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Prayagraj magh mela : माघ मेले की शोभा बने हिटलर-ट्रंप और कोतवाल बाबा
Sun, 31 Jan 2021 01:10 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 31 Jan 2021 01:10 AM IST
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prayagraj news : माघ मेले में पहुंचे तरह-तरह के बाबा।
- फोटो : prayagraj
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संगम की रेती पर संतों-भक्तों के सबसे बड़े समागम के रूप में बसे माघ मेले में अजब-गजब बाबाओं ने धूना रमाया है। एक से बढ़कर एक वेश और नाम वाले बाबाओं को देखते रह जाएंगे। इन बाबाओं के जैसे काम वैसे नाम भी हैं। इस बार के माघ मेले में हिटलर बाबा का भी शिविर लगा है और अपनी अगज-गजब आदतों के लिए मशहूर ट्रंप बाबा का भी। भस्म, भभूत, हैट और काला चश्मा में दर्शन देने वाले ऐसे बाबाओं के शिविरों में भक्तों की भीड़ लग रही है।
कोविड-19 के प्रोटोकॉल के बीच बसे माघ मेले में बाबाओं के शाही अंदाज और उनके निराले रूप कल्पवासियों और देश भर से आने वाले स्नानार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हैं। खाक चौक के शिविरों में ऐसे बाबाओं के दर्शन के लिए भक्त पहुंच रहे हैं। रामानुजाचार्य मार्ग पर स्थित जगदीश मंदिर के शिविर में माधव दास उर्फ हिटलर बाबा का धूना लगा है।
आंखों पर काला चश्मा उनकी शान है। वह काला चश्मा लगाकर धूना पर न बैठें तो भक्त टोकाटाकी शुरू कर देते हैं। सख्तमिजाजी और प्रबंधन में माहिर हिटलर बाबा भस्मी पोतने के बाद दिन भर संतों, भक्तों से घिरे रहते हैं। उनकी दिनचर्या भी निराली है। वह आधी रात 2:30 बजे के बाद ही बिस्तर छोड़कर गंगा में डुबकी लगाने पहुंच जाते हैं। चार बजे भोर से विश्व कल्याण के लिए हवन शुरू हो जाता है। मूलरूप से सैदाबाद के निवासी शिक्षक राजमणि त्रिपाठी के पुत्र अजय कुमार त्रिपाठी का मन बचपन से ही परमात्मा की भक्ति में लग गया था।
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वह बताते हैं कि 12वीं पास होने के बाद एक दिन वह घर से निकल कर चित्रकूट चले गए। कुछ दिनों बाद महामंडलेश्वर रघुवरदास महाराज से दीक्षा लेकर संन्यास ले लिया और अब हिटलर बाबा के नाम से मशहूर हैं। इसी तरह त्रिवेणी मार्ग स्थित भक्तमाल अयोध्या साकेत धाम के विनेका बाबा के शिष्य ट्रंप बाबा भी इन दिनों सुर्खियां बटोर रहे हैं। ट्रंप बाबा अपनी अड़ियल शैली और फक्कड़मिजाजी के लिए जाने जाते हैं। वह शिविर में जो चाहते हैं, उसे करा कर ही दम लेते हैं। इसी तरह कंधे पर चिमटा और पगड़ी बांधकर चलने वाले भैरो बाबा उर्फ कोतवाल बाबा मेले में छाए हुए हैं।
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कोविड-19 के प्रोटोकॉल के बीच बसे माघ मेले में बाबाओं के शाही अंदाज और उनके निराले रूप कल्पवासियों और देश भर से आने वाले स्नानार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हैं। खाक चौक के शिविरों में ऐसे बाबाओं के दर्शन के लिए भक्त पहुंच रहे हैं। रामानुजाचार्य मार्ग पर स्थित जगदीश मंदिर के शिविर में माधव दास उर्फ हिटलर बाबा का धूना लगा है।
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आंखों पर काला चश्मा उनकी शान है। वह काला चश्मा लगाकर धूना पर न बैठें तो भक्त टोकाटाकी शुरू कर देते हैं। सख्तमिजाजी और प्रबंधन में माहिर हिटलर बाबा भस्मी पोतने के बाद दिन भर संतों, भक्तों से घिरे रहते हैं। उनकी दिनचर्या भी निराली है। वह आधी रात 2:30 बजे के बाद ही बिस्तर छोड़कर गंगा में डुबकी लगाने पहुंच जाते हैं। चार बजे भोर से विश्व कल्याण के लिए हवन शुरू हो जाता है। मूलरूप से सैदाबाद के निवासी शिक्षक राजमणि त्रिपाठी के पुत्र अजय कुमार त्रिपाठी का मन बचपन से ही परमात्मा की भक्ति में लग गया था।
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वह बताते हैं कि 12वीं पास होने के बाद एक दिन वह घर से निकल कर चित्रकूट चले गए। कुछ दिनों बाद महामंडलेश्वर रघुवरदास महाराज से दीक्षा लेकर संन्यास ले लिया और अब हिटलर बाबा के नाम से मशहूर हैं। इसी तरह त्रिवेणी मार्ग स्थित भक्तमाल अयोध्या साकेत धाम के विनेका बाबा के शिष्य ट्रंप बाबा भी इन दिनों सुर्खियां बटोर रहे हैं। ट्रंप बाबा अपनी अड़ियल शैली और फक्कड़मिजाजी के लिए जाने जाते हैं। वह शिविर में जो चाहते हैं, उसे करा कर ही दम लेते हैं। इसी तरह कंधे पर चिमटा और पगड़ी बांधकर चलने वाले भैरो बाबा उर्फ कोतवाल बाबा मेले में छाए हुए हैं।