प्रियंका ने जमीन से जोड़ा रिश्ता, मां-बहनों से जताया अपनेपन का एहसास
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यमुना तट पर बसवार गांव में पहुंची प्रियंका गांधी ने सहजता और अपनापन जोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी। बसवार गांव की उत्तर पट्टी पुरवा में जहां मछुआओं का दुखड़ा सुनने के लिए कुर्सी लगाई गई थी, वह वहां नहीं बैठीं। अलबत्ता सीधे पीड़ित मछुआरों की महिलाओं, बेटियों के बीच जमीन पर बैठ कर उनसे कुछ देर के लिए घुल मिल सी गईं। कभी गांवकी बेटियों के कंधे पर हाथ रखती रहीं तो कभी उन्हें दुलारती रहीं। इस दौरान प्रियंका ने बारी-बारी से महिलाओं की जुबानी जुल्म की कहानी सुनी और उन्हें भरोसा दिलाया कि वह उनकी बेहतरी के लिए जो भी हो सकेगा, करेंगी।
बसवार की पीड़ितों के बीच पहुंचकर प्रियंका ने यह बताने की कोशिश की कि कांग्रेस गरीबों के साथ कदम से कदम मिलाकर खड़ी है। कई बार सुरक्षा घेरा तोड़कर वह गांव की महिलाओं के बीच पहुंचती रहीं, तो लोगों के दरवाजे पर बैठकर हालचाल भी किया। कार्यक्रम स्थल पर पहुंचीं तो वह कुर्सी की बजाए जमीन पर बैठ गईं। कुर्सी पर वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी बैठ गए। इसके बाद उन्होंने वहां खड़ी गांव की कुछ बेटियों को अपने पास बुला लिया। प्रियंका ने पूजा निषाद और माला से घटनाक्रम की जानकारी ली।
इसके बाद वंदना निषाद ने प्रियंका को बताया कि जीना मुहाल हो गया है। चार फरवरी को जिस तरह पुलिस ने पुरुषों को बंधक बनाकर जुल्म ढाया और बेरहमी से महिलाओं-बच्चों को दौड़ा-दौड़ा कर लाठियों से पीटा, उसे बयां नहीं किया जा सकता। दारागंज की सभासद अल्पना निषाद, विद्या देवी निषाद, मंजू निषाद ने भी बारी-बारी से प्रियंका को दुख-दर्द बताया। इनके बाद गांव के पूर्व प्रधान के पुत्र शिव लोचन निषाद ने पूरे गांव की ओर से प्रियंका का स्वागत किया और नदी तट पर खनन पट्टे का अधिकार दिलाने, पर्यावरण के नाम पर एनजीटी की ओर से खनन पर लगाई गई रोक हटवाने के लिए पहल करने और बंद पारंपरिक धंधे को शुरू कराने के लिए आवाज उठाई।