सक्रियता पर सवाल : इनाम से तीन गुना ज्यादा खर्च, फिर भी मिली नाकामी, अली की तलाश में भटकती रही पुलिस
मुकदमा दर्ज होने के करीब दो महीने बाद उस पर 25 हजार और फिर अप्रैल में 50 हजार का इनाम घोषित कराया गया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसकी तलाश में शहर के अलग-अलग इलाकों के अलावा कोलकाता, मेरठ, दिल्ली, बरेली, प्रतापगढ़ व कौशाम्बी में दबिश दी गई।
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कोर्ट में आत्मसमर्पण करने वाले अली पर जितना इनाम घोषित था, उसे पकड़ने में उससे तीन गुना ज्यादा रकम पुलिस ने खर्च कर दी। उसकी तलाश में शहर के अलग-अलग इलाकों के अलावा मेरठ, दिल्ली, बरेली, प्रतापगढ़ व कौशाम्बी में दबिश दी गई। लेकिन इसके बावजूद नाकामी ही हाथ लगी। उधर, अली ने पुलिस को चकमा देकर कोर्ट में सरेंडर कर दिया। बताया जाता है कि वकील के ड्रेस में वह न्यायालय परिसर में दाखिल हुआ। कोर्ट रूम में पहुंचने के बाद काला कोट उतारर जींस और टीशर्ट में हो गया।
मुकदमा दर्ज होने के करीब दो महीने बाद उस पर 25 हजार और फिर अप्रैल में 50 हजार का इनाम घोषित कराया गया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसकी तलाश में शहर के अलग-अलग इलाकों के अलावा मेरठ, दिल्ली, बरेली, प्रतापगढ़ व कौशाम्बी में दबिश दी गई। शहर से दिल्ली व मेरठ की दूरी लगभग 750, बरेली की लगभग 450, कौशाम्बी की 50 और प्रतापगढ़ की 60 किमी है।
इस तरह से आने और जाने दोनों ओर के सफर की बात करें पुलिस ने चार हजार किमी से ज्यादा का सफर तय किया। जानकारों का कहना है कि दबिश के दौरान पुलिसकर्मियों के वेतन, ट्रांसपोर्टेशन, खाने-पीने समेत अन्य खर्चे जोड़ लिए जाएं तो 25-30 हजार रुपये का खर्च हर बार होता है। ऐसे में उपरोक्त शहरों में दी गई दबिश के खर्च का अनुमान लगाया जाए तो यह 1.5 लाख से ज्यादा ही होता है।
उमर पर दो लाख का है इनाम
अतीक अहमद का बड़ा बेटा उमर इस समय जोन के सबसे बड़े इनामियों में से एक है। उस पर सीबीआई ने दो लाख रुपये का इनाम घोषित किया है। 2019 में सीबीआई की ओर से मुकदमा दर्ज किए जाने केबाद से ही वह फरार है। फरवरी 2020 में उस पर इनाम घोषित किया गया था। प्रॉपर्टी डीलर मोहित जायसवाल को अगवा कर देवरिया जेल में पीटने के मामले में वह पिता अतीक समेत अन्य के साथ नामजद है।
मेरे बेटे को फर्जी मुकदमे में फंसाया गया है। हमें न्यायालय पर पूरा भरोसा है। जल्द ही सक्षम न्यायालय में अपील की जाएगी। - शाइस्ता परवीन, अतीक अहमद की पत्नी