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Prayagraj Nagar Nigam : निगम की बैठकों में गूंजता है पानी-पानी...जनता पूछे-कब पिलाओगे

Mon, 16 Jun 2025 12:49 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 16 Jun 2025 12:49 PM IST
सार

भीषण गर्मी में शहरवासी पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। नगर निगम बोर्ड की बैठकों में पानी की समस्या का मुद्दा कई बार गूंजा, लेकिन अब भी 30 से 40 मोहल्लों को पानी की दरकार है। पार्षद अफसरों को बार-बार समस्या से अवगत करा चुके हैं। 

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Prayagraj Nagar Nigam: Water-water echoes in the meetings of the corporation
प्रयागराज में जलसंकट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

भीषण गर्मी में शहरवासी पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। नगर निगम बोर्ड की बैठकों में पानी की समस्या का मुद्दा कई बार गूंजा, लेकिन अब भी 30 से 40 मोहल्लों को पानी की दरकार है। पार्षद अफसरों को बार-बार समस्या से अवगत करा चुके हैं। नतीजा संतोषजनक नहीं है। इंतजाम के दावे कागजी हैं।

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पार्षदों का आरोप है कि गर्मी में लाखों की आबादी पेयजल की समस्या से घिरी है। रविवार को भी कई मोहल्लों में जलापूर्ति बाधित रही। कहीं बालू आने की शिकायत तो कहीं लो प्रेशर से पानी ही नहीं पहुंच पा रहा था। नलकूप फुंक गए थे तो कहीं नलकूप रिबोर नहीं हो सके। खास तौर पर नगर निगम में शामिल हो चुके ग्रामीण अंचल के नैनी, झूंसी, झलवा, पीपल गांव और दारागंज, अल्लापुर, रसूलाबाद, टैगोर टाउन, जार्ज टाउन, वेनीगंज, छतनाग, गंगोत्री नगर, भारद्वाज पुरम मोहल्ले ऐसे हैं, जहां हर गर्मियों में लोग पानी-पानी चिल्लाते हैं।
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झूंसी और नैनी के लोग तो अब भी हैंडपंप के सहारे हैं। शहरी योजनाओं का लाभ अभी यहां तक नहीं पहुंचा। नगर निगम के 100 वार्ड में 640 पंप लगाए गए हैं। अभी डिमांड 110 की और है। वार्ड नंबर 45 छतनाग के पार्षद शिव नारायण का कहना है कि उनके यहां पानी की समस्या बरकरार हैं। छतनाग के न्यूआरके स्कूल, मायापुरी पंचदेव मंदिर आदि स्थानों पर तीन नलकूप खराब पड़े हैं। इसे ठीक कराने की कई बार मांग कर चुके हैं।
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नगर निगम का दावा है कि गर्मी में 126 नलकूपों का रिबोर कराया गया है। जबकि 25 से अधिक नलकूप खराब पड़े हैं। इन्हें रिबोर कराना जरूरी है। पार्षद आशीष द्विवेदी, शिवसेवक सिंह ने पेयजल संकट का मामला दमदारी से उठाया तो उनके यहां मेयर ने दो दिन पूर्व नए पंप लगाएं जाने के लिए शिलान्यास किया है। लेकिन यहां लोगों को बीस दिन बाद ही पानी मिल पाएगा।

आरओ और धुलाई सेंटरों पर नियंत्रण नहीं

शहर क्षेत्र में पेयजल के संकट का एक कारण यह भी है कि निजी अस्पताल, वाणिज्यिक-औद्योगिक इकाइयां भूजल का दोहन कर रही हैं। गाड़ियों की धुलाई करने वाले सेंटर और आरओ प्लांट में हजारों लीटर पानी रोजाना बर्बाद हो रहा हैं। नगर निगम जलकल विभाग की ओर से निगरानी का कोई इंतजाम नहीं हैं। इससे भूजल स्तर लगातार गिर रहा हैं। जानकारों की मानें तो पिछले पांच वर्ष में 40 फुट तक पानी नीचे खिसक गया हैं। इसका बड़ा कारण पानी की बर्बादी और तालाबों का वजूद समाप्त होना है। यह समस्या जुलाई के प्रथम सप्ताह तक रहेगी। इसके बाद भूगर्भ जल रिचार्ज होगा तब जाकर पानी का स्तर सामान्य होगा।

पानी की समस्या झूंसी, नैनी, झलवा में अधिक हैं। यहां अब भी हैंडपंप पर ही लोग आश्रित हैं। ऐसे इलाकों के लिए नई परियोजनाएं तैयार की गई हैं। जहां तक अन्य क्षेत्रों की बात है तो 125 नलकूप और पंप रिबोर किए गए हैं। चार पंप खराब पड़े हैं, जिसमें तीन पर काम शुरू करा दिया गया हैं। दस आरओ और धुलाई सेंटरों को बंद कराया गया हैं। - कुमार गौरव, जीएम जलकल।

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