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मेला की तैयारी प्रभावित
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Preparation of the fair affected by the action of the army
- फोटो : CITY DESK
सेना की कार्रवाई से मेला की तैयारी प्रभावित
परेड में नए सिरे से लगाने होंगे नल तथा बिजली के खंभे
विभागों के स्टोर रूम भी हुए खाली, फिर से मंगाना होगा समान
प्रयागराज। इस बार भव्य माघ मेला की तैयारियों को झटका लगता दिख रहा है। बाढ़ की वजह से संगम समेत मेला का बड़ा हिस्सा अब भी पानी में डूबा है। इसका नतीजा है कि अभी तक मेला का क्षेत्र तय नहीं हुआ है। ऐसे में सेना की कार्रवाई से परेशानी और बढ़ गई है। मुश्किल यह कि अफसरों में दुविधा की स्थिति बन गई है।
प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने 31 अक्तूबर तक के लिए मेला क्षेत्र को लीज पर लिया है। यह अवधि बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है लेकिन, इस बीच सेना की ओर से कई स्थायी और अस्थायी निर्माण ढहा दिए गए। इसमें बिजली के खंभे तथा नल भी शामिल हैं। इस तरह से परेड मैदान में अब नए सिरे से खंभे और नल लगाने होंगे। सेना ने नलकूप के पास बने कमरे ढहाने के साथ मोटर आदि भी हटा दिए हैं। यानी, अब ट्यूबवेल को भी नए सिरे से ठीक कराना होगा। सेना की लगातार कार्रवाई तथा चेतावनियों के बाद परेड से चकर प्लेट, पांटून, बिजली के उपकरण आदि हटा लिए गए हैं। इसके अलावा लोक निर्माण विभाग का स्टोर भी ढहा दिया गया है। ऐसे में सभी समान फिर से मंगाने पड़ेंगे। मुश्किल यह कि प्रशासन और सेना के बीच अब भी गतिरोध बना हुआ है। इसकी वजह से तैयारी प्रभावित हो गई है। पूरे प्रकरण को लेकर विवाद तथा दुविधा को इससे ही समझा जा सकता है कि कोई भी अफसर बोलने को तैयार नहीं है। डीएम भानु चंद्र गोस्वामी ने भी पूरे विवाद पर बोलने से इंकार कर दिया। उन्होंने बस इतना कहा कि वार्ता की जा रही है। जल्द समाधान निकलेगा।
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परेड में नए सिरे से लगाने होंगे नल तथा बिजली के खंभे
विभागों के स्टोर रूम भी हुए खाली, फिर से मंगाना होगा समान
प्रयागराज। इस बार भव्य माघ मेला की तैयारियों को झटका लगता दिख रहा है। बाढ़ की वजह से संगम समेत मेला का बड़ा हिस्सा अब भी पानी में डूबा है। इसका नतीजा है कि अभी तक मेला का क्षेत्र तय नहीं हुआ है। ऐसे में सेना की कार्रवाई से परेशानी और बढ़ गई है। मुश्किल यह कि अफसरों में दुविधा की स्थिति बन गई है।
प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने 31 अक्तूबर तक के लिए मेला क्षेत्र को लीज पर लिया है। यह अवधि बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है लेकिन, इस बीच सेना की ओर से कई स्थायी और अस्थायी निर्माण ढहा दिए गए। इसमें बिजली के खंभे तथा नल भी शामिल हैं। इस तरह से परेड मैदान में अब नए सिरे से खंभे और नल लगाने होंगे। सेना ने नलकूप के पास बने कमरे ढहाने के साथ मोटर आदि भी हटा दिए हैं। यानी, अब ट्यूबवेल को भी नए सिरे से ठीक कराना होगा। सेना की लगातार कार्रवाई तथा चेतावनियों के बाद परेड से चकर प्लेट, पांटून, बिजली के उपकरण आदि हटा लिए गए हैं। इसके अलावा लोक निर्माण विभाग का स्टोर भी ढहा दिया गया है। ऐसे में सभी समान फिर से मंगाने पड़ेंगे। मुश्किल यह कि प्रशासन और सेना के बीच अब भी गतिरोध बना हुआ है। इसकी वजह से तैयारी प्रभावित हो गई है। पूरे प्रकरण को लेकर विवाद तथा दुविधा को इससे ही समझा जा सकता है कि कोई भी अफसर बोलने को तैयार नहीं है। डीएम भानु चंद्र गोस्वामी ने भी पूरे विवाद पर बोलने से इंकार कर दिया। उन्होंने बस इतना कहा कि वार्ता की जा रही है। जल्द समाधान निकलेगा।
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