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प्रयागराज का स्वर्ण ज्योति महामहोत्सव स्थगित
Mon, 08 Feb 2021 01:05 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 08 Feb 2021 01:05 AM IST
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prayagraj news : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती।
- फोटो : prayagraj
ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं द्वारका शारदापीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के ज्योतिष पीठ पर अभिषिक्त होने के 50 वर्ष पूर्ण होने पर प्रयागराज में सोमवार को आयोजित स्वर्ण ज्योति महामहोत्सव कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया है। अब प्राकृतिक आपदा के जान गंवाने वालों की आत्मा की शांति के लिए सोमवार कोश्रद्धांजलि दी जाएगी।
‘अमर उजाला’ से बातचीत में शंकराचार्य जी के प्रतिनिधि शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा, ज्योतिष्पीठ क्षेत्र के तहत ही धौलीगंगा में हुए हादसे केकारण इस आशय का निर्णय लिया गया है। वहां जन सहित अन्य संसाधनों तथा पर्यावरण की हानि हुई है। जोशीमठ क्षेत्र के लोगों से संपर्क करके उनका हालचाल लिया गया।
प्रकृति के विपरीत होने वाले किसी भी कार्य का पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधनों एवं मानव जाति पर विपरीत प्रभाव पड़ता ही है। इसी संदर्भ में आरंभ से ही गंगा एवं इसकी सहायक नदियों पर बनाए जाने वाले बड़े बांधों का विरोध किया जाता रहा है। यहां से पहले ज्योर्तिमठ, हरिद्वार एवं मध्य प्रदेश के परमहंसी आश्रम में कार्यक्रम हो चुके हैं। राम मंदिर के प्रश्न पर बोले, जो कहना था, गुरुदेव ने कह ही दिया है, अलग से कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है।
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‘अमर उजाला’ से बातचीत में शंकराचार्य जी के प्रतिनिधि शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा, ज्योतिष्पीठ क्षेत्र के तहत ही धौलीगंगा में हुए हादसे केकारण इस आशय का निर्णय लिया गया है। वहां जन सहित अन्य संसाधनों तथा पर्यावरण की हानि हुई है। जोशीमठ क्षेत्र के लोगों से संपर्क करके उनका हालचाल लिया गया।
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प्रकृति के विपरीत होने वाले किसी भी कार्य का पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधनों एवं मानव जाति पर विपरीत प्रभाव पड़ता ही है। इसी संदर्भ में आरंभ से ही गंगा एवं इसकी सहायक नदियों पर बनाए जाने वाले बड़े बांधों का विरोध किया जाता रहा है। यहां से पहले ज्योर्तिमठ, हरिद्वार एवं मध्य प्रदेश के परमहंसी आश्रम में कार्यक्रम हो चुके हैं। राम मंदिर के प्रश्न पर बोले, जो कहना था, गुरुदेव ने कह ही दिया है, अलग से कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है।
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