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मतदान अधिकारी हत्याकांडः इंजीनियर भी नहीं खोल पाए आशीष का पैटर्न लॉक
Fri, 17 May 2019 01:38 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 17 May 2019 01:38 AM IST
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- फोटो : प्रयागराज
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चुनाव ड्यूटी से लौटते समय मतदान अधिकारी आशीष तिवारी की हत्या के मामले में पुलिस गुुरुवार तक उसका मोबाइल नहीं खोल पाई थी। मोबाइल इंजीनियरों के पास भी ले जाया गया लेकिन पैटर्न लॉक नहीं खोला जा सका। इंजीनियरों का कहना था कि मोबाइल फार्मेट कर लॉक खोला जा सकता है लेकिन सारे डेटा डिलीट हो जाएंगे। पुलिस अब मोबाइल दिल्ली भेजने की तैयारी कर रही है।
सोरांव के सराय लहुरी गांव के रहने वाले आशीष तिवारी उर्फ रिंकू सिंचाई विभाग प्रयागराज में नौकरी करते थे। लोक सभा चुनाव में बतौर मतदान अधिकारी उनकी ड्यूटी बारा विधान सभा क्षेत्र में लगाई गई थी। रविवार की रात चुनाव ड्यूटी से लौटते वक्त सराय दीना गांव में आशीष की हत्या कर उनके सिर को मिट्टी से ढंक दिया गया था। हत्या के खुलासे के लिए सोरांव पुलिस के साथ ही क्राइम ब्रांच को लगाया गया। गुरुवार को मुंडेरा मंडी में सीसीटीवी फुटेज की छानबीन की गई।
उनके पीठासीन अधिकारी से भी बात की गई। उन्होंने बताया कि आशीष साथ में मुंडेरा आए थे। वहां से बाइक से निकल गए। इसके बाद उनके बारे में कोई जानकारी नहीं है। इंस्पेक्टर एके चतुर्वेदी ने बताया कि आज आशीष के कुछ दोस्तों से पूछताछ की गई जो आशीष के करीबी थे। पुलिस उनके कॉल डीटेल्स भी निकाल रही है। आशीष के मोबाइल से कई महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं लेकिन उसका पैटर्न लॉक कोई इंजीनियर भी नहीं खोल पा रहा है। उसके फेसबुक फ्रैंड्स का पता लगाने की कोशिश हो रही है। पूरी संभावना है कि वाट्सएप नंबरों से कुछ सुराग मिलते लेकिन मोबाइल न खुलने के कारण खुलासे में देरी हो रही है।
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सोरांव के सराय लहुरी गांव के रहने वाले आशीष तिवारी उर्फ रिंकू सिंचाई विभाग प्रयागराज में नौकरी करते थे। लोक सभा चुनाव में बतौर मतदान अधिकारी उनकी ड्यूटी बारा विधान सभा क्षेत्र में लगाई गई थी। रविवार की रात चुनाव ड्यूटी से लौटते वक्त सराय दीना गांव में आशीष की हत्या कर उनके सिर को मिट्टी से ढंक दिया गया था। हत्या के खुलासे के लिए सोरांव पुलिस के साथ ही क्राइम ब्रांच को लगाया गया। गुरुवार को मुंडेरा मंडी में सीसीटीवी फुटेज की छानबीन की गई।
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उनके पीठासीन अधिकारी से भी बात की गई। उन्होंने बताया कि आशीष साथ में मुंडेरा आए थे। वहां से बाइक से निकल गए। इसके बाद उनके बारे में कोई जानकारी नहीं है। इंस्पेक्टर एके चतुर्वेदी ने बताया कि आज आशीष के कुछ दोस्तों से पूछताछ की गई जो आशीष के करीबी थे। पुलिस उनके कॉल डीटेल्स भी निकाल रही है। आशीष के मोबाइल से कई महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं लेकिन उसका पैटर्न लॉक कोई इंजीनियर भी नहीं खोल पा रहा है। उसके फेसबुक फ्रैंड्स का पता लगाने की कोशिश हो रही है। पूरी संभावना है कि वाट्सएप नंबरों से कुछ सुराग मिलते लेकिन मोबाइल न खुलने के कारण खुलासे में देरी हो रही है।
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