{"_id":"5894dfab4f1c1b2f3de84ef6","slug":"primary-teacher-colleges-minority-entitled-to-promotions","type":"story","status":"publish","title_hn":"अल्पसंख्यक कॉलेजों के प्राइमरी टीचर भी प्रोन्नति के हकदार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अल्पसंख्यक कॉलेजों के प्राइमरी टीचर भी प्रोन्नति के हकदार
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
Updated Sat, 04 Feb 2017 01:40 AM IST
विज्ञापन
टीचर
- फोटो : demo pic
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाईकोर्ट की तीन जजों की पीठ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा है कि अल्पसंख्यक इंटर कॉलेजों से संबंद्ध प्राइमरी स्कूलों के टीचर भी प्रोन्नति पाने के हकदार हैं। इस संबंध में इंटर मीडिएट एक्ट की धारा 7(2)(ए) अल्पसंख्यक कॉलेजोें पर भी प्रभावी होगी। इस धारा से अल्पसंख्यक कॉलेजोें को अनुच्छेद 30 के तहत मिला विशेष अधिकार कम नहीं होता है। यह धारा अनुच्छेद 30 के विपरीत नहीं है।
इंटर मीडिएट एक्ट की उपरोक्त धारा में प्राइमरी टीचरों को प्रोन्नति में 25 प्रतिशत कोटा निर्धारित किया गया है। मगर अल्पसंख्यक कॉलेज इसे मानने को तैयार नहीं थे। उनका कहना था कि एक्ट का यह उपबंध अल्पसंख्यक कॉलेजों के प्रबंधन को मिले अधिकार में हस्तक्षेप है। पूर्ण पीठ का मत है कि धारा 7(2)(ए) सभी कॉलेजों पर समान रूप से लागू होगी। अल्पसंख्यक कॉलेजों को इससे कोई छूट नहीं दी गई है।
पूर्णपीठ का कहना है कि राज्य सरकार और छात्रों और शिक्षकोें के हित में मानक तय करने का अधिकार है। यदि यह उपबंध लागू नहीं किया जाता है तो शैक्षिक गुणवत्ता प्रभावित होगी। प्रबंधन को मिले अधिकारों में कुप्रबंधन शामिल नहीं है। पीठ का कहना है कि अनुच्छेद 16 सभी कर्मचारियों को प्रोन्नति पाने का मौलिक अधिकार देता है। इसलिए सभी राज्य वित्त पोषित कॉलेजों में यह नियम लागू होगा।
विज्ञापन
आगरा के स्वामी लीलाधर शाह सिंधी इंटर कॉलेज की याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले, न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा और न्यायमूर्ति पंकज मित्तल की पीठ सुनवाई की। कॉलेज में आठ एलटी ग्रेड सहायक अध्यापकों का पद रिक्त है। इनको भरने के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक ने प्रोन्नति में 25 प्रतिशत कोटा लागू करने का आदेश दिया। इसका वैधता को चुनौती दी गई। कहा गया कि रेग्युलेशन अल्पसंख्यक कॉलेजों पर लागू नहीं होगा। याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति एपी साही ने प्रकरण पूर्णपीठ के लिए संदर्भित कर दिया। कोर्ट ने कहा कि रेग्युलेशन किसी भी प्रकार से अल्पसंख्यक कॉलेजों के गठन और प्रबंधन में हस्तक्षेप नहीं करता है। यह अध्यापकों और स्टॉफ को शोषण से बचाता है और संवैधानिक अधिकारों तथा जनहित के बीच संतुलन स्थापित नहीं करता है।
विज्ञापन
इंटर मीडिएट एक्ट की उपरोक्त धारा में प्राइमरी टीचरों को प्रोन्नति में 25 प्रतिशत कोटा निर्धारित किया गया है। मगर अल्पसंख्यक कॉलेज इसे मानने को तैयार नहीं थे। उनका कहना था कि एक्ट का यह उपबंध अल्पसंख्यक कॉलेजों के प्रबंधन को मिले अधिकार में हस्तक्षेप है। पूर्ण पीठ का मत है कि धारा 7(2)(ए) सभी कॉलेजों पर समान रूप से लागू होगी। अल्पसंख्यक कॉलेजों को इससे कोई छूट नहीं दी गई है।
विज्ञापन
पूर्णपीठ का कहना है कि राज्य सरकार और छात्रों और शिक्षकोें के हित में मानक तय करने का अधिकार है। यदि यह उपबंध लागू नहीं किया जाता है तो शैक्षिक गुणवत्ता प्रभावित होगी। प्रबंधन को मिले अधिकारों में कुप्रबंधन शामिल नहीं है। पीठ का कहना है कि अनुच्छेद 16 सभी कर्मचारियों को प्रोन्नति पाने का मौलिक अधिकार देता है। इसलिए सभी राज्य वित्त पोषित कॉलेजों में यह नियम लागू होगा।
विज्ञापन
आगरा के स्वामी लीलाधर शाह सिंधी इंटर कॉलेज की याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले, न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा और न्यायमूर्ति पंकज मित्तल की पीठ सुनवाई की। कॉलेज में आठ एलटी ग्रेड सहायक अध्यापकों का पद रिक्त है। इनको भरने के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक ने प्रोन्नति में 25 प्रतिशत कोटा लागू करने का आदेश दिया। इसका वैधता को चुनौती दी गई। कहा गया कि रेग्युलेशन अल्पसंख्यक कॉलेजों पर लागू नहीं होगा। याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति एपी साही ने प्रकरण पूर्णपीठ के लिए संदर्भित कर दिया। कोर्ट ने कहा कि रेग्युलेशन किसी भी प्रकार से अल्पसंख्यक कॉलेजों के गठन और प्रबंधन में हस्तक्षेप नहीं करता है। यह अध्यापकों और स्टॉफ को शोषण से बचाता है और संवैधानिक अधिकारों तथा जनहित के बीच संतुलन स्थापित नहीं करता है।