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प्रयागराजः गठबंधन की कसौटी, शहर फिर चुनौती
Mon, 11 Mar 2019 12:50 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 11 Mar 2019 12:50 AM IST
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मायावती-अखिलेश यादव
- फोटो : गूगल
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बसपा का साथ व लोकसभा उपचुनाव में प्रदेश की तीनाें सीटों पर मिली जीत के बाद सपा कार्यकर्ताओं में उत्साह तो है, लेकिन बसपा के परंपरागत वोट बैंक में सेंधमारी रोकना और शहरी मतदाताओं को रिझाना पार्टी नेताओं के लिए चुनौती से कम नहीं। बसपा के समर्थन के बाद सपा के नागेंद्र सिंह पटेल उपचुनाव जीतने में सफल रहे, लेकिन शहर उत्तरी और पश्चिमी में वह करीब 26 हजार मतों से पीछे रह गए थे। 2014 में इलाहाबाद संसदीय सीट के लिए हुए आम चुनाव में भी सपा के रेवती रमण सिंह करछना तथा मेजा में आगे रहे, लेकिन अकेले शहर पश्चिमी में ही वह करीब 50 हजार मतों से भाजपा के श्यामाचरण गुप्त से पीछे रह गए थे।
फूलपुर लोकसभा उपचुनाव के लिए पिछले वर्ष 11 मार्च को मतदान हुआ था। बसपा के समर्थन से सपा के नागेंद्र सिंह पटेल 342922 मत पाकर विजयी हुए थे। वहीं भाजपा के कौशलेंद्र सिंह पटेल को 283462 वोट मिले। नागेंद्र संसदीय क्षेत्र के फाफामऊ, सोरांव और फूलपुर में भारी बढ़त बनाने में सफल रहे लेकिन शहर पश्चिमी विधानसभा में उन्हें 33354 वोट मिले थे। वहीं भाजपा के कौशलेंद्र को 53330 मत मिले थे।
हालांकि , गौर करने वाली बात यह भी है कि इस विधानसभा में निर्दलीय अतीक अहमद को भी 28880 वोट मिले थे। इससे सपा को नुकसान हुआ था। शहर उत्तरी में भी नागेंद्र को 38436 वोट मिले थे, जबकि कौशलेंद्र को 43999 मत मिले थे। 2014 लोकसभा चुनाव में भी सपा उम्मीदवार को 19179 तथा बसपा को 20448 वोट मिले थे। वहीं भाजपा के केशव प्रसाद मौर्य को 108391 वोट मिले थे। शहर पश्चिमी में भी सपा को 36979 तथा बसपा को 19665 वोट मिले थे।
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इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र के लिए 2014 में हुए चुनाव में शहर दक्षिणी में भाजपा के श्यामाचरण को 87434 वोट मिले थे। वहीं सपा के रेवती रमण को मात्र 3883 मत मिले थे। बसपा की केशरी देवी को 9156 वोट मिले थे। वहीं कांग्रेस के नंदा गोपाल गुप्ता नंदी को 27398 वोट मिले थे। इनमें से अब केशरी देवी और नंदी भाजपा में हैं। बारा औरा कोरांव विधानसभा क्षेत्र में सपा और बसपा के उम्मीदवार भाजपा के श्यामाचरण से पीछे रह गए थे, लेकिन मतों का अंतर कम था। वहीं करछना और मेजा में सपा के रेवती रमण को भाजपा उम्मीदवार से अधिक वोट मिले थे।
चुनाव नजदीक, सपा में दावेदारी को लेकर बदले समीकरण
लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा रविवार को हो गई। मतदान की तारीख नजदीक आने के साथ सपा में दावेदारों की गणित भी उलझ गई है। पार्टी ने नौ उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी है, लेकिन उपचुनाव के विजयी दोनों सांसदों के नाम इस सूची से गायब हैं।
प्रयागराज की फूलपुर और इलाहाबाद दोनों ही सपा की परंपरागत सीट हैं। फूलपुर में 2014 और 2009 को छोड़ दें तो 1989 से 2004 के बीच लगातार छह बार सपा या जनता दल ने जीत हासिल की। इससे पहले 1969 में हुए उपचुनाव में भी संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के जनेश्वर मिश्र विजयी हुए थे। सभी तरह के सियासी अटकलों के विपरीत सपा के नागेंद्र सिंह पटेल ने पिछले साल उपचुनाव में फिर इस सीट पर कब्जा जमा लिया। ऐसे में इस चुनाव में भी पार्टी टिकट पर नागेंद्र की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है, लेकिन चुनाव की घोषणा के साथ नए समीकरण और नाम सामने आ रहे हैं।
इस संसदीय क्षेत्र में पटेल मतदाताओं की प्रभावी संख्या है। ऐसे में किसी पटेल को उम्मीदवार बनाए जाने के साथ बासुदेव यादव के साथ बलराम के नाम की भी चर्चा है। वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि इस सीट के बहाने पार्टी अपने परंपरागत वोट बैंक को साधना चाहती है।
इलाहाबाद सीट से रेवती रमण सिंह दो बार सांसद रहे। इनसे पहले जनता दल से सरोज दुबे भी दो बार सांसद चुनी गईं। 2004 में भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी को हराने वाले रेवती रमण को इस बार भी दावेदार माना जा रहा है, लेकिन राज्यसभा में उनका कार्यकाल तीन साल बचा है। इसलिए इस सीट पर उनके पुत्र उज्ज्वल रमण सिंह के साथ रईस चंद्र शुक्ला, नरेंद्र सिंह, बाल कुमार पटेल के नाम की चर्चा है।
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फूलपुर लोकसभा उपचुनाव के लिए पिछले वर्ष 11 मार्च को मतदान हुआ था। बसपा के समर्थन से सपा के नागेंद्र सिंह पटेल 342922 मत पाकर विजयी हुए थे। वहीं भाजपा के कौशलेंद्र सिंह पटेल को 283462 वोट मिले। नागेंद्र संसदीय क्षेत्र के फाफामऊ, सोरांव और फूलपुर में भारी बढ़त बनाने में सफल रहे लेकिन शहर पश्चिमी विधानसभा में उन्हें 33354 वोट मिले थे। वहीं भाजपा के कौशलेंद्र को 53330 मत मिले थे।
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हालांकि , गौर करने वाली बात यह भी है कि इस विधानसभा में निर्दलीय अतीक अहमद को भी 28880 वोट मिले थे। इससे सपा को नुकसान हुआ था। शहर उत्तरी में भी नागेंद्र को 38436 वोट मिले थे, जबकि कौशलेंद्र को 43999 मत मिले थे। 2014 लोकसभा चुनाव में भी सपा उम्मीदवार को 19179 तथा बसपा को 20448 वोट मिले थे। वहीं भाजपा के केशव प्रसाद मौर्य को 108391 वोट मिले थे। शहर पश्चिमी में भी सपा को 36979 तथा बसपा को 19665 वोट मिले थे।
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इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र के लिए 2014 में हुए चुनाव में शहर दक्षिणी में भाजपा के श्यामाचरण को 87434 वोट मिले थे। वहीं सपा के रेवती रमण को मात्र 3883 मत मिले थे। बसपा की केशरी देवी को 9156 वोट मिले थे। वहीं कांग्रेस के नंदा गोपाल गुप्ता नंदी को 27398 वोट मिले थे। इनमें से अब केशरी देवी और नंदी भाजपा में हैं। बारा औरा कोरांव विधानसभा क्षेत्र में सपा और बसपा के उम्मीदवार भाजपा के श्यामाचरण से पीछे रह गए थे, लेकिन मतों का अंतर कम था। वहीं करछना और मेजा में सपा के रेवती रमण को भाजपा उम्मीदवार से अधिक वोट मिले थे।
चुनाव नजदीक, सपा में दावेदारी को लेकर बदले समीकरण
लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा रविवार को हो गई। मतदान की तारीख नजदीक आने के साथ सपा में दावेदारों की गणित भी उलझ गई है। पार्टी ने नौ उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी है, लेकिन उपचुनाव के विजयी दोनों सांसदों के नाम इस सूची से गायब हैं।
प्रयागराज की फूलपुर और इलाहाबाद दोनों ही सपा की परंपरागत सीट हैं। फूलपुर में 2014 और 2009 को छोड़ दें तो 1989 से 2004 के बीच लगातार छह बार सपा या जनता दल ने जीत हासिल की। इससे पहले 1969 में हुए उपचुनाव में भी संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के जनेश्वर मिश्र विजयी हुए थे। सभी तरह के सियासी अटकलों के विपरीत सपा के नागेंद्र सिंह पटेल ने पिछले साल उपचुनाव में फिर इस सीट पर कब्जा जमा लिया। ऐसे में इस चुनाव में भी पार्टी टिकट पर नागेंद्र की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है, लेकिन चुनाव की घोषणा के साथ नए समीकरण और नाम सामने आ रहे हैं।
इस संसदीय क्षेत्र में पटेल मतदाताओं की प्रभावी संख्या है। ऐसे में किसी पटेल को उम्मीदवार बनाए जाने के साथ बासुदेव यादव के साथ बलराम के नाम की भी चर्चा है। वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि इस सीट के बहाने पार्टी अपने परंपरागत वोट बैंक को साधना चाहती है।
इलाहाबाद सीट से रेवती रमण सिंह दो बार सांसद रहे। इनसे पहले जनता दल से सरोज दुबे भी दो बार सांसद चुनी गईं। 2004 में भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी को हराने वाले रेवती रमण को इस बार भी दावेदार माना जा रहा है, लेकिन राज्यसभा में उनका कार्यकाल तीन साल बचा है। इसलिए इस सीट पर उनके पुत्र उज्ज्वल रमण सिंह के साथ रईस चंद्र शुक्ला, नरेंद्र सिंह, बाल कुमार पटेल के नाम की चर्चा है।