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शिक्षकों की कमी के बाद भी जीआईसी का रिजल्ट बेहतर
Sun, 28 Jun 2020 08:21 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 28 Jun 2020 08:21 PM IST
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यूपी बोर्ड की ओर से शनिवार को घोषित हाईस्कूल के परिणाम में प्रदेश के शासकीय विद्यालयों ने शिक्षकों की कमी के बीच भी निजी विद्यालयों के वर्चस्व को चुनौती दी है। इंटरमीडिएट में शासकीय विद्यालय 83.70 फीसदी परिणाम के साथ निजी विद्यालयों के 72.65 फीसदी परिणाम की अपेक्षा 11 फीसदी आगे हैं।
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इसी तरह इस बार हाईस्कूल में भी शासकीय विद्यालयों ने बीते वर्ष की तुलना में काफी सुधार करते हुए 82.08 फीसदी सफलता अर्जित की जो कि निजी विद्यालयों के 85.11 प्रथिशत से मात्र तीन प्रतिशत ही कम है। मेरिट लिस्ट की होड़ में भले ही राजकीय विद्यालयों के छात्र जगह नहीं बना पाए हों परंतु ओवरऑल रिजल्ट के मामले वह निजी विद्यालयों को बराबरी पर टक्कर दे रहे हैं। प्रदेश और जिले की मेरिट में निजी विद्यालयों के विद्यार्थियों का पूरी तरह से कब्जा रहा।
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इंटरमीडिएट में शासकीय का रिजल्ट निजी स्कूलों से 11 फीसदी अधिक
इंटरमीडिएट के परीक्षा परिणाम में निजी और सहायता प्राप्त स्कूलों की अपेक्षा शासकीय विद्यालय भारी पड़े। इंटर का कुल परीक्षा परिणाम 74.63 फीसदी से अधिक रहा जबकि शासकीय स्कूलों का परिणाम 83.70 फीसदी रहा। इस प्रकार शासकीय विद्यालय रिजल्ट में सबसे आगे रहे।
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बोर्ड की ओर से जारी परिणाम में सहायता प्राप्त विद्यालयों का परिणाम 78.33 फीसदी और निजी स्कूलों का परिणाम 72.45 फीसदी रहा। प्रदेश में कुल 785 शासकीय विद्यालयों में परीक्षा में शामिल 84523 परीक्षार्थियों में 70744 पास हुए। 4077 सहायता प्राप्त विद्यालयों में परीक्षा में शामिल 743604 परीक्षार्थियों में 582433 परीक्षार्थी पास हुए।
वहीं 124482 निजी स्कूलों में परीक्षा में शामिल 1592903 परीक्षार्थियों में 1154009 पास हुए। इंटरमीडिएट में 20 फीसदी से कम परीक्षाफल वाले विद्यालय में सबसे कम 07 शासकीय विद्यालय रहे जबकि 18 सहायता प्राप्त तो 111 निजी विद्यालय शामिल रहे।
हाईस्कूल में निजी स्कूलों को शासकीय पर तीन फीसदी की बढ़त
बोर्ड की ओर से जारी परिणाम में हाईस्कूल का परीक्षाफल 83.31 फीसदी रहा जो 2019 की परीक्षा के 80.07 फीसदी की अपेक्षा तीन फीसदी अधिक है। इसमें निजी स्कूलों का परिणाम 85.11 फीसदी, शासकीय विद्यालयों का परिणाम 82.08 फीसदी, अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों का परिणाम 79.77 फीसदी रहा। इस प्रकार निजी स्कूलों का औसत परिणाम शासकीय एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों के परिणाम पर भारी रहा।
प्रदेश में कुल 20539 निजी विद्यालयों में परीक्षा में शामिल 1828823 परीक्षार्थियों में से 1556586 परीक्षार्थी पास हुए। 4528 सहायता प्राप्त विद्यालयों में परीक्षा में शामिल 789677 परीक्षार्थियों में से 629944 परीक्षार्थी पास हुए जबकि 2306 शासकीय विद्यालयों में परीक्षा में शामिल 135829 परीक्षार्थियों में से 111486 परीक्षार्थी पास हुए। हाईस्कूल में 20 फीसदी कम परीक्षाफल वाले स्कूलों में शासकीय से 43, सहायता प्राप्त विद्यालयों से मात्र पांच और निजी स्कूलों में 66 स्कूल शामिल रहे।