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हाईकोर्ट : समीक्षा की शक्ति का उपयोग अपील के तौर पर नहीं कर सकते, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

Mon, 31 Aug 2026 04:24 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 31 Aug 2026 04:24 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) की समीक्षा याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि समीक्षा की शक्ति का उपयोग अपील के तौर पर नहीं किया जा सकता।

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Power of review cannot be exercised as an appeal; High Court dismisses petition.
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) की समीक्षा याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि समीक्षा की शक्ति का उपयोग अपील के तौर पर नहीं किया जा सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की खंडपीठ ने यीडा की पुनर्विचार याचिका पर दिया है।

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यीडा ने 11 जुलाई 2017 के आदेश से प्लॉट के लिए जमा लीज रेंट, जुर्माना और मैप पूर्णता की रकम रोक ली थी। इस आदेश को मेसर्स लॉजिक्स इन्फ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड ने मूल रिट याचिका में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार कर यीडा के आदेश को रद्द कर दिया था। साथ ही यीडा को 43.20 करोड़ रुपये की शेष राशि 15 प्रतिशत ब्याज के साथ वापस करने का आदेश दिया था। इस फैसले के खिलाफ यीडा ने समीक्षा याचिका दायर की।
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कोर्ट ने कहा कि प्रोजेक्ट सेटलमेंट पॉलिसी उस स्थिति में लागू होती है, जब बिल्डर या आवंटी परियोजना पूरी करने में असमर्थ हो। मौजूदा मामले में ऐसी स्थिति बिल्डर के कारण नहीं थी, बल्कि यीडा ने लॉजिक्स को शेष भूमि उपलब्ध नहीं कराई थी। कोर्ट ने कहा कि मूल फैसले में इस पहलू पर पर्याप्त विचार किया जा चुका है। उसमें समीक्षा या पुनर्विचार की आवश्यकता नहीं है।
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कोर्ट ने कहा कि समीक्षा का दायरा सीमित है। रिकॉर्ड पर ऐसी स्पष्ट त्रुटि होनी चाहिए, जो पहली नजर में दिखाई दे और उसके लिए लंबी दलील या तर्क की आवश्यकता न हो। कोर्ट ने पाया कि समीक्षा में उठाए गए सभी आधारों पर मूल याचिका में विचार किया जा चुका था। इसलिए समीक्षा के जरिये मामले को फिर से सुनने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसी के साथ कोर्ट ने 16 नवंबर 2023 के फैसले को बरकरार रख यीडा की समीक्षा याचिका खारिज कर दी। 

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