फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pratapgarh News ›   Pratapgarh: Seventeen elections were held after independence, only four people became MLAs on their own

प्रतापगढ़ : आजादी के बाद हुए सत्रह चुनाव, मात्र चार लोग अपने दम पर बने विधायक 

Sun, 20 Feb 2022 05:50 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़ Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 20 Feb 2022 05:50 AM IST
सार

देश की आजादी के बाद पहली बार 1951 में लोकसभा व विधानसभा के चुनाव एक साथ हुए थे। 1957 में भी आम चुनाव के साथ ही विधानसभा का चुनाव हुए। रामपुर खास विधानसभा से कुंवर तेजभान सिंह को पहली बार 1977 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में कामयाबी मिली।

विज्ञापन
Pratapgarh: Seventeen elections were held after independence, only four people became MLAs on their own
Pratapgarh News : नामांकन पत्र दाखिल करने जाते राजाभैया। - फोटो : प्रतापगढ़

विस्तार

देश की आजादी के बाद अब तक हुए सत्रह चुनावों में जिले से मात्र चार लोग ही अपने दम पर विधायक बन सके। रामपुर खास विधानसभा से 1977 में पहली बार कुंवर तेजभान सिंह निर्दलीय विधायक बने थे। हर बार चुनाव में बड़ी संख्या में लोग निर्दलीय प्रत्याशी के तौर मैदान में कूदते हैं, लेकिन उनकी भूमिका वोटकटवा तक ही सीमित रह जाती है। हर बार चुनाव में निर्दलियों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। 

विज्ञापन




देश की आजादी के बाद पहली बार 1951 में लोकसभा व विधानसभा के चुनाव एक साथ हुए थे। 1957 में भी आम चुनाव के साथ ही विधानसभा का चुनाव हुए। रामपुर खास विधानसभा से कुंवर तेजभान सिंह को पहली बार 1977 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में कामयाबी मिली। हालांकि 1980 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। रामपुर खास से कांग्रेस ने अपनी खोई हुई सीट पर कब्जा कर लिया। यहां से प्रमोद तिवारी ने जीत दर्ज की।

विज्ञापन

राजाभैया समर्थक विनोद सरोज ने निर्दलीय दर्ज की जीत
इसके बाद काफी समय तक कोई निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत सका। वर्ष 1993 में कुंडा विधानसभा से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरे रघुराज प्रताप सिंह राजाभैया ने जीत दर्ज की। यहां से सपा के विधायक रहे नियाज हसन को हार का सामना करना पड़ा। तब से राजाभैया से 2017 तक निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में कुंडा विधानसभा से विधायक चुने जा रहे हैं।



1996 में बिहार विधानसभा से राजाभैया समर्थक रामनाथ सरोज ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव जीता। 2002 में भी रामनाथ सरोज निर्दलीय विधायक निर्वाचित हुए। उनके निधन के बाद राजाभैया ने उनके बेटे विनोद सरोज को मैदान में उतारा। मतदाताओं ने पिता की विरासत संभालने चुनाव मैदान में उतरे विनोद सरोज को विधायक चुन लिया। 2012 व 2017 के विधानसभा चुनाव में भी विनोद सरोज निर्दलीय चुनाव जीते। 

वर्ष    चुनाव जीतने वाले निर्दलीय प्रत्याशी    विधानसभा
1977    कुंवर तेजभान सिंह    रामपुर खास
1993    रघुराज प्रताप सिंह    कुंडा
1996    रघुराज प्रताप सिंह    कुंडा
1996    रामनाथ सरोज    बिहार सु.
2002    रघुराज प्रताप सिंह    कुंडा
2002    रामनाथ सरोज    बिहार सु.
2007    रघुराज प्रताप सिंह    कुंडा
2007    विनोद सरोज    बिहार सु.
2012    रघुराज प्रताप सिंह    कुंडा
2012    विनोद सरोज    बाबागंज
2017    रघुराज प्रताप सिंह    कुंडा
2017    विनोद सरोज    बाबागंज

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed