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Prayagraj News: मेरठ, वाराणसी ने मारी बाजी, प्रयागराज ने भी खोला खाता
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तीरंदाजी प्रतियोगिता में अपना हुनर दिखाते खिलाड़ी
- फोटो : amar ujala
मेरठ, वाराणसी ने मारी बाजी
प्रयागराज ने भी खोला खाता
0 प्रदेशीय विद्यालय तीरंदाजी प्रतियोगिता के दूसरे दिन खिलाड़ियों ने दिखाई हुनर, आज चुनी जाएगी उत्तर प्रदेश की टीम
प्रयागराज। एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज मैदान पर चल रही तीन दिवसीय 66वीं प्रदेशीय विद्यालय तीरंदाजी प्रतियोगिता में शुक्रवार को दूसरे दिन वाराणसी और मेरठ के खिलाड़ियों ने बाजी मारी। वहीं, इंडियन बालक अंडर-17 वर्ग में प्रयागराज ने खाता खोला, लेकिन चौथे स्थान पर रही।
प्रयागराज के रवींद्र, सोनू कुशवाहा, अमृत कुमार और मो. इमरान ने शानदार प्रदर्शन किया। वहीं शुक्रवार को खेले गए प्रतियोगिताओं में कंपाउंड अंडर-17 बालक वर्ग में वाराणसी के अरमान कुरैशी पहले, सहारनपुर के प्रियांशु बालियान दूसरे और मेरठ के दीपक तीसरे स्थान पर रहे। बालिका वर्ग में अलीगढ़ की विधि पहले और मेरठ की अंजली दूसरे स्थान पर रहीं। रिकर्व अंडर-17 बालक वर्ग में मेरठ के प्रियांश पहले, वाराणसी के अक्षत सिंह दूसरे और सहारनपुर के कपिल रघुवंशी तीसरे स्थान पर रहे।
बालिका वर्ग में मेरठ की नीकिता पहले, आगरा की खुशी दूसरे और वाराणसी की आशु यादव तीसरे स्थान पर रहीं। इंडियन अंडर-17 बालक वर्ग में मेरठ के जय कुमार पहले, मेरठ के विशु दूसरे और वाराणसी के निशांत सिंह तीसरे स्थान पर रहे। बालिका वर्ग में विंध्या की प्राची श्रीवास्तव पहले, मेरठ की ज्योति दूसरे और मेरठ की शिखा तीसरे स्थान पर रही।
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इससे पहले जिला विद्यालय निरीक्षक पीएन सिंह ने प्रतियोगिता का शुभारंभ किया। इस अवसर पर सह जिला विद्यालय निरीक्षक धर्मेंद्र कुमार सिंह, एलबी मौर्य, अनय प्रताप सिंह, संयोजक बृजेश चंद्र श्रीवास्तव, मंडलीय सचिव रंजना सिंह, सचिव प्रतिभा, संतोष कुमार सिंह, संदीप कुमार राठौर, स्वास्तिक बोस, प्रतिभा सिंह, अरविंद कुमार गौतम, मुकेश सिंह ,डॉ. अनूप कुमार श्रीवास्तव, डॉ. जय प्रकाश शर्मा, रवींद्र मिश्र, हसबीन अहमद, अरुण कुमार पांडेय, राकेश कुमार श्रीवास्तव, वीरेंद्र कुमार, शैलेंद्र कुमार, अंजना सिंह, सोनिका गुप्ता, श्वेता सिंह, सिल्विया शुक्ला समेत कई लोग मौजूद रहे।
- विजेता बोले
मैंने अंडर-19 की ओपन राष्ट्रीय प्रतियोगिता में मेडल जीता है। मेरा सपना है कि मैं आर्मी में जाऊं और देश की सेवा करने के साथ-साथ तीरंदाजी में भी आर्मी का नाम रोशन करूं। मैं यहां की जीत से काफी उत्साहित हूं।
संजय कुमार, वाराणसी
मैंने इससे पहले जौनपुर में हुई सब जूनियर वर्ग की ओपन प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता था। यहां पर जीतने से मेरा आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। मैं फरवरी में होने वाली राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए अभी से ही अभ्यास में जुट जाऊंगी। मेरा सपना है कि मैं तीरंदाजी में भारत का प्रतिनिधित्व करूं।
अदिति सिंह, वाराणसी
एक साल पहले से ही तीरंदाजी सीखना शुरू किया है। मेरा भी सपना है कि मैं भारत का प्रतिनिधित्व करूं और देश के लिए मेडल जीतूं। मैं नियमित तौर पर रोजाना चार से छह घंटे अभ्यास करता हूं।
जय कुमार, मेरठ
तीन साल से अभ्यास कर रही हूं। तीन बार राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा बन चुकी हूं और हरिद्वार में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीत चुकी हूं। अब ओलंपिक तक का सफर तय करना चाहती हूं। इसके लिए मैं पूरी मेहनत करूंगी और सपने को पूरा करूंगी। नीकिता, मेरठ
चार साल पहले से तीरंदाजी का अभ्यास कर रही हूं। वर्ष 2020 में ओपन राष्ट्रीय प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल जीता था। मेरा सपना है कि मैं भी दीपिका कुमारी की तरह भारत का ओलंपिक में प्रतिनिधित्व करूं। मेरे पिताजी शिक्षक हैं वह ही मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।
प्राची श्रीवास्तव, विंध्या
मंहगा है खेल, तीन प्रकार में है बंटा
तीरंदाजी का खेल तीन प्रकार का होता है। इंडियन, रिकर्व और कंपाउंड राउंड में बंटा हुआ होता है। सबसे मंहगा इक्विपमेंट रिकर्व के खेल का होता है। इसमें खिलाड़ियों का धनुष ओलंपिक के स्तर का होता है जोकि 2.50 लाख से लेकर 3.75 लाख रुपये तक आता है।
वहीं कंपाउंड का धनुष वर्ल्ड क्लास का होता है जोकि 1.75 लाख से लेकर 2.25 लाख रुपये तक का आता है। जबकि इंडियन जिसे आमतौर पर बिगेनर भी बोला जाता है उसका धनुष 6-12 हजार रुपये तक का आता है।
इसके अलावा निशाने के लक्ष्य के लिए जो टार्गेट, स्टैंड और फेसेस आते हैं उनकी कीमत तकरीबन 70-90 हजार रुपये होती है। तीरंदाजी सीखने के लिए खिलाड़ियों को अपने इक्विपमेंट खुद से खरीदने होते हैं। जबकि एकेडमी में तीरंदाजी के अभ्यास के लिए खिलाड़ियों को 500-1500 रुपये तक की फीस भी अदा करनी होती है।
वर्जन
तीरंदाजी से बच्चों का मानसिक विकास होता है क्योंकि यह एकाग्रता बढ़ाने वाला खेल है। इसका फायदा बच्चे को पढ़ाई में भी मदद मिलती है। कहा जाता है कि अगर कोई बच्चा तीरंदाजी कर रहा है तो वह एक तरह से मेडिटेशन भी कर रहा है। बहुत मुमकिन है कि अगर आप ध्यान लगाकर पढ़ते हैं यानी पढ़ाई में अच्छे हैं तो तीरंदाजी में भी अच्छा कर जाएं।
राकेश कुमार सिंह, टेक्निकल चेयरमैन, तीरंदाजी प्रतियोगिता
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प्रयागराज ने भी खोला खाता
0 प्रदेशीय विद्यालय तीरंदाजी प्रतियोगिता के दूसरे दिन खिलाड़ियों ने दिखाई हुनर, आज चुनी जाएगी उत्तर प्रदेश की टीम
प्रयागराज। एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज मैदान पर चल रही तीन दिवसीय 66वीं प्रदेशीय विद्यालय तीरंदाजी प्रतियोगिता में शुक्रवार को दूसरे दिन वाराणसी और मेरठ के खिलाड़ियों ने बाजी मारी। वहीं, इंडियन बालक अंडर-17 वर्ग में प्रयागराज ने खाता खोला, लेकिन चौथे स्थान पर रही।
प्रयागराज के रवींद्र, सोनू कुशवाहा, अमृत कुमार और मो. इमरान ने शानदार प्रदर्शन किया। वहीं शुक्रवार को खेले गए प्रतियोगिताओं में कंपाउंड अंडर-17 बालक वर्ग में वाराणसी के अरमान कुरैशी पहले, सहारनपुर के प्रियांशु बालियान दूसरे और मेरठ के दीपक तीसरे स्थान पर रहे। बालिका वर्ग में अलीगढ़ की विधि पहले और मेरठ की अंजली दूसरे स्थान पर रहीं। रिकर्व अंडर-17 बालक वर्ग में मेरठ के प्रियांश पहले, वाराणसी के अक्षत सिंह दूसरे और सहारनपुर के कपिल रघुवंशी तीसरे स्थान पर रहे।
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बालिका वर्ग में मेरठ की नीकिता पहले, आगरा की खुशी दूसरे और वाराणसी की आशु यादव तीसरे स्थान पर रहीं। इंडियन अंडर-17 बालक वर्ग में मेरठ के जय कुमार पहले, मेरठ के विशु दूसरे और वाराणसी के निशांत सिंह तीसरे स्थान पर रहे। बालिका वर्ग में विंध्या की प्राची श्रीवास्तव पहले, मेरठ की ज्योति दूसरे और मेरठ की शिखा तीसरे स्थान पर रही।
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इससे पहले जिला विद्यालय निरीक्षक पीएन सिंह ने प्रतियोगिता का शुभारंभ किया। इस अवसर पर सह जिला विद्यालय निरीक्षक धर्मेंद्र कुमार सिंह, एलबी मौर्य, अनय प्रताप सिंह, संयोजक बृजेश चंद्र श्रीवास्तव, मंडलीय सचिव रंजना सिंह, सचिव प्रतिभा, संतोष कुमार सिंह, संदीप कुमार राठौर, स्वास्तिक बोस, प्रतिभा सिंह, अरविंद कुमार गौतम, मुकेश सिंह ,डॉ. अनूप कुमार श्रीवास्तव, डॉ. जय प्रकाश शर्मा, रवींद्र मिश्र, हसबीन अहमद, अरुण कुमार पांडेय, राकेश कुमार श्रीवास्तव, वीरेंद्र कुमार, शैलेंद्र कुमार, अंजना सिंह, सोनिका गुप्ता, श्वेता सिंह, सिल्विया शुक्ला समेत कई लोग मौजूद रहे।
- विजेता बोले
मैंने अंडर-19 की ओपन राष्ट्रीय प्रतियोगिता में मेडल जीता है। मेरा सपना है कि मैं आर्मी में जाऊं और देश की सेवा करने के साथ-साथ तीरंदाजी में भी आर्मी का नाम रोशन करूं। मैं यहां की जीत से काफी उत्साहित हूं।
संजय कुमार, वाराणसी
मैंने इससे पहले जौनपुर में हुई सब जूनियर वर्ग की ओपन प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता था। यहां पर जीतने से मेरा आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। मैं फरवरी में होने वाली राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए अभी से ही अभ्यास में जुट जाऊंगी। मेरा सपना है कि मैं तीरंदाजी में भारत का प्रतिनिधित्व करूं।
अदिति सिंह, वाराणसी
एक साल पहले से ही तीरंदाजी सीखना शुरू किया है। मेरा भी सपना है कि मैं भारत का प्रतिनिधित्व करूं और देश के लिए मेडल जीतूं। मैं नियमित तौर पर रोजाना चार से छह घंटे अभ्यास करता हूं।
जय कुमार, मेरठ
तीन साल से अभ्यास कर रही हूं। तीन बार राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा बन चुकी हूं और हरिद्वार में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीत चुकी हूं। अब ओलंपिक तक का सफर तय करना चाहती हूं। इसके लिए मैं पूरी मेहनत करूंगी और सपने को पूरा करूंगी। नीकिता, मेरठ
चार साल पहले से तीरंदाजी का अभ्यास कर रही हूं। वर्ष 2020 में ओपन राष्ट्रीय प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल जीता था। मेरा सपना है कि मैं भी दीपिका कुमारी की तरह भारत का ओलंपिक में प्रतिनिधित्व करूं। मेरे पिताजी शिक्षक हैं वह ही मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।
प्राची श्रीवास्तव, विंध्या
मंहगा है खेल, तीन प्रकार में है बंटा
तीरंदाजी का खेल तीन प्रकार का होता है। इंडियन, रिकर्व और कंपाउंड राउंड में बंटा हुआ होता है। सबसे मंहगा इक्विपमेंट रिकर्व के खेल का होता है। इसमें खिलाड़ियों का धनुष ओलंपिक के स्तर का होता है जोकि 2.50 लाख से लेकर 3.75 लाख रुपये तक आता है।
वहीं कंपाउंड का धनुष वर्ल्ड क्लास का होता है जोकि 1.75 लाख से लेकर 2.25 लाख रुपये तक का आता है। जबकि इंडियन जिसे आमतौर पर बिगेनर भी बोला जाता है उसका धनुष 6-12 हजार रुपये तक का आता है।
इसके अलावा निशाने के लक्ष्य के लिए जो टार्गेट, स्टैंड और फेसेस आते हैं उनकी कीमत तकरीबन 70-90 हजार रुपये होती है। तीरंदाजी सीखने के लिए खिलाड़ियों को अपने इक्विपमेंट खुद से खरीदने होते हैं। जबकि एकेडमी में तीरंदाजी के अभ्यास के लिए खिलाड़ियों को 500-1500 रुपये तक की फीस भी अदा करनी होती है।
वर्जन
तीरंदाजी से बच्चों का मानसिक विकास होता है क्योंकि यह एकाग्रता बढ़ाने वाला खेल है। इसका फायदा बच्चे को पढ़ाई में भी मदद मिलती है। कहा जाता है कि अगर कोई बच्चा तीरंदाजी कर रहा है तो वह एक तरह से मेडिटेशन भी कर रहा है। बहुत मुमकिन है कि अगर आप ध्यान लगाकर पढ़ते हैं यानी पढ़ाई में अच्छे हैं तो तीरंदाजी में भी अच्छा कर जाएं।
राकेश कुमार सिंह, टेक्निकल चेयरमैन, तीरंदाजी प्रतियोगिता