Prayagraj Flood : बाढ़ से खाली हुए घरों की निगरानी, रात में नावों पर पेट्रोलिंग, हर थाने से लगाई जाएंगी दो टीम
गंगा-यमुना के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी के चलते जिले के एक दर्जन थाना क्षेत्र बाढ़ की चपेट में हैं। स्थिति यह है कि कई मोहल्लों, बस्तियों और गांवों के लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों में पलायन कर चुके हैं।
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गंगा-यमुना के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी के चलते जिले के एक दर्जन थाना क्षेत्र बाढ़ की चपेट में हैं। स्थिति यह है कि कई मोहल्लों, बस्तियों और गांवों के लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों में पलायन कर चुके हैं। ऐसे में खाली पड़े मकानों में चोरी की आशंका को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। इसके तहत रात में नावों पर पेट्रोलिंग कराने का निर्णय लिया है।
पुलिस विभाग ने खासतौर पर ऐसे इलाकों में जहां बाढ़ का पानी गहराई तक भर गया है और सड़क मार्ग से पहुंचना संभव नहीं है, इन स्थानों पर जल पुलिस, पीएसी बाढ़ राहत दल, एसडीआरएफ और एनडीआरफ की टीमों के साथ मिलकर लगातार निगरानी की जा रही है।
बाढ़ प्रभावित संवेदनशील इलाकों में सीसीटीवी कैमरों से भी निगरानी रखी जा रही है। दरअसल कमांड सेंटर से जिले भर में लगे सर्विलांस कैमरों से मिलने वाली फीड के जरिये बाढ़ प्रभावित व आसपास के इलाकों में लगातार निगरानी रखने को निर्देशित किया गया है।
बाढ़ राहत के लिए 88 चौकियां, दो तरह के ऑपरेशन
डीसीपी अभिषेक भारती ने बताया कि जिले में कुल 88 बाढ़ राहत चौकियां स्थापित की गई हैं। इन चौकियों में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पीएसी बाढ़ राहत दल और जल पुलिस की टीमें तैनात हैं। ये टीमें दो तरह के ऑपरेशन चला रही हैं। इनमें से एक रेस्क्यू जबकि, दूसरा रिलीफ ऑपरेशन है।
पलायन कर चुके हैं सैकड़ों परिवार
जिन इलाकों में पानी पूरी तरह से घरों में भर गया है, वहां के सैकड़ों परिवार सुरक्षित स्थानों में शरण लिए हुए हैं। कई परिवार राहत शिविरों में पहुंचे हैं तो कुछ अपने रिश्तेदारों के यहां शिफ्ट हो गए हैं। पुलिस इन सभी इलाकों को चिह्नित कर उनके नक्शे तैयार कर रही है। उधर, राहत शिविरों में सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित थानों को दी गई है। बाढ़ राहत क्षेत्रों व शिविरों में लगाई गई डयूटियों की नियमित रूप से मॉनिटरिंग की जा रही है। हर थाने से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति की रिपोर्ट ली जा रही है।