प्रयागराज माघ मेला : भूमि आवंटन से पहले संगम की रेती पर संतों में मचा घमासान
भूमि सुविधाओं के लिए बीते वर्ष सिर फुटौव्वल करा चुके आचार्यबाड़ा के संत एक बार फिर लड़ने लगे हैं। रामानुज नगर प्रबंध समिति से अलग हुए अखिल भारतीय रामानुज वैष्णव समिति आचार्यबाड़ा के संतों ने डीएम को 150 बीघा भूमि आवंटित करने के लिए प्रस्ताव दिया है।
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संगम की रेती पर माघ मेला बसाने के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया 15 दिसंबर से आरंभ होगी। इससे पहले ही भूमि के लिए आचार्यबाड़ा में साधु-संतों के बीच झगड़े शुरू हो गए हैं। दलदल और कटान में इस बार 50 बीघे से अधिक भूमि गंगा में विलीन हो गई है, जबकि दो धड़ों में बंटे आचार्यबाड़ा के संतों ने अलग-अलग बैठकें कर भूमि सुविधाएं बढ़ाने के लिए मेला प्रशासन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। अब तक आचार्यबाड़ा को 78 बीघा भूमि आवंटित होती रही है, जबकि इस बार दोनों गुटों को मिलाकर तीन सौ बीघे भूमि का प्रस्ताव मेला प्रशासन को भेजा गया है।
भूमि सुविधाओं के लिए बीते वर्ष सिर फुटौव्वल करा चुके आचार्यबाड़ा के संत एक बार फिर लड़ने लगे हैं। रामानुज नगर प्रबंध समिति से अलग हुए अखिल भारतीय रामानुज वैष्णव समिति आचार्यबाड़ा के संतों ने डीएम को 150 बीघा भूमि आवंटित करने के लिए प्रस्ताव दिया है। इस धड़े के अध्यक्ष अच्युत प्रपन्नाचार्य और महामंत्री कौशलेंद्र प्रपन्नाचार्य का कहना है कि कुंभ-2019 तक भूमि सुविधाओं के आवंटन में किसी तरह की दिक्कतें नहीं थीं। लेकिन, 2020 के माघ मेले में कुछ संतों की मनमानी की वजह से दो तिहाई सदस्य अलग हो गए थे।
इस धड़े के पदाधिकारियों ने मेलाधिकारी से आग्रह किया है कि पूर्व के आवंटन रजिस्टर के आधार पर प्रशासन ही इस बार भी भूमि सुविधाओं का वितरण करे। इसके अलावा इस गुट के संतों ने मोरी मार्ग से भूमि आवंटन की शुरुआत करने के लिए भी आवाज उठाई है। साथ ही हर शिविर के लिए पांच नल, पांच एलईडी, पांच स्वच्छता प्रसाधन आवंटित करने की मांग की है। उधर, रामानुजनगर प्रबंध समिति के अध्यक्ष रामेश्वराचार्य, महामंत्री स्वामी अखिलेश्वराचार्य और कोषाध्यक्ष स्वामी घनश्यामाचार्य ने भी भूमि सुविधाओं के लिए बैठक करने के बाद मेलाधिकारी को प्रस्ताव भेजा है।
इस गुट ने 209 पुरानी संस्थाओं के शिविरों के अलावा 40 नए साधु-संतों के लिए भूमि मांगी है। इनका कहना है कि इस बार अयोध्या, चित्रकूट, काशी, नैमिषारण्य समेत कई तीर्थों से नए वैष्णव संत आ रहे हैं। इनके लिए भी भूमि आवंटित की जाए। इसके लिए दोनों धड़े की ओर से 150-150 बीघा भूमि की मांग की गई है। जबकि , बीते वर्षों में आचार्यबाड़ा को 78 बीघे भूमि आवंटित क जाती रही है।
भूमि सुविधाएं बढ़ाने के लिए संतों के आवेदन आए हैं। इस बार कटान और दलदल की वजह से भूमि काफी कम हो गई है। ऐसे में भूमि बढ़ाना संभव नहीं है। जिन संस्थाओं की भूमि कटान में चली गई है, उनको कैसे और कहां बसाया जाए, यही सबसे बड़ी चुनौती है। संत कुमार, एसडीएम मेला।