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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Prayagraj: The sacrifice of martyr Dinanath immortalized in the form of a statue in the Shaurya temple of Sumerupur

प्रयागराज : सुमेरुपुर के शौर्य मंदिर में प्रतिमा के रूप में अमर हुआ शहीद दीनानाथ का बलिदान

Sun, 21 Nov 2021 11:39 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 21 Nov 2021 11:39 PM IST
सार

शहादत की गौरव गाथा सुनने उमड़ा इलाका, पूर्वी यूपी हेड क्वार्टर के कर्नल शहीद दीनानाथ मूर्ति का किया अनावरण, वंदेमातरम और भारत माता की जय के गूंजे उद्घोष।

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Prayagraj: The sacrifice of martyr Dinanath immortalized in the form of a statue in the Shaurya temple of Sumerupur
Prayagraj News : अमर शहीद दीनानाथ यादव की प्रतिमा का लोकार्पण। - फोटो : प्रयागराज

विस्तार

सैन्य बैंड की शौर्य धुन, पुष्प चक्र अर्पण और वंदे मातरम गान के साथ रविवार को सुमेरुपुर गांव में सेना के पूर्वी यूपी हेड क्वार्टर के कर्नल एवी कोशी ने अमर शहीद दीनानाथ यादव की आदमकद मूर्ति का अनावरण किया। गांव में घर वालों की गाढ़ी कमाई से बने शौर्य मंदिर में प्रतिमा के अनावरण के मौके पर दीनानाथ की शहादत की गौरव गाथा जानने के लिए पूरा इलाका उमड़ पड़ा था। बताया गया कि 21नवंबर 1971 की भोर में इसी दिन बंग्लादेश के जाकीगंज में झुरमुट में छिपे पाकिस्तानी सेना के दुश्मन पर हैंड ग्रेनेड फेंकते समय सीने में गोली खाकर दीनानाथ शहीद हो गए थे।

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सुमेरुपुर गांव में दीनानाथ की शहादत की 50वीं वर्षगांठ सोमवार को वीरगाथा के उत्सव में तब्दील हो गई। दोपहर से ही आसपास के गांवों की भीड़ शौर्य मंदिर की तरफ बढ़ने लगी। हर किसी को सेना के अफसरों के आने का इंतजार था। शाम चार बजे जैसे ही सैन्य अफसरों का दल गांव पहुंचा, लोग झूमने नाचने लगे। दूरदर्शन की कलाकार प्रीति मिश्रा ने शुरुआत वंदेमातरम गीत से की। इसके बाद ऐ मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानी... की उन्होंने प्रस्तुति की। इसके बाद बच्चों ने राष्ट्रगीत पर नृत्य की प्रस्तुति की। इसी के साथ डोगरा रेजीमेंट के जवानों ने आर्मी बैंड पर शौर्य धुन बजानी शुरू कर दी।

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कर्नल कोशी के साथ लेफ्टीनेंट कर्नल अमित दधीच, कैप्टन भारतेंदु सिंह कंवर, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. संतोष भदौरिया और त्रिलोकीनाथ यादव ने शहीद दीनानाथ की छह फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया। इस दौरान भारत माता के जयकारे गूंजते रहे। शहीद दीनानाथ की गौरव गाथा शिवशंकर यादव ने सुनाई। इस मौके पर रविनाथ पाल, मानिकचंद्र, हरिशचंद्र यादव, शिवबाबू यादव, गुलाब सिंह यादव, अभयराज पाल, धर्मेंद्र यादव, शिवशंकर यादव, ब्लाक प्रमुख अरुणेंद्र यादव डब्बू, जिला पंचायत सदस्य सुरेश यादव, भाजपा गंगापार जिलाध्यक्ष अश्विनी दुबे मौजूद थे।

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Prayagraj: The sacrifice of martyr Dinanath immortalized in the form of a statue in the Shaurya temple of Sumerupur
Prayagraj News : प्रयागराज पहुंची विजय मशाल यात्रा को सलामी देते सेना के अधिकारी। - फोटो : प्रयागराज

शहीद दीनानाथ के गांव नहीं जा सकी स्वर्णिम विजय मशाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों भेजी गई स्वर्णिम विजय मशाल रविवार को शहीद दीनानाथ यादव के गांव सुमेरुपुर नहीं जा सकी। इसी वजह विजय मशाल का सब एरिया में देरी से पहुंचना था। नियमत: स्वर्णिम मशाल जिस भी जिले में जाती है, वहां सबसे पहले सब एरिया में सेना के कमांडेंट उसे सलामी देते हैं। ऐसे में रविवार को मशाल सब एरिया पहुंचने और सलामी का कार्यक्रम पूरा होने में देर होने की वजह से डोगरा रेजीमेंट की सेना की बैंड को ही सुमेरुपुर के लिए रवाना किया जा सका। 

रायबरेली के कृष्ण बिहारी ने गढ़ी दीनानाथ की प्रतिमा
झूंसी। शहीद दीनानाथ के भाई त्रिलोकीनाथ ने बताया कि मंदिर तीन साल में बनकर तैयार हुआ है। मंदिर में स्थापित की गई शहीद दीनानाथ की प्रतिमा को कृष्ण बिहारी ने तीन साल में तैयार किया। इस मंदिर के निर्माण पर चार लाख रुपये परिवार के लोगों ने ही अपनी कमाई से खर्च किए। संयोजन शहीद दीनानाथ के भतीजे दशरथ लाल यादव ने किया।

Prayagraj: The sacrifice of martyr Dinanath immortalized in the form of a statue in the Shaurya temple of Sumerupur
Prayagraj News : स्वर्णिम विजय मशाल प्रयागराज पहुंचने पर स्वागत करते सैनिक। - फोटो : प्रयागराज

हैंड ग्रेनेड फेंकते समय सीने पर दुश्मन की गोली खाकर शहीद हुए थे दीनानाथ
जाकीगंज को पाकिस्तान के कब्जे से खाली कराने के लिए हैंडग्रेनेड फेंकते समय भारत माता के सपूत दीनानाथ यादव अपने सीने पर दुश्मन की गोली खाकर शहीद हो गए थे। सेवानिवृत्त फौजी शिव शंकर यादव ने भारत-पाकिस्तान युद्ध में दीनानाथ के पराक्रम की कहानी सुनाई तो लोगों के रोंगटे खड़े हो गए।


सेवानिवृत्त फौजी ने सेना की ओर से जारी दीनानाथ की वीरता को पढ़कर सुनाया। उन्होंने जाकीगंज को पाकिस्तान के कब्जे से मुक्त कराने के लिए भारतीय सेना ने उस इलाके की घेराबंदी की थी। 21 नवंबर 1971 की भोर में ब्रिगेडियर रघुवीर सिंह के नेतृत्व में आपरेशन जाकीगंज शुरू हुआ। तीन बजे भोर से भारतीय सेना ने गोलीबारी शुरू कर दी। इस दौरान दुश्मन देेश की सेना के कई सिपाई झुरमुटों में और गड्डों में छिपे हुए थे।

 

दीनानाथ यादव जिस टुकड़ी में थे उसमें कुल आठ जवान लेटते हुए गोलीबारी कर रहे थे। उसी दौरान दीनानाथ को सौ मीटर दूर झुरमुट में पत्ते और डालियां हिलती दिखाई पड़ीं। इस पर दीनानाथ ने ब्रिगेडियर रघुवीर को इसकी जानकारी दी और उस पर लक्ष्य साधने की अनुमति भी मांगी। ब्रिगेडियर का आदेश मिलते ही दीनानाथ ने झुरमुट पर हैंडग्रेनेड दागा, लेकिन उधर से दुश्मन की चलाई गई गोली उनके सीने को पार कर गई। इस दौरान दीनानाथ मौके पर ही शहीद हो गए। लेकिन, तीन बजे भोर से सुबह छह बजे तक तीन घंटे की गोलीबारी में भारतीय सेना ने जाकीगंज को पाकिस्तान के कब्जे से खाली कराकर जीत लिया। इस युद्ध में भारतीय सेना के दीनानाथ समेत तीन जवान शहीद हुए थे, जबकि पाकिस्तानी सेना के 92 जवानों को मार गिराया गया था।

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