{"_id":"5f9c177defe28a47c2493abe","slug":"prayagraj-news-bsp-rebellion-spurs-enthusiasm-in-sp-but-giants-dissent-will-be-suppressed","type":"story","status":"publish","title_hn":"Prayagraj News: बसपा में बगावत से सपा में उत्साह लेकिन दिग्गजों के असंतोष को दबाना होगी चुनौती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Prayagraj News: बसपा में बगावत से सपा में उत्साह लेकिन दिग्गजों के असंतोष को दबाना होगी चुनौती
Fri, 30 Oct 2020 07:09 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 30 Oct 2020 07:09 PM IST
विज्ञापन
मायावती व अखिलेश यादव
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विधानसभा चुनाव से पहले प्रतापपुर के विधायक मुजतबा सिद्दीकी और हंडिया के हाकिम लाल बिंद की बगावत को सपा की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। सपा नेताओं का मानना है कि अगर दोनों नेता पार्टी का दामन थाम लेते हैं तो इसका सीधा लाभ चुनाव में मिलेगा। मुस्लिम मतों के ध्रुवीकरण के साथ बिंद वोटों के सपा में जाने से दोनों सीटें सपा के खाते में ही आएंगी। इसके साथ जिले की अन्य सीटों पर भी यह फॉर्मूला काम करेगा। क्योंकि जिले की अन्य विस सीटों पर भी मुस्लिम और बिंद वोटों का खासा दखल है। हालांकि ऐसा होने पर पार्टी के सामने हंडिया और प्रतापपुर में दिग्गज नेताओं के असंतोष का सामना करने की चुनौती भी होगी।
बसपा के बागी दोनों विधायकों के सपा में आने के आसार के साथ ही पार्टी में असंतोष की सुगबुगाहट भी सुनाई देने लगी है। हालांकि पार्टी के कई वरिष्ठ नेता इस मामले में अभी कुछ बोलने से बच रहे हैं। प्रतापपुर सीट से जोखू लाल यादव और विजमा यादव विधायक रह चुकी हैं। ये दोनों दिग्गज नेता अब भी प्रबल दावेदार हैं। वहीं हंडिया में सपा से टिकट के लिए मजबूत दावेदारों की लंबी सूची है।
पिछले चुनाव में पार्टी टिकट से भाग्य आजमा चुकीं निधि यादव और प्रशांत सिंह तो दावेदार हैं ही, निधि यादव के पिता बासुदेव यादव के भी वहां से चुनाव लड़ने की बात कही जा रही है। बासुदेव यादव का एमएलसी का कार्यकाल मार्च 2022 में खत्म हो रहा है। इसके अलावा यदि प्रदेश में सपा की सरकार बनती है तो उनके मंत्री बनने की भी प्रबल संभावना है। ऐसे में 2022 में उनके हंडिया से चुनाव लड़ने की चर्चा अभी से शुरू हो गई है। इसके अलावा पूर्व जिलाध्यक्ष कृष्णमूर्ति यादव, पूर्व अपर महाधिवक्ता कमल सिंह यादव भी हंडिया से दावेदार हैं।
विज्ञापन
इसके विपरीत मुजतबा सिद्दीकी और हाकिम लाल बिंद के तेवर से साफ है कि टिकट के साथ उचित सम्मान मिलने की शर्त पर ही वे सपा में शामिल होंगे। ऐसे में इन दोनों नेताओं के सपा में आने से शीर्ष नेतृत्व के सामने विरोध को दबाने की चुनौती होगी। जिलाध्यक्ष योगेश चंद्र यादव का कहना है कि बसपा से दोनों विधायकों के आने का सभी स्वागत कर रहे हैं। किसे कहां भेजा जाएगा यह पार्टी हाईकमान तय करेगा।
वहीं, हाकिम लाल को बिंद समाज का नेता माना जाता है। वोट बैंक के लिहाज से देखें तो अकेले हंडिया में करीब एक लाख बिंद मतदाता हैं। यही वजह है कि हंडिया विधानसभा के अलावा भदोही लोकसभा सीट पर भी बिंद मतदाताओं की निर्णायक भूमिका होती है। इसके अलावा नवाबगंज, सोरांव को छोड़ दें तो अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी इनकी संख्या आठ से 12 हजार के बीच है। ऐसे में इन दोनों विधायकों को पार्टी से जुड़ने को लेकर जिलाध्यक्ष योगेश चंद्र यादव काफी उत्साहित दिखाई दिए। उनका कहना है कि हाकिम लाल के पार्टी से जुड़ने से बिंद समाज का भरोसा बढ़ेगा, जिससे पार्टी और मजबूत होगी।
विज्ञापन
बसपा के बागी दोनों विधायकों के सपा में आने के आसार के साथ ही पार्टी में असंतोष की सुगबुगाहट भी सुनाई देने लगी है। हालांकि पार्टी के कई वरिष्ठ नेता इस मामले में अभी कुछ बोलने से बच रहे हैं। प्रतापपुर सीट से जोखू लाल यादव और विजमा यादव विधायक रह चुकी हैं। ये दोनों दिग्गज नेता अब भी प्रबल दावेदार हैं। वहीं हंडिया में सपा से टिकट के लिए मजबूत दावेदारों की लंबी सूची है।
विज्ञापन
पिछले चुनाव में पार्टी टिकट से भाग्य आजमा चुकीं निधि यादव और प्रशांत सिंह तो दावेदार हैं ही, निधि यादव के पिता बासुदेव यादव के भी वहां से चुनाव लड़ने की बात कही जा रही है। बासुदेव यादव का एमएलसी का कार्यकाल मार्च 2022 में खत्म हो रहा है। इसके अलावा यदि प्रदेश में सपा की सरकार बनती है तो उनके मंत्री बनने की भी प्रबल संभावना है। ऐसे में 2022 में उनके हंडिया से चुनाव लड़ने की चर्चा अभी से शुरू हो गई है। इसके अलावा पूर्व जिलाध्यक्ष कृष्णमूर्ति यादव, पूर्व अपर महाधिवक्ता कमल सिंह यादव भी हंडिया से दावेदार हैं।
विज्ञापन
इसके विपरीत मुजतबा सिद्दीकी और हाकिम लाल बिंद के तेवर से साफ है कि टिकट के साथ उचित सम्मान मिलने की शर्त पर ही वे सपा में शामिल होंगे। ऐसे में इन दोनों नेताओं के सपा में आने से शीर्ष नेतृत्व के सामने विरोध को दबाने की चुनौती होगी। जिलाध्यक्ष योगेश चंद्र यादव का कहना है कि बसपा से दोनों विधायकों के आने का सभी स्वागत कर रहे हैं। किसे कहां भेजा जाएगा यह पार्टी हाईकमान तय करेगा।
सपा को भरोसा, मजबूत होगा बिंद-मुस्लिम गठजोड़
मुस्लिम सपा का परंपरागत वोट बैंक रहा है। नेताओं का कहना है कि प्रतापपुर के विधायक मुजतबा सिद्दीकी के आने से मुस्लिमों के साथ यह जुड़ाव और मजबूत होगा। मतों की गणित को देखें तो प्रतापपुर के अलावा शहर दक्षिणी, शहर पश्चिमी, फूलपुर में मुस्लिम मतदाताओं की निर्णायक संख्या है। इसके अलावा जिले की अन्य सीट पर भी मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 20 से 35 हजार तक है। वहीं तीन बार के विधायक मुजतबा सिद्दीकी की इनके बीच मजबूत पकड़ मानी जाती है। सपा के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि जिले में फिलहाल उनसे बड़ा कोई मुस्लिम नेता नहीं है।वहीं, हाकिम लाल को बिंद समाज का नेता माना जाता है। वोट बैंक के लिहाज से देखें तो अकेले हंडिया में करीब एक लाख बिंद मतदाता हैं। यही वजह है कि हंडिया विधानसभा के अलावा भदोही लोकसभा सीट पर भी बिंद मतदाताओं की निर्णायक भूमिका होती है। इसके अलावा नवाबगंज, सोरांव को छोड़ दें तो अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी इनकी संख्या आठ से 12 हजार के बीच है। ऐसे में इन दोनों विधायकों को पार्टी से जुड़ने को लेकर जिलाध्यक्ष योगेश चंद्र यादव काफी उत्साहित दिखाई दिए। उनका कहना है कि हाकिम लाल के पार्टी से जुड़ने से बिंद समाज का भरोसा बढ़ेगा, जिससे पार्टी और मजबूत होगी।