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Prayagraj News: पुलिस अधिकारियों ने केस डायरी देर से भेजने का ठीकरा एक-दूसरे पर फोड़ा, लगा 50 हजार रुपये हर्जाना
Thu, 16 Jul 2026 02:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Thu, 16 Jul 2026 02:24 AM IST
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जमानत याचिका पर समय से केस डायरी कोर्ट में नहीं भेजने का ठीकरा एक-दूसरे पर फोड़ रहे पुलिस अधिकारियों से खफा इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार पर 50,000 रुपये का हर्जाना लगाया है। जांच का आदेश भी दिया है। स्पष्ट किया है कि जांच के बाद सरकार को यह राशि लापरवाह पुलिस अधिकारियाें से वसूल कर याचियों को देनी होगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार देशवाल की एकल पीठ ने बिजनौर के चांदपुर थाने में दर्ज दहेज हत्या के आरोपी सास सबीला-ससुर यासीन की जमानत याचिका पर दिया है। कोर्ट ने दहेज प्रताड़ना के साक्ष्य नहीं मिलने पर दोनों की जमानत अर्जी मंजूर कर ली है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि जमानत याचिका की प्रति संयुक्त निदेशक (अभियोजन) के कार्यालय ने 17 जून को पुलिस पैरोकार को उपलब्ध करा दिया था। इसके बाद 19 जून को पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजा गया और 29 जून को अनुस्मारक जारी किया गया। फिर भी पुलिस ने मामले की केस डायरी कोर्ट को उपलब्ध नहीं कराई। इससे ग्रीष्मावकाश में दाखिल जमानत याचिका पर अब तक सुनवाई नहीं हो सकी।
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कोर्ट ने तीन जुलाई को सीसीटीएनएस पोर्टल से केस डायरी की पीडीएफ उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद पुलिस ने केवल आरोपियों का आपराधिक इतिहास भेजा। इस पर चांदपुर के थाना प्रभारी, उपनिरीक्षक और क्षेत्राधिकारी को तलब किया गया।
थाना प्रभारी ने छुट्टी और कांवड़ यात्रा की ड्यूटी को देरी का कारण बताया। वहीं, उपनिरीक्षक ने इसे संवादहीनता (कम्यूनिकेशन गैप) बताई। क्षेत्राधिकारी ने कहा कि उनके साथ तैनात हेड कांस्टेबल ने कोर्ट से भेजे संदेशों की जानकारी नहीं दी थी। कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये पर हैरानी जताई। कहा कि यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही है। कोर्ट ने अपने आदेश की प्रति पुलिस महानिदेशक और बिजनौर के पुलिस अधीक्षक को भी भेजने का आदेश दिया है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार देशवाल की एकल पीठ ने बिजनौर के चांदपुर थाने में दर्ज दहेज हत्या के आरोपी सास सबीला-ससुर यासीन की जमानत याचिका पर दिया है। कोर्ट ने दहेज प्रताड़ना के साक्ष्य नहीं मिलने पर दोनों की जमानत अर्जी मंजूर कर ली है।
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सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि जमानत याचिका की प्रति संयुक्त निदेशक (अभियोजन) के कार्यालय ने 17 जून को पुलिस पैरोकार को उपलब्ध करा दिया था। इसके बाद 19 जून को पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजा गया और 29 जून को अनुस्मारक जारी किया गया। फिर भी पुलिस ने मामले की केस डायरी कोर्ट को उपलब्ध नहीं कराई। इससे ग्रीष्मावकाश में दाखिल जमानत याचिका पर अब तक सुनवाई नहीं हो सकी।
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कोर्ट ने तीन जुलाई को सीसीटीएनएस पोर्टल से केस डायरी की पीडीएफ उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद पुलिस ने केवल आरोपियों का आपराधिक इतिहास भेजा। इस पर चांदपुर के थाना प्रभारी, उपनिरीक्षक और क्षेत्राधिकारी को तलब किया गया।
थाना प्रभारी ने छुट्टी और कांवड़ यात्रा की ड्यूटी को देरी का कारण बताया। वहीं, उपनिरीक्षक ने इसे संवादहीनता (कम्यूनिकेशन गैप) बताई। क्षेत्राधिकारी ने कहा कि उनके साथ तैनात हेड कांस्टेबल ने कोर्ट से भेजे संदेशों की जानकारी नहीं दी थी। कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये पर हैरानी जताई। कहा कि यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही है। कोर्ट ने अपने आदेश की प्रति पुलिस महानिदेशक और बिजनौर के पुलिस अधीक्षक को भी भेजने का आदेश दिया है।