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Prayagraj News : डीआईओएस कार्यालय की भूमिका संदिग्ध, बोर्ड परीक्षा के बाद गिर सकती है गाज

Sat, 21 Feb 2026 04:54 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 21 Feb 2026 04:54 PM IST
सार

कुशीनगर जिले के गोस्वामी तुलसी इंटर कॉलेज में पंजीकरण आवेदन में अनियमितताओं के कारण इस वर्ष की बोर्ड परीक्षा से इंटरमीडिएट के 700 निजी परीक्षार्थी परीक्षा से वंचित हो गए।

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Prayagraj News: The role of the DIOS office is suspicious, action may be taken after the board exams
यूपी बोर्ड (UPMSP UP Board) - फोटो : आधिकारिक एक्स हैंडल यूपी बोर्ड (@upboardpryj)

विस्तार

कुशीनगर जिले के गोस्वामी तुलसी इंटर कॉलेज में पंजीकरण आवेदन में अनियमितताओं के कारण इस वर्ष की बोर्ड परीक्षा से इंटरमीडिएट के 700 निजी परीक्षार्थी परीक्षा से वंचित हो गए। मामले में प्रधान लिपिक के खिलाफ कुशीनगर जिले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पंजीकरण केंद्र के नोडल अधिकारी और प्रधान लिपिक फरार बताए जा रहे हैं। वहीं, गोपनीय जांच में संबंधित डीआईओएस (जिला विद्यालय निरीक्षक) कार्यालय की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। बोर्ड परीक्षा समाप्त होने के बाद जांच के बाद दोषी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

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आरोप है कि वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षा के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 27 सितंबर 2025 निर्धारित थी, जबकि संबंधित 700 परीक्षार्थियों का पंजीकरण 30 दिसंबर 2025 को कराया गया। नियमानुसार प्रत्येक परीक्षार्थी का विवरण अलग-अलग प्रस्तुत कर व्यक्तिगत पंजीकरण किया जाना आवश्यक होता है, लेकिन एक साथ सामूहिक पंजीकरण किए जाने से अनियमितता के संकेत मिले।
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प्रकरण की जांच के बाद क्षेत्रीय कार्यालय गोरखपुर को भेजी गई रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां मिलीं। अधिकारियों के मुताबिक, मामला प्रथम दृष्टया जालसाजी, नियमों के उल्लंघन तथा प्रशासनिक लापरवाही का संकेत बताया। इस प्रकरण ने बोर्ड परीक्षाओं की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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नोडल अधिकारी बदलकर आवेदन कराया गया फॉरवर्ड

माध्यमिक शिक्षा परिषद और पत्राचार शिक्षा संस्थान के अधिकारियों की जांच में सामने आया है कि संकलन केंद्र के प्रधानाचार्य (नोडल अधिकारी) ने आवेदन अग्रसारित करने से इन्कार कर दिया था। आरोप है कि इसके बाद प्रधान लिपिक ने डीआईओएस कार्यालय से कथित सांठगांठ कर राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य विकास मणि त्रिपाठी को नोडल अधिकारी नामित करा लिया। नव-नामित नोडल अधिकारी द्वारा बिना गंभीर परीक्षण के आवेदन अग्रसारित कर दिए गए। गहन जांच में यह भी पुष्टि हुई कि अनुसरण प्रमाणपत्रों पर नोडल अधिकारी के स्थान पर प्रधान लिपिक द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे। इसके अतिरिक्त निर्धारित समय सीमा तक शुल्क जमा नहीं किया गया, आवेदन पत्रों में आवश्यक विवरण अधूरे पाए गए, अर्हता प्रमाण पत्र संलग्न नहीं थे तथा बिना अनुमति पूर्व वर्ष के क्रमांक का उपयोग कर पत्राचार संस्थान से स्वीकृति प्राप्त करने का प्रयास किया गया।

डीआईओएस पर भी कार्रवाई संभव

परिषद के सचिव भगवती सिंह ने कहा कि डीआईओएस कार्यालय की लापरवाही के कारण परीक्षार्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है। बोर्ड परीक्षा के बाद जांच के बाद संबंधित के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, अपर शिक्षा निदेशक (पत्राचार) सीएल चौरसिया ने बताया कि प्रधान लिपिक ज्ञान प्रकाश पाठक और नोडल अधिकारी विकास मणि त्रिपाठी की मिलीभगत तथा डीआईओएस कार्यालय की संभावित संलिप्तता के कारण 700 परीक्षार्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है। प्रधान लिपिक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है और विवेचना के आधार पर अन्य संबंधित अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है।

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