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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Prayagraj Magh Mela: Magh Mela will be settled on 580 hectares of land on the sands of Sangam

प्रयागराज माघ मेला : संगम की रेती पर 580 हेक्टेयर भूमि पर बसेगा माघ मेला

Fri, 10 Dec 2021 05:00 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 10 Dec 2021 05:00 AM IST
सार

तीन सेक्टरों में कटान से कम हुई जमीन, दर्जनों संस्थाओं पर विस्थापन की मार, 30 प्रतिशत भी नहीं पूरा हो सका काम। कानपुर बैराज से रोज 28 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने से माघ मेले की बसावट पर असर, पांटून पुलों का बिगड़ा एलाइनमेंट।

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Prayagraj Magh Mela: Magh Mela will be settled on 580 hectares of land on the sands of Sangam
Prayagraj News : माघ मेले की तैयारी जोरों पर चल रही है। - फोटो : प्रयागराज

विस्तार

इस बार माघ मेला बसाने के लिए भूमि का सर्वे पूरा कर लिया गया है। कटान की वजह से सेक्टर दो, तीन और चार में करीब सौ बीघे जमीन कम हो गई है। इस वजह से दर्जनों संस्थाओं का विस्थापन तय हो गया है। उधर, कानपुर बैराज से लगातार पानी छोड़े जाने से पांटून पुलों के निर्माण में बाधा खड़ी हो गई है। तेज बहाव की वजह से जहां पीपे जुड़ नहीं पा रहे हैं, वहीं त्रिवेणी और महावीर पुलों का एलाइनमेंट भी बिगड़ने से पीडब्ल्यूडी के माथे पर बल पड़ गए हैं।

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सर्वे के बाद इस बार माघ मेला के लिए 580 हेक्टेयर भूमि मिली है। सेक्टर दो में महावीर मार्ग, सरस्वती मार्ग और त्रिवेणी मार्ग पर भारी कटान से जमीनें कम हो गई हैं। इतना ही नहीं, ओल्ड जीटी और गंगोली शिवाला पर कटान की वजह से सेक्टर तीन, चार में भी जमीन का दायरा कम हो गया है। इससे दर्जनों संस्थाओं को विस्थापन की मार झेलनी पड़ेगी। फिलहाल जलस्तर लगातार बढ़ने से गंगा तेज होती जा रही हैं। फिलहाल 20 से 25 हजार क्यूसेक पानी कानपुर बैराज से रोज गंगा में आ रहा है।

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Prayagraj Magh Mela: Magh Mela will be settled on 580 hectares of land on the sands of Sangam
Prayagraj News : माघ मेले की तैयारी जोरों पर चल रही है। - फोटो : प्रयागराज

यही हाल रहा तो इस बार मेला बसाने में जबरदस्त दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। हालत यह है कि माघ मेला शुरू होने में अब सिर्फ महीने भर ही शेष रह गए हैं, लेकिन काम 30 प्रतिशत भी पूरा नहीं हो सका है। जिस तरह काम हो रहा है उससे नहीं लगता कि मेला क्षेत्र में प्रस्तावित पांच पांटून पुलों का निर्माण 31 दिसंबर तक पूरा हो पाएगा। 15 दिसंबर से भूमि आवंटन होना है। इस अवधि तक त्रिवेणी या महावीर पुल तैयार न होने पर संतों, भक्तों और अफसरों को पार उतरने में दिक्कतें होंगी। ऐसे में भूमि की नापी और आवंटन कराने के लिए शास्त्री पुल से होकर ही जाना पड़ेगा।


कटान रोकने के लिए सिंचाई विभाग को हिदायत दी गई है। इसके लिए उच्च स्तर पर भी प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि गंगा में प्रवाह कम हो जाए और संतों, भक्तों, कल्पवासियों के लिए माघ मेला बसाने में किसी तरह की दिक्कतें न आने पाएं। -शेषमणि पांडेय, मेला अधिकारी

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