार जरूर करें कि आप सोसाइटी के लिए क्या कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब पटना कॉलेज में वह लेक्चरर बने तो पढ़ाने से लेकर कॉपियां जांचने तक उन्हें तमाम जिम्मेदारियां मिलीं। कॉलेज ने उनसे पुस्तक लिखने के लिए नहीं कहा था लेकिन उन्होंने छात्र-छात्राओं के लिए पुस्तक ‘कंसेप्ट्स ऑफ फिजिक्स’ लिखी।

खुशनुमा माहौल में दें परीक्षा

प्रो. वर्मा ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि परीक्षा के दबाव में न आएं और खुशनुमा माहौल में परीक्षा दें। अक्सर होता है कि विद्यार्थी परीक्षा के दौरान जवाब भूल जाते हैं और परीक्षा के बाद उन्हें सबकुछ याद आ जाता जाता है। दरअसल, परीक्षा का डर मस्तिष्क पर इतना हावी हो जाता है कि मस्तिष्क आपको को उससे बचाने में लग जाता है और याद किया हुआ मूल जाता है। डर से बाहर आने के बाद फिर सबकुछ याद आ जाता है।

एक्सपेरिमेंटल स्किल टेस्ट के लिए 20 मई तक आवेदन

विद्यार्थी घर बैठे विज्ञान के प्रयोग कर सकते हैं और अच्छे प्रयोग पर उन्हें पुरस्कृ़त भी किया जाएगा। इसके लिए विद्यार्थियों को नेशनल अन्वेषिका एक्सपेरिमेंट स्किल टेस्ट (एनएईएसटी)-2025 में शामिल होना है, जिसके आवेदन की अंतिम तिथि 20 मई निर्धारित है।

प्रो. एचसी वर्मा ने बताया कि पहला राउंड स्क्रीनिंग का होगा। यूट्यूब पर रोजमर्रा के जीवन से जुड़े वीडियों होंगे, जिनके विज्ञान पर आधारित सवालों के जवाब देने होंगे। दूसरा राउंड ‘एक्सपेरिमेंट हमारा, डिजाइन आपकी’ होगा, जिसमें हम कोई एक्सपेरिमेंट करने को कहेंगे और आपको करके दिखाना होगा। इसमें 40 विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा और इन विद्यार्थियों को सोपान आश्रम लेकर आएंगे, जहां ये तीन दिनों तक रहकर तमाम बड़े वैज्ञानिकों के सानिध्य में विज्ञान के महत्वपूर्ण प्रयोगों के बारे में जानेंगे और सीखेंगे।

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