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प्रो. हांगलू के बाद निशाने पर कॉकस
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Pro. After Hanglu, the caucus is now on target
प्रयागराज। कुलपति पद से इस्तीफा दे चुके प्रो. आरएल हांगलू भले ही इलाहाबाद विश्वविद्यालय छोड़कर चले गए, लेकिन जांच ने उनका पीछा नहीं छोड़ा है। प्रो. हांगलू के बाद निशाने पर अब वह कॉकस है, जिस पर यूजीसी की पांच सदस्यीय कमेटी ने गंभीर सवाल उठाए थे। प्रो. हांगलू पर लगे वित्तीय, प्रशासनिक एवं अकादमिक भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के दायरे में यह कॉकस भी आ रहा है।
नवंबर 2018 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय की जांच करने आई यूजीसी की पांच सदस्यीय कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर लिखा था कि विश्वविद्यालय को कुलपति ओर उनकी एक छोटी सी मंडली चला रही है। कुलपति ने सारी शक्ति अपने पास रखी है या इस मंडली को सौंप रखी है। प्रो. हांगलू तो अपने पद से इस्तीफा देकर चले गए, लेकिन इस मंडली ने अब भी विश्वविद्यालय पर कब्जा जमा रखा है। मंडली के तमाम लोगों के पास अब भी महत्वपूर्ण पद हैं। चर्चा है कि कुलपति रहते हुए प्रो. हांगलू ने वित्तीय, प्रशासनिक एवं अकादमिक मामलों में जो भी विवादित निर्णय लिए, इस मंडली की सलाह पर ही लिए।
फिलहाल प्रो. हांगलू की वित्तीय, प्रशासनिक एवं अकादमिक अनियमितताओं की जांच अब यूजीसी के चेयरमैन की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय जांच कमेटी करने जा रही है, लेकिन विश्वविद्यालय में वो मंडली अब भी मौजूद है, जिस पर यूजीसी की कमेटी ने सवाल उठाए थे। नियमित कुलपति की नियुक्ति के बाद इस मंडली के लिए मुसीबत बढ़ सकती है। विश्वविद्यालय के सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रपति के आदेश पर जांच के लिए कमेटी गठित होने के बाद से ही इस मंडली के लोगों में खलबली मची है, क्योंकि जांच कमेटी इनमें से किसी पर भी शिकंजा कस सकती है। साथ ही जांच के दौरान इस मंडली के कुछ लोगों को कमेटी के सवालों का जवाब भी देना होगा।
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अफसरों को हटाने के बाद शुरू हो जांच
संयुक्त संघर्ष समिति ने एमएचआरडी को लिखा पत्र
प्रयागराज। संयुक्त संघर्ष समिति ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को पत्र लिखकर मांग की है कि कुलानुशासक, कुलसचिव, डीएसडब्ल्यू, वित्त अधिकारी और पीआरओ को उनके पद से हटाए जाने के बाद ही प्रो. आरएल हांगलू की वित्तीय, प्रशासनिक एवं अकादमिक अनियमितता की जांच कराई जाए। समिति ने आशंका जताई है कि प्रो. हांगलू के समय नियुक्त ये अफसर जांच को प्रभावित कर सकते हैं।
इस संदर्भ में रविवार को संयुक्त संघर्ष समिति की बैठक भी हुई। छात्र नेता अविनाश विद्यार्थी ने कहा कि किसी भी जांच का मूल सिद्धांत है कि जांच शुरू होने से पहले उसे प्रभावित करने वाले तत्वों को हटा देना चाहिए। छात्रसंघ के निवर्तमान अध्यक्ष उदय प्रकाश यादव ने इसका समर्थन करते हुए कहा कि यही प्राकृतिक न्याय भी है। पूर्व उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह ने कहा कि जांच समिति की घोषणा होते ही इन अफसरों को इस्तीफा दे देना चाहिए था। वहीं, निवर्तमान उपाध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि प्रो. हांगलू के इस्तीफे के बाद कुछ अफसरों ने अपने इस्तीफे दिए और बाद में उनके इस्तीफे नामंजूर कर दिए गए। यह इस बात का प्रमाण है कि जांच को प्रभावित करने की संगठित योजना बनाई गई है। बैठक में सत्यम कुशवाहा, अजय सम्राट, आलोक त्रिपाठी, विवेक यादव, अजय बागी, राहुल आदि मौजूद रहे।
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नवंबर 2018 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय की जांच करने आई यूजीसी की पांच सदस्यीय कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर लिखा था कि विश्वविद्यालय को कुलपति ओर उनकी एक छोटी सी मंडली चला रही है। कुलपति ने सारी शक्ति अपने पास रखी है या इस मंडली को सौंप रखी है। प्रो. हांगलू तो अपने पद से इस्तीफा देकर चले गए, लेकिन इस मंडली ने अब भी विश्वविद्यालय पर कब्जा जमा रखा है। मंडली के तमाम लोगों के पास अब भी महत्वपूर्ण पद हैं। चर्चा है कि कुलपति रहते हुए प्रो. हांगलू ने वित्तीय, प्रशासनिक एवं अकादमिक मामलों में जो भी विवादित निर्णय लिए, इस मंडली की सलाह पर ही लिए।
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फिलहाल प्रो. हांगलू की वित्तीय, प्रशासनिक एवं अकादमिक अनियमितताओं की जांच अब यूजीसी के चेयरमैन की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय जांच कमेटी करने जा रही है, लेकिन विश्वविद्यालय में वो मंडली अब भी मौजूद है, जिस पर यूजीसी की कमेटी ने सवाल उठाए थे। नियमित कुलपति की नियुक्ति के बाद इस मंडली के लिए मुसीबत बढ़ सकती है। विश्वविद्यालय के सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रपति के आदेश पर जांच के लिए कमेटी गठित होने के बाद से ही इस मंडली के लोगों में खलबली मची है, क्योंकि जांच कमेटी इनमें से किसी पर भी शिकंजा कस सकती है। साथ ही जांच के दौरान इस मंडली के कुछ लोगों को कमेटी के सवालों का जवाब भी देना होगा।
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अफसरों को हटाने के बाद शुरू हो जांच
संयुक्त संघर्ष समिति ने एमएचआरडी को लिखा पत्र
प्रयागराज। संयुक्त संघर्ष समिति ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को पत्र लिखकर मांग की है कि कुलानुशासक, कुलसचिव, डीएसडब्ल्यू, वित्त अधिकारी और पीआरओ को उनके पद से हटाए जाने के बाद ही प्रो. आरएल हांगलू की वित्तीय, प्रशासनिक एवं अकादमिक अनियमितता की जांच कराई जाए। समिति ने आशंका जताई है कि प्रो. हांगलू के समय नियुक्त ये अफसर जांच को प्रभावित कर सकते हैं।
इस संदर्भ में रविवार को संयुक्त संघर्ष समिति की बैठक भी हुई। छात्र नेता अविनाश विद्यार्थी ने कहा कि किसी भी जांच का मूल सिद्धांत है कि जांच शुरू होने से पहले उसे प्रभावित करने वाले तत्वों को हटा देना चाहिए। छात्रसंघ के निवर्तमान अध्यक्ष उदय प्रकाश यादव ने इसका समर्थन करते हुए कहा कि यही प्राकृतिक न्याय भी है। पूर्व उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह ने कहा कि जांच समिति की घोषणा होते ही इन अफसरों को इस्तीफा दे देना चाहिए था। वहीं, निवर्तमान उपाध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि प्रो. हांगलू के इस्तीफे के बाद कुछ अफसरों ने अपने इस्तीफे दिए और बाद में उनके इस्तीफे नामंजूर कर दिए गए। यह इस बात का प्रमाण है कि जांच को प्रभावित करने की संगठित योजना बनाई गई है। बैठक में सत्यम कुशवाहा, अजय सम्राट, आलोक त्रिपाठी, विवेक यादव, अजय बागी, राहुल आदि मौजूद रहे।