High Court : सुप्रीम आदेश की गलत व्याख्या से आरोपियों को लाभ पहुंचा रही पुलिस, विवेचक के खिलाफ जांच का आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सतेंद्र कुमार अंतिल मामले में जमानत संबंधी सुप्रीम कोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या पर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि यह फैसला स्वतः जमानत देने का निर्देश नहीं देता, बल्कि अनावश्यक गिरफ्तारी से बचने की सलाह देता है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सतेंद्र कुमार अंतिल मामले में जमानत संबंधी सुप्रीम कोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या पर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि यह फैसला स्वतः जमानत देने का निर्देश नहीं देता, बल्कि अनावश्यक गिरफ्तारी से बचने की सलाह देता है। कुछ पुलिस अधिकारी जानबूझकर हल्की धाराएं लगाकर आरोपियों को इस फैसले का फायदा दिला देते हैं।
इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की अदालत ने गैर इरादतन हत्या के प्रयास के आरोप में जेल में बंद आरोपी कृष्णा उर्फ किशन को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। मामला फिरोजाबाद के शिकोहाबाद थाना क्षेत्र का है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि अभियुक्त पर लगे आरोप सामान्य प्रकृति के हैं, चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। लिहाजा, उसे जेल में रखना उचित नहीं है।
कोर्ट ने विवेचक और विधिक चिकित्सा परीक्षण करने वाले डॉक्टर की भूमिका पर सवाल उठाए। कोर्ट ने पाया कि चिकित्सा परीक्षण के दौरान डॉक्टर ने पीड़ित के सिर की चोट की जांच के लिए सीटी स्कैन और एक्सरे कराए। सीटी स्कैन में चोट की पुष्टि हुई, जबकि कुछ दिन बाद एक्सरे रिपोर्ट में चोट नहीं पाई गई। लिहाजा, डॉक्टर ने एक्सरे के आधार पर मेडिकल रिपोर्ट तैयार कर दी।
इस रिपोर्ट के आधार पर विवेचक ने अभियुक्त के खिलाफ गैर इरादतन हत्या के प्रयास का आरोप पत्र ट्रायल कोर्ट में दाखिल कर दिया, जबकि सीटी स्कैन के आधार पर मामला हत्या के प्रयास का गंभीर मामला बनता था। कोर्ट ने इसे घोर लापरवाही करार देते हुए सेवानिवृत्त हो चुके डॉक्टर पर 10 हजार रुपये हर्जाना लगाया। यह राशि 15 दिन में डॉक्टर को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, फिरोजाबाद में जमा करनी होगी। वहीं, फिरोजाबाद के एसपी को विवेचक के खिलाफ जांच कराने का आदेश दिया है।
आदेश की प्रति एसपी और न्यायिक प्रशिक्षण संस्थान भेजने का आदेश
अदालत ने आदेश की प्रति फिरोजाबाद के एसपी और न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान को भेजने का निर्देश दिया, ताकि न्यायिक अधिकारियों को इस फैसले का सही मतलब समझाया जा सके।