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प्रो. हांगलू की संवादहीनता ने कई बार कराया बवाजल
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Pro. Hanglu's communication gap caused chaos many times
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति रहे प्रो. आरएल हांगलू और छात्रों के बीच लगातार चार वर्षों तक संवादहीनता का दौर कायम रहा। छात्रसंघ से उन्होंने लगातार दूरी बनाकर रखी। जबकि, छात्रसंघ के पदाधिकारी उसने मिलने के लिए बार-बार प्रयास करते रहे। इसी संवादहीनता ने विश्वविद्यालय में कई बार बवाल भी करा दिया।
हॉस्टलों और छात्रों की तमाम समस्याओं पर वार्ता के लिए छात्रसंघ की ओर से कुलपति से मिलने के लिए लगातार समय मांगा जाता रहा। 28 अप्रैल 2018 की बात है, जब छात्रसंघ के पदाधिकारी और सैकड़ों छात्र कुलपति से मिलने के लिए इविवि के गेस्ट हाउस के बाहर इकट्ठा हो गए। छात्र केवल दो मिनट के लिए कुलपति से मिलना चाहते थे। लेकिन, प्रो. हांगलू इसके लिए तैयार नहीं हुए। तनाव बढ़ता गया और पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। इसके बाद विश्वविद्यालय और आसपास के इलाकों में जमकर बवाल हुए। कई वाहन फूंक दिए गए। तोड़फोड़ और पथराव भी हुआ। बवाल इतना बढ़ गया कि मामला केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय तक पहुंच गया और घटना के सात माह बाद यूजीसी की पांच सदस्यीय टीम इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज, बंगलूरू के प्रो. गौतम देसी राजू की अध्यक्षता में यहां जांच करने पहुंच गई। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर उल्लेख किया कि कुलपति का छात्रों और आम अध्यापकों के साथ कोई संपर्क नहीं रह गया है। हालांकि इस रिपोर्ट के बाद भी कोई बदलाव नहीं हुआ। कुलपति एवं छात्रों के बीच संवादहीनता बनी रही और बार-बार बवाल की वजह बनती रही।
ऋचा ने की पीआरओ को पदमुक्त करने की मांग
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर डेवलपमेंट स्टडीज की शोध छात्रा एवं पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह ने कुलपति को ज्ञापन देकर इविवि के पीआरओ डॉ. चितरंजन कुमार सिंह को पदमुक्त करने की मांग की है। कुलपति को लिखे पत्र में ऋचा ने आरोप लगाया है कि पीआरओ ने अपने ही विश्वविद्यालय की शोध छात्रा की फोटो लगाकर विश्वविद्यालय कार्यालय का दुरुपयोग करते हुए एक फर्जी ऑडियो वायरल कर दिया। इससे पीड़िता की सामाजिक एवं मानसिक क्षति हुई है और शोध कार्य प्रभावित हुआ है। यह गंभीर साइबर अपराध है। विशाखा एवं यूजीसी गाइडलाइन के अनुसार महिला उत्पीड़न का कोई भी आरोपी किसी भी प्रशासनिक पद पर नहीं रह सकता, क्योंकि उनके द्वारा जांच को प्रभावित किया जा सकता है और कार्यालय का दुरुपयोग करने की संभावना है। ऐसे में डॉ. चितरंजन को पीआरओ के पद से मुक्त किया जाए।
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हॉस्टलों और छात्रों की तमाम समस्याओं पर वार्ता के लिए छात्रसंघ की ओर से कुलपति से मिलने के लिए लगातार समय मांगा जाता रहा। 28 अप्रैल 2018 की बात है, जब छात्रसंघ के पदाधिकारी और सैकड़ों छात्र कुलपति से मिलने के लिए इविवि के गेस्ट हाउस के बाहर इकट्ठा हो गए। छात्र केवल दो मिनट के लिए कुलपति से मिलना चाहते थे। लेकिन, प्रो. हांगलू इसके लिए तैयार नहीं हुए। तनाव बढ़ता गया और पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। इसके बाद विश्वविद्यालय और आसपास के इलाकों में जमकर बवाल हुए। कई वाहन फूंक दिए गए। तोड़फोड़ और पथराव भी हुआ। बवाल इतना बढ़ गया कि मामला केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय तक पहुंच गया और घटना के सात माह बाद यूजीसी की पांच सदस्यीय टीम इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज, बंगलूरू के प्रो. गौतम देसी राजू की अध्यक्षता में यहां जांच करने पहुंच गई। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर उल्लेख किया कि कुलपति का छात्रों और आम अध्यापकों के साथ कोई संपर्क नहीं रह गया है। हालांकि इस रिपोर्ट के बाद भी कोई बदलाव नहीं हुआ। कुलपति एवं छात्रों के बीच संवादहीनता बनी रही और बार-बार बवाल की वजह बनती रही।
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ऋचा ने की पीआरओ को पदमुक्त करने की मांग
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर डेवलपमेंट स्टडीज की शोध छात्रा एवं पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह ने कुलपति को ज्ञापन देकर इविवि के पीआरओ डॉ. चितरंजन कुमार सिंह को पदमुक्त करने की मांग की है। कुलपति को लिखे पत्र में ऋचा ने आरोप लगाया है कि पीआरओ ने अपने ही विश्वविद्यालय की शोध छात्रा की फोटो लगाकर विश्वविद्यालय कार्यालय का दुरुपयोग करते हुए एक फर्जी ऑडियो वायरल कर दिया। इससे पीड़िता की सामाजिक एवं मानसिक क्षति हुई है और शोध कार्य प्रभावित हुआ है। यह गंभीर साइबर अपराध है। विशाखा एवं यूजीसी गाइडलाइन के अनुसार महिला उत्पीड़न का कोई भी आरोपी किसी भी प्रशासनिक पद पर नहीं रह सकता, क्योंकि उनके द्वारा जांच को प्रभावित किया जा सकता है और कार्यालय का दुरुपयोग करने की संभावना है। ऐसे में डॉ. चितरंजन को पीआरओ के पद से मुक्त किया जाए।
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