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हाईकोर्ट : पहले से काम करने का अनुभव नियुक्ति का अधिकार नहीं, संविदा शिक्षकों की याचिका खारिज

Sat, 12 Sep 2026 03:18 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 12 Sep 2026 03:18 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से विशेष शिक्षकों के 4900 पदों पर निकाली गई विशेष चयन प्रक्रिया में वर्तमान में संविदा, दैनिक वेतन या आउटसोर्सिंग पर कार्यरत होने की अनिवार्य शर्त को वैध करार दिया है।

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Prior work experience does not confer a right to appointment; contractual teachers petition dismissed.
हाईकोर्ट - फोटो : सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से विशेष शिक्षकों के 4900 पदों पर निकाली गई विशेष चयन प्रक्रिया में वर्तमान में संविदा, दैनिक वेतन या आउटसोर्सिंग पर कार्यरत होने की अनिवार्य शर्त को वैध करार दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह शर्त सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप है। पहले से काम करने का अनुभव नियुक्ति का अधिकार नहीं है। लिहाजा, हाईकोर्ट इसमें अपनी ओर से कोई ढील नहीं दे सकता। यह आदेश देते हुए न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की अदालत ने 2019 से सेवा से बाहर चल रहे विशेष संविदा शिक्षकों की याचिका खारिज कर दी।

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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत शुरू की गई चयन प्रक्रिया में विज्ञापन में प्रयुक्त वर्तमान में कार्यरत शब्द को बदलकर पूर्व में कार्यरत नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि विशेष शिक्षा की डिग्री होना आवश्यक योग्यता पूरी करता है लेकिन इससे वर्तमान में कार्यरत होने की अनिवार्य शर्त समाप्त नहीं होती।
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याचियों की दलील थी कि वे महाराजगंज जिले में समेकित शिक्षा योजना के तहत 2005, 2006, 2010 और 2011 से इटिनरेंट, रिसोर्स टीचर के रूप में काम कर रहे थे। मई 2019 तक सेवा देने के बाद जुलाई 2019 में विभाग ने 12 शिक्षकों का नवीनीकरण किया लेकिन याचियों का नवीनीकरण नहीं किया गया। बाद में उन्होंने नियमित नियुक्ति की मांग की जिसे बेसिक शिक्षा अधिकारी ने खारिज कर दिया।

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हाईकोर्ट ने कहा - चयन प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन

हाईकोर्ट ने कहा कि चयन प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के रजनीश कुमार पांडे के मामले में दिए निर्देशों के अनुपालन में हो रही है। लगभग 4900 पदों के लिए पहले संविदा और आउटसोर्सिंग पर वर्तमान में कार्यरत विशेष शिक्षकों के आवेदन पर विचार किया जाना है। उनके चयन के बाद बचने वाले पदों पर सामान्य सीधी भर्ती होगी। कोर्ट ने कहा कि पात्रता चयन प्रक्रिया में प्रवेश की पहली शर्त है। पूर्व में किया गया कार्य या अनुभव तभी देखा जा सकता है, जब अभ्यर्थी निर्धारित पात्रता पूरी करता हो। सुप्रीम कोर्ट के उमा देवी फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविदा पर पहले किया गया कार्य अपने आप नियमित नियुक्ति का कानूनी अधिकार नहीं देता।


अंतरिम आदेश से स्थायी अधिकार नहीं

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरिम आदेश के आधार पर याचियों को स्क्रीनिंग में शामिल होने का अवसर मिलने और परिणाम सीलबंद रखे जाने से उन्हें अंतिम नियुक्ति का कोई अधिकार नहीं मिल गया। कोर्ट ने कहा कि विज्ञापन की शर्त संख्या दो में कोई विधिक या संवैधानिक खामी नहीं है। याची निर्धारित वर्तमान कार्यरत होने की शर्त पूरी नहीं करते, इसलिए वे चयन प्रक्रिया से बाहर रहेंगे।
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