High Court : गंगा प्रदूषण के मामले में प्रमुख सचिव पर्यावरण दो फरवरी को कोर्ट में तलब
कोर्ट ने यह आदेश राज्य सरकार की ओर से दाखिल हलफनामा अपठनीय संलग्नक के साथ अस्पष्ट होने के कारण दिया है। प्रमुख सचिव ने लखनऊ में हलफनामा तैयार कराकर प्रयागराज भेजा। महाधिवक्ता ने बताया, हलफनामा दिन में साढ़े ग्यारह बजे प्राप्त हुआ।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गंगा प्रदूषण मामले में प्रमुख सचिव पर्यावरण, उत्तर प्रदेश को सुनवाई की अगली तिथि, दो फरवरी को हाजिर होने का निर्देश दिया है। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल, न्यायमूर्ति एमके गुप्ता तथा न्यायमूर्ति अजित कुमार की पूर्णपीठ ने गंगा प्रदूषण को लेकर कायम जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।
कोर्ट ने यह आदेश राज्य सरकार की ओर से दाखिल हलफनामा अपठनीय संलग्नक के साथ अस्पष्ट होने के कारण दिया है। प्रमुख सचिव ने लखनऊ में हलफनामा तैयार कराकर प्रयागराज भेजा। महाधिवक्ता ने बताया, हलफनामा दिन में साढ़े ग्यारह बजे प्राप्त हुआ।
कोर्ट ने पूछा, क्या राज्य विधि अधिकारी से हलफनामे का निरीक्षण नहीं कराया गया है। स्पष्ट हलफनामा न होने के कारण प्रमुख सचिव को बुलाया गया है। महाधिवक्ता अजय कुमार मिश्र ने कोर्ट को बताया, माघ मेले में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की अस्थाई व्यवस्था की गई है।
नालों को टैप किया गया है। उनका शोधन बॉयोरिमेडियल सिस्टम से किया जा रहा है। सलोरी एसटीपी क्षमता के अनुसार शोधन कर रही है। परेड ग्राउंड तथा अलोपीबाग के सीवर का पानी राजापुर एसटीपी को भेजा जा रहा है।
इस पर कोर्ट ने अमर उजाला में छपी बक्शी नाले की तस्वीर महाधिवक्ता को दिखाई। कहा, बॉयोरिमेडियल सिस्टम एक धोखा है और एसटीपी में क्षमता से अधिक गंदा पानी पहुंचने से शोधन, आई वाश (आंखों का धोखा) के सिवाय कुछ नहीं।न्यायमित्र अरुण कुमार गुप्ता ने कहा, शोधन क्षमता का दोगुना पानी एसटीपी में जा रहा है।
अडानी ग्रुप ऑफ कंपनी तथा जल निगम को क्षमता से अधिक पानी आने पर शोधन मानक का पालन न होने पर कार्रवाई से छूट दी गई है। एसटीपी का संचालन अडानी ग्रुप की कंपनी को दिया गया है।
उन्होंने सीवर का कनेक्शन न किए जाने का मामला भी उठाया। केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड के अधिवक्ता बाल मुकुंद सिंह ने कहा, शोधन में मानक का पालन नहीं किया जा रहा। याची अधिवक्ता शैलेश सिंह ने गन्दे नाले, गंगा में जाने का मुद्दा उठाया। साथ ही स्नान पर्व पर पर्याप्त जल आपूर्ति के लिए शासन की तारीफ की।
अधिवक्ता विजय चंद्र श्रीवास्तव तथा सुनीता शर्मा की ओर से बॉयोरिमेडियल सिस्टम को धोखा बताया गया। उन्होंने स्नान पर्व से दो दिन पहले गंगा का पानी भूरा होने का कोर्ट को फोटोग्राफ दिखाया। साथ ही वाराणसी में गंगा पार रेत में टेंट सिटी में व्यापार पर आपत्ति करते हुए कहा कि सरकारी आदेश का खुला उल्लंघन किया जा रहा है।
केंद्र सरकार के जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय की सात अक्तूबर 2016 को जारी अधिसूचना का हवाला दिया गया। इसके मुताबिक गंगा किनारे स्थाई रिहायशी तथा व्यावसायिक निर्माण पर रोक लगी हुई है। इसके बावजूद वाराणसी में टेंट सिटी तैयार कर व्यवसाय किया जा रहा है। याचिका की सुनवाई दो फरवरी को होगी।