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प्रयागराज : बैठक से पहले ही सहकारी बैंक के अध्यक्ष अमरनाथ मौर्य ने दिया इस्तीफा

Fri, 08 Apr 2022 07:25 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 08 Apr 2022 07:25 PM IST
सार

बैंक प्रबंधन समिति के पूर्व सदस्य ने अमरनाथ मौर्य के निर्वाचन को चुनौती दी थी। निर्वाचन के चार वर्ष बाद हुई शिकायत की उप निबंधक ने जांच कराई। जांच रिपोर्ट में भी अमरनाथ के निर्वाचन पर सवाल उठाया गया था।

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Prayagraj: Even before the meeting, co-operative bank chairman Amarnath Maurya resigned
Prayagraj News : अमरनाथ मौर्य, अध्यक्ष, जिला सहकारी बैंक। - फोटो : प्रयागराज

विस्तार

जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष अमरनाथ मौर्य ने इस्तीफा दे दिया है। बोर्ड ने उनका इस्तीफा भी स्वीकार कर लिया। उनकी जगह उपाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह को अध्यक्ष का प्रभार सौंपा गया।

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बैंक प्रबंधन समिति के पूर्व सदस्य ने अमरनाथ मौर्य के निर्वाचन को चुनौती दी थी। निर्वाचन के चार वर्ष बाद हुई शिकायत की उप निबंधक ने जांच कराई। जांच रिपोर्ट में भी अमरनाथ के निर्वाचन पर सवाल उठाया गया था। उप निबंधक के ही कहने पर इस पर चर्चा के लिए बोर्ड की शुक्रवार को बैठक बुलाई गई थी। अपना पक्ष रखने के लिए अमरनाथ मौर्य को भी बुलाया गया था।
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माना जा रहा था कि फैसला अमरनाथ के खिलाफ ही जाएगा। इसके अलावा उन्हें अयोग्य घोषित किया जाता तो आगे तीन साल के लिए चुनाव लड़ने पर भी रोक लग जाती। माना जा रहा है कि इससे बचने के लिए उन्होंने सुनवाई से पहले ही इस्तीफा दे दिया। बैंक के महाप्रबंधक सुनील चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि  बोर्ड ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।
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बैंक की नियमावली में प्रावधान है कि नए अध्यक्ष के चुनाव तक उपाध्यक्ष यह जिम्मेदारी संभालेंगे। इसी नियम के तहत उपाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह को अध्यक्ष का कार्यभार सौंपा गया। भूपेंद्र ने कार्यभार ग्रहण भी कर लिया। वहीं अमरनाथ मौर्य का कहना है कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद ही इस्तीफा दे देना चाहिए था। उनका कहना है कि निदेशक मंडल के अन्य सदस्यों के साथ चर्चा के बाद इस्तीफे का निर्णय लिया और बैठक से पहले ही त्यागपत्र सौंप दिया।

चुनाव पर आयोग लेगा निर्णय
अमरनाथ मौर्य का इस्तीफा तथा बोर्ड की शुक्रवार को हुई बैठक में लिए गए निर्णयों की पूरी रिपोर्ट बैंक के निर्वाचन आयोग को भेज दी जाएगी। चुनाव कराने पर आयोग की निर्णय लेगा। चूंकि निदेशक मंडल का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। निदेशक मंडल के सदस्य ही अध्यक्ष का चुनाव करते हैं। ऐसे में अध्यक्ष ने इस्तीफा जरूर दे दिया है लेकिन सदस्यों का कार्यकाल मई 2023 तक शेष है। इस तरह से अध्यक्ष चुनाव कराया जाता है तो उनका कार्यकाल मई 2023 तक ही होगा। ऐसे में पांच वर्ष का पूरा कार्यकाल खत्म होने के बाद ही चुनाव की संभावना जताई जा रही है।



पूर्व में भी रह चुके हैं अध्यक्ष
अमरनाथ मौर्य इलाहाबाद-कौशाम्बी जिला सहकारी बैंक के 2010 से 2012 के बीच भी अध्यक्ष रहे। उस समय वह बसपा में थे। इसके बाद स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ वह भाजपा में शामिल हो गए तथा मई 2018 में दोबारा अध्यक्ष निर्वाचित हुए।


विधानसभा चुनाव से पहले स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ अमरनाथ ने भी सपा का दामन थाम लिया। सपा ने विधानसभा चुनाव में अमरनाथ को शहर पश्चिमी से प्रत्याशी भी बनाया था, लेकिन आखिरी समय में ऋचा सिंह को टिकट दे दिया गया। अब प्रदेश में भाजपा की दोबारा सरकार है। इसी बीच बोर्ड के पूर्व सदस्य ने उनके निर्वाचन को चुनौती दी थी। इसी के बाद से ही अमरनाथ की कुर्सी जानी तय मानी जा रही थी।

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