फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Principal Secretary Environment summoned in court on February 2 in connection with Ganga pollution

High Court : गंगा प्रदूषण के मामले में प्रमुख सचिव पर्यावरण दो फरवरी को कोर्ट में तलब

Thu, 19 Jan 2023 11:25 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 19 Jan 2023 11:25 PM IST
सार

कोर्ट ने यह आदेश राज्य सरकार की ओर से दाखिल हलफनामा अपठनीय संलग्नक के साथ अस्पष्ट होने के कारण दिया है। प्रमुख सचिव ने लखनऊ में हलफनामा तैयार कराकर प्रयागराज भेजा। महाधिवक्ता ने बताया, हलफनामा दिन में साढ़े ग्यारह बजे प्राप्त हुआ।

विज्ञापन
Principal Secretary Environment summoned in court on February 2 in connection with Ganga pollution
court - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गंगा प्रदूषण मामले में प्रमुख सचिव पर्यावरण, उत्तर प्रदेश को सुनवाई की अगली तिथि, दो फरवरी को हाजिर होने का निर्देश दिया है। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल, न्यायमूर्ति एमके गुप्ता तथा न्यायमूर्ति अजित कुमार की पूर्णपीठ ने गंगा प्रदूषण को लेकर कायम जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।

विज्ञापन


कोर्ट ने यह आदेश राज्य सरकार की ओर से दाखिल हलफनामा अपठनीय संलग्नक के साथ अस्पष्ट होने के कारण दिया है। प्रमुख सचिव ने लखनऊ में हलफनामा तैयार कराकर प्रयागराज भेजा। महाधिवक्ता ने बताया, हलफनामा दिन में साढ़े ग्यारह बजे प्राप्त हुआ।
विज्ञापन


कोर्ट ने पूछा, क्या राज्य विधि अधिकारी से हलफनामे का निरीक्षण नहीं कराया गया है। स्पष्ट हलफनामा न होने के कारण प्रमुख सचिव को बुलाया गया है। महाधिवक्ता अजय कुमार मिश्र ने कोर्ट को बताया, माघ मेले में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की अस्थाई व्यवस्था की गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

नालों को टैप किया गया है। उनका शोधन बॉयोरिमेडियल सिस्टम से किया जा रहा है। सलोरी एसटीपी क्षमता के अनुसार शोधन कर रही है। परेड ग्राउंड तथा अलोपीबाग के सीवर का पानी राजापुर एसटीपी को भेजा जा रहा है।

इस पर कोर्ट ने अमर उजाला में छपी बक्शी नाले की तस्वीर महाधिवक्ता को दिखाई। कहा, बॉयोरिमेडियल सिस्टम एक धोखा है और एसटीपी में क्षमता से अधिक गंदा पानी पहुंचने से शोधन, आई वाश (आंखों का धोखा) के सिवाय कुछ नहीं।न्यायमित्र अरुण कुमार गुप्ता ने कहा, शोधन क्षमता का दोगुना पानी एसटीपी में जा रहा है।

अडानी ग्रुप ऑफ कंपनी तथा जल निगम को क्षमता से अधिक पानी आने पर शोधन मानक का पालन न होने पर कार्रवाई से छूट दी गई है। एसटीपी का संचालन अडानी ग्रुप की कंपनी को दिया गया है।

उन्होंने सीवर का कनेक्शन न किए जाने का मामला भी उठाया। केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड के अधिवक्ता बाल मुकुंद सिंह ने कहा, शोधन में मानक का पालन नहीं किया जा रहा। याची अधिवक्ता शैलेश सिंह ने गन्दे नाले, गंगा में जाने का मुद्दा उठाया। साथ ही स्नान पर्व पर पर्याप्त जल आपूर्ति के लिए शासन की तारीफ की।

अधिवक्ता विजय चंद्र श्रीवास्तव तथा सुनीता शर्मा की ओर से बॉयोरिमेडियल सिस्टम को धोखा बताया गया। उन्होंने स्नान पर्व से दो दिन पहले गंगा का पानी भूरा होने का कोर्ट को फोटोग्राफ दिखाया। साथ ही वाराणसी में गंगा पार रेत में टेंट सिटी में व्यापार पर आपत्ति करते हुए कहा कि सरकारी आदेश का खुला उल्लंघन किया जा रहा है।

केंद्र सरकार के जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय की सात अक्तूबर 2016 को जारी अधिसूचना का हवाला दिया गया। इसके मुताबिक गंगा किनारे स्थाई रिहायशी तथा व्यावसायिक निर्माण पर रोक लगी हुई है। इसके बावजूद वाराणसी में टेंट सिटी तैयार कर व्यवसाय किया जा रहा है। याचिका की सुनवाई दो फरवरी को होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed