होलागढ़ के बरई हरखपुर गांव में एक परिवार के चार लोगों की जिस बेरहमी से हत्या की गई, उसे देखकर ग्रामीण कांप उठे। खून से लथपथ शवों की हालत बर्बरता की दास्तां बयां कर रही थीं। हत्यारों ने बेटे-बेटियों व मां का गला काटा था तो वैद्य के पूरे शरीर पर ताबड़तोड़ वार किए थे। हत्यारों की क्रूरता देख पुलिसकर्मी भी स्तब्ध थे।
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मृत प्रिंस, श्रेया और सृष्टि
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वैद्य के घर के भीतर जाने के लिए दरवाजे के ठीक सामने गलियारा है। गलियारे में जाकर दाहिनी ओर मुड़ने पर कमरे स्थित हैं। बृहस्पतिवार रात विमलेश गलियारे के मुहाने पर रखी चौकी जबकि बेटा प्रिंस ठीक बगल स्थित कमरे में सो रहा था। पत्नी रचना व दोनों बेटियां भीतर के कमरे में सो रही थीं।
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मौके पर पहुंची पुलिस और लोगों की भीड़
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ग्रामीणों की सूचना पर पहुंचे पुलिसकर्मी घर के भीतर दाखिल हुए तो चौकी पर विमलेश मृत पड़े मिले। उनकी गर्दन के साथ ही चेहरे व शरीर के अन्य हिस्सों पर धारदार हथियार से हमला किया गया था और पूरा शरीर खून से लथपथ था। बगल के कमरे में रखी चौकी पर बेटा मृत पड़ा था जिसके गले पर गहरे जख्म का निशान था।
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मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मी
- फोटो : अमर उजाला
पुलिसकर्मी भीतर के कमरे में गए तो वहां दोनों बेटियों के खून से सने शव चारपाई पर पड़े मिले। इन दोनों को भी गले पर वार कर मौत के घाट उतारा गया था। उधर, खून से लथपथ रचना जमीन पर पड़ी हुई थी, जिसके गले के साथ ही चेहरे पर धारदार हथियार से हमले के निशान थे। हत्यारों की क्रूरता देख ग्रामीण कांप उठे तो पुलिसकर्मी भी स्तब्ध थे।
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होलागढ़ हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, घर के भीतर के जो हालात थे उससे यही लग रहा था कि वैद्य के बेटे व दोनों बेटियों को तो चारपाई से उठने का भी मौका नहीं मिला। हत्यारों ने सोते समय ही धारदार हथियार से वार कर उन्हें मौत की नींद सुला दिया। वैद्य के गले के अलावा शरीर के कई अन्य हिस्सों में भी जख्म के निशान मिलने से माना जा रहा है कि जान बचाने के लिए उन्होंने हत्यारों से जमकर संघर्ष किया। घर के भीतर काफी मात्रा में खून भी बिखरा था।