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पांडुलिपियों केजरिए माघ महात्म्य-प्रयाग महात्म्य को जानेगी दुनिया

Sat, 07 Dec 2019 12:54 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 07 Dec 2019 12:54 AM IST
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Prayagraj Magh mela 2020
Prayagraj Magh mela 2020 - फोटो : CITY DESK
माघ मेले में दुर्लभ पांडुलिपियों की प्रदर्शनी लगाने की तैयारी, महर्षि वेद व्यास की रचित कृतियों के हस्तलेख होंगे प्रदर्शित
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प्रागराज। माघ मेले में दुर्लभ पांडुलिपियों के जरिए भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक ज्ञान से देश-दुनिया को परिचित कराने की तैयारी की गई है। इसके लिए कुंर्भ की तर्ज पर प्रयाग महात्म्य और माघ महात्म्य की पांडुलिपियों की दीर्घा सजाई जा सकती है। राष्ट्रीय अभिलेखागार की ओर से दुर्लभ पांडुलिपियों के जरिए माघ महात्म्य और प्रयाग महात्म्य से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को परिचित कराने की तैयारी है। वेद-पुराणों में वर्णित प्रयाग के महात्म्य पर आधारित पांडुलिपियों को ही इसमें जगह दी जाएगी।
वेद-पुराणों में गाई गई माघ की महिमा को इस बार माघ मेले में प्रदर्शित करने की योजना है। इसका आधार बनेंगी वेद-पुराणों के रचइया महर्षि वेद व्यास की पांडुलिपियां। वायु पुराण पर आधारित माघ महात्म्य की पांडुलिपि वर्ष 1883 की है। 14.5 इंच लंबे और पांच इंच चौड़े आकार के इस हस्तलिखित ग्रंथ में कुल 30 अध्याय हैं। अभिलेखागार के अफसरों के अनुसार इसके माध्यम से माघ महिमा पर ब्रह्मा और महर्षि नारद के बीच संवाद से लोग परिचित हो सकेंगे। इसमें प्रात: स्नान, प्रयाग में स्थित देवी-देवताओं के दर्शन का फल, गंगा, यमुना व सरस्वती के संगम में स्नान के फल दान की महिमा लिखी गई है।
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इसी तरह महर्षि वेदव्यास रचित 13 इंच लंबे और पांच इंच चौड़े प्रयाग महात्म्य की भी पांडुलिपियों को प्रदर्शित किया जाएगा। इस हस्तलिखित ग्रंथ के दो खंड अभिलेखागार में सुरक्षित हैं। इसमें भी त्रिवेणी स्नान व दर्शन के महत्व के साथ ही प्रयागराज की महत्ता का विस्तार से वर्णन किया गया है। दोनों की ग्रंथों की लिपि संस्कृत में है। अफसरों के मुताबिक इस पांडुलिपि प्रदर्शनी के माध्यम से श्रद्धालु प्रयागराज के धार्मिक, सांस्कृति महत्व व जीवन दर्शन से परिचित हो सकेंगे।
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प्रयागराज की धार्मिक परंपरा और माघ मेले के महत्व को बताने के लिए पांडुलिपियों की प्रदर्शनी लगाने के लिए हम तैयार हैं। इन दुर्लभ ग्रंथों की पांडुलिपियों को माघ मेले में श्रद्धालुओं के अलावा पर्यटक और शोधार्थी देख सकेंगे। गुलाम सरवर- क्षेत्रीय पांडुलिपि अधिकारी- प्रयागराज।
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