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Prayagraj : 80 साल की उम्र में गुजारा भत्ते की लड़ाई... हाईकोर्ट ने कहा-लगता है कलयुग आ गया, जताई ये उम्मीद

Wed, 25 Sep 2024 05:00 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 25 Sep 2024 05:00 AM IST
सार

पत्नी को 5,000 रुपये भरण-पोषण देने संबंधी पारिवारिक न्यायालय के आदेश के खिलाफ पति की याचिका पर कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा, 80 साल की उम्र में गुजारा भत्ता की लड़ाई देखकर लगता है कलयुग आ गया है।

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Prayagraj: Fight for maintenance at the age of 80... High Court said - It seems Kalyug has arrived
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

एक बुजुर्ग दंपती के बीच गुजारा भत्ता की कानूनी जंग इलाहाबाद हाईकोर्ट तक आ पहुंची है। पत्नी को 5,000 रुपये भरण-पोषण देने संबंधी पारिवारिक न्यायालय के आदेश के खिलाफ पति की याचिका पर कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा, 80 साल की उम्र में गुजारा भत्ता की लड़ाई देखकर लगता है कलयुग आ गया है। कोर्ट ने याची की पत्नी को नोटिस जारी करते हुए उम्मीद जताई कि अगली तारीख पर दोनों पक्ष सकारात्मक समझौते के साथ आएंगे।

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दरअसल, मुनेश चिकित्सा विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे। उन्होंने पत्नी गायत्री देवी के नाम 1981 में मकान बनवाया। इनकी पांच संतानों में तीन बेटियां और दो बेटे हैं। शादी के बाद बेटियां ससुराल चली गईं। 2005 में मुनेष सेवानिवृत्त होने से पहले तक पूरा परिवार साथ रहता था। वर्ष 2008 में पत्नी गायत्री ने छोटे बेटे को अपना मकान दान कर दिया। बड़े बेटे का हक मारे जाने को लेकर बुजुर्ग दंपती के बीच विवाद शुरू हुआ और बात कानूनी जंग तक आ पहुंची। दोनों अलग-अलग बेटों के साथ रहने लगे। गायत्री ने परिवार न्यायालय में पति के खिलाफ भरण-पोषण का दावा किया तो अदालत के मांग स्वीकार करने के खिलाफ मुनेश ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
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पति की दलील-पत्नी और छोटे बेटे ने घर से निकाला
याची पति की ओर से अधिवक्ता घनश्याम दास मिश्रा ने दलील दी कि 1981 में पत्नी के नाम पर मकान खरीदा। साथ ही, सेवानिवृत्ति के बाद मिले एक लाख रुपये भी 2007 में पत्नी के नाम फिक्स्ड डिपॉजिट किए थे। इसके बाद भी 2000 रुपये पत्नी को देता था। फिर भी, उसने परिवार न्यायालय में दावा कर दिया। जबकि, पत्नी खुद छोटे बेटे को दान दिए घर में परचून की दुकान चलाती हैं। पत्नी और छोटे बेटे ने याची और बड़े बेटे को घर से निकाल दिया है। ऊपर से पेंशन के 13,740 रुपये में से 5000 रुपये भरण पोषण की मांग की जा रही है, जो अवैधानिक है।

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