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प्रयागराज : महाकुंभ के दौरान लगी 76 फीसदी लाइट खराब, फर्म ब्लैक लिस्ट कर 70 लाख जब्त, नगर निगम ने की कार्रवाई

Sat, 17 Oct 2026 01:05 PM IST
vinod kumar singh विनोद सिंह
Updated Sat, 17 Oct 2026 01:05 PM IST
सार

महाकुंभ-2025 के दौरान प्रयागराज में लगाई गई सजावटी लाइटों के रखरखाव में बड़ी लापरवाही सामने आई है। नगर निगम के निरीक्षण में 76.15 फीसदी मोटिफ लाइटें खराब मिलीं, जबकि 301 मोटिफ गायब पाए गए। कार्रवाई करते हुए निगम ने संबंधित फर्म को तीन साल के लिए काली सूची में डाल दिया है। साथ ही पांच लाख रुपये का अर्थदंड लगाने के साथ करीब 70 लाख रुपये की जमानत और रखरखाव धनराशि भी जब्त कर ली है।

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76% of the lights installed during the Mahakumbh have become faulty; the firm has been blacklisted
महाकुंभ। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक।

विस्तार

महाकुंभ-2025 के दौरान लगी लाइट के मामले में बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। नगर निगम ने खराब लाइट का रखरखाव नहीं करने पर मेसर्स द क्लाइमेट मेकर्स (सेल्स) फर्म को काली सूची में डाल दिया है। फर्म पर पांच लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। इसके साथ ही निगम ने फर्म की करीब 70 लाख रुपये की जमानत और रखरखाव धनराशि भी जब्त कर ली है। महाकुंभ के दौरान लगी 76 फीसदी लाइट खराब हो गई हैं।

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यह कार्रवाई महाकुंभ मेला-2025 के थिमैटिक लाइटिंग कार्यों में लापरवाही की वजह से की गई है। निगम ने फर्म को कई बार नोटिस जारी किए थे। इनमें फर्म से दो सप्ताह में खराब स्पाइरल लाइटों और मोटिफ्स को ठीक करने के लिए कहा गया था। फर्म ने इन निर्देशों का पालन नहीं किया। इसके बाद 12 अक्तूबर को एक स्थलीय निरीक्षण किया गया।

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इसमें पाया गया कि 2842 स्थापित स्पाइरल लाइट में से 1452 यानी 51.09 फीसदी बंद थी। इसी तरह 2080 मोटिफ्स में से 1584 यानी 76.15 फीसदी खराब मिलें। निरीक्षण के दौरान 301 मोटिफ्स लाइट गायब थीं। फर्म की इस लापरवाही से नगर निगम की छवि धूमिल हुई है। नगर आयुक्त के आदेश पर यह कार्रवाई की गई है। फर्म को तीन वर्षों के लिए काली सूची में दर्ज किया गया है। यह कदम अनुबंध के उल्लंघन के कारण उठाया गया है।

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लापरवाही और नोटिसों की लंबी शृंखला

फर्म को 28 अगस्त 2024 को कार्यादेश जारी किया गया था। अनुबंध 30 अगस्त 2024 को पूरा हुआ और कार्य एक सितंबर 2024 से शुरू हुआ। नगर निगम सीमा में 2842 स्पाइरल लाइट, 2080 मोटिफ्स और 2842 लाल रंग की स्ट्रिप की आपूर्ति की गई थी। इनकी स्थापना 20 जनवरी 2025 को पूरी हुई। निविदा शर्तों के अनुसार, मोटिफ्स लाइट के लिए एक वर्ष और स्पाइरल लाइटों के लिए तीन माह की दोष देयता अवधि निर्धारित थी। इन कार्यों का संचालन और रखरखाव भी फर्म को करना था लेकिन उसने इसका पालन नहीं किया। मुख्य अभियंता (विद्युत/यांत्रिक) संजय कटियार ने फर्म पर रखरखाव में लापरवाही का आरोप लगाया है।

चोरी के दावे और निगम की असंतुष्टि

मुख्य अभियंता कार्यालय ने 13 मई 2025 को फर्म को पहला नोटिस भेजा था। इसमें सभी बंद स्पाइरल और मोटिफ्स लाइट को तुरंत जलाने का निर्देश था। फर्म ने इस पर कोई रुचि नहीं दिखाई। इसके बाद 29 अगस्त 2025 को एक और आदेश जारी किया गया। फर्म ने छह सितंबर 2025 को जवाब दिया कि असामाजिक तत्वों की तरफ से एलईडी मोटिफ्स के अडॉप्टर और स्पाइरल लाइट के तार चुरा लिए गए हैं। हालांकि सितंबर 2025 में हुए सर्वेक्षण में चोरी का कोई मामला नहीं पाया गया। मुख्य अभियंता कार्यालय ने फर्म के इस स्पष्टीकरण पर पूरी तरह से संतुष्टि नहीं जताई है।

वित्तीय कार्रवाई और अनुबंध का उल्लंघन

नगर निगम ने फर्म की 47,87,611 रुपये की जमानत धनराशि जब्त कर ली है। इसके अतिरिक्त, रखरखाव कार्य के सापेक्ष 22,73,500 रुपये भी जब्त किए गए हैं। कुल मिलाकर करीब 70 लाख रुपये की धनराशि जब्त की गई है। फर्म को इस वर्ष 21 अप्रैल, 11 सितंबर और 14 सितंबर को भी नोटिस भेजे गए थे।

दिसंबर 2025 में पांच लाख रुपये का अर्थदंड लगाते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। फर्म ने 19 सितंबर को अत्यधिक वर्षा को खराबी का कारण बताया और मरम्मत के लिए 15 से 20 दिन मांगे थे। इसके जवाब में 22 सितंबर को दो सप्ताह में लाइट ठीक करने का अंतिम नोटिस दिया गया लेकिन फर्म ने कोई कार्रवाई नहीं की।

महाकुंभ के दौरान लगाई गई लाइट के रखरखाव में लापरवाही देखने को मिली है। इनमें 76 फीसदी लाइट खराब हो गई हैं। इसके बाद फर्म को ब्लैक लिस्ट करने के साथ पांच लाख रुपये अर्थदंड लगाया गया है। इसके अलावा रखरखाव के 70 लाख रुपये भी जब्त कर लिए गए हैं। - साईं तेजा, नगर आयुक्त

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