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कुंभ में जिनके पांव पखारे, उन्हें अब मोदी से उद्धार की आस

Sun, 26 May 2019 05:03 AM IST
देव कश्यप अनूप ओझा, अमर उजाला, प्रयागराज
अनूप ओझा, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: देव कश्यप Updated Sun, 26 May 2019 05:03 AM IST
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PM Modi washes feet of sanitation workers in Kumbh 2019, they hope Job and economical help
कुंभ में दलित सफाईकर्मियों के पांव पखारते पीएम मोदी - फोटो : फाइल फोटो

लोस चुनाव से ऐन पहले कुंभ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिन दलित सफाईकर्मियों के पांव पखारकर देश के गरीबों-कमजोरों का दिल जीतने व सामाजिक समानता के नायक के रूप में लोकप्रियता पाई, वे सफाईकर्मी अब पीएम मोदी से कई उम्मीदें जता रहे हैं। एक तरफ उनके दरवाजों पर मोदी की जीत की खुशी है, तो दूसरी तरफ घरों के भीतर पांव मोड़कर बैठी गरीबी है। साथ ही चूल्हा जलाने से लेकर बच्चों की पढ़ाई, दवाई की चिंता भी है। इन सबके बीच उनको उम्मीद है कि पीएम अब उनके लिए कुछ करेंगे। किसी को बेटियों की शादी का खर्च जुटाने की फिक्र है, तो किसी को बेटे-दामाद के लिए नौकरी की।

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बांदा जिले के बबेरू गांव निवासी प्यारे लाल गेरांय की खुशी का ठिकाना नहीं है। वे बताते हैं कि मोदी ने पहली बार अमीर-गरीब, ऊंच-नीच के फर्क को मिटाया। यही वजह थी कि चुनाव के दौरान वह बांदा के गांव-गांव में घूम-घूमकर ‘अबकी बार मोदी सरकार’ का नारा लगाते रहे।  प्यारे लाल बताते हैं कि उनकी जिंदगी कट गई, लेकिन बच्चों के लिए अब तक कुछ न हो पाना उनकी सबसे बड़ी चिंता है। पांच बेटियों में से चार की शादी का खर्च और बेटे-दामाद को नौकरी की बात वह मोदी सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। इसी जिले के नारायनपुर गांव के नरेश कुमार चमके को भी पीएम के हाथों पांव पखारने का सम्मान मिलने के अलावा कुछ हासिल नहीं हुआ।
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नरेश का कहना है कि काम करने पर मजदूरी नहीं मिलती। परिवार चलाना मुश्किल है। वह चाहते हैं कि पीएम के जरिए उन्हंे पहले स्थाई रोजगार या नौकरी मिले, ताकि जीवन स्तर में सुधार आ सके।

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PM Modi washes feet of sanitation workers in Kumbh 2019, they hope Job and economical help
होरीलाल और प्यारेलाल गेरांय - फोटो : अमर उजाला

संभल के गांव घोरेल के होरीलाल भी जीविकोपार्जन के लिए परेशान हैं। सफाई मजदूर के तौर पर काम करने के बावजूद महीनों पारिश्रमिक नहीं मिल पाता। मोदी की जीत के बाद होरीलाल दिल्ली पहुंच गए हैं। वे पीएम से मिलकर बेटे के लिए नौकरी की बात करना चाहते हैं। उनका कहना है कि मोदी ने अकेले उनका नहीं, पूरे दलित समाज का सम्मान बढ़ाया है। इस अहसान को वह कभी नहीं भूल सकते हैं। यही वजह थी कि पूरे चुनाव में वह मोदी के नाम पर घर-घर प्रचार में जुटे रहे।

छत्तीसगढ़ के कोरबा गांव की ज्योति महतो बधाई देने वालों के हाथों मोदी की जीत की माला पहनकर घूम रही हैं। ज्योति का कहना है कि पीएम मोदी अब ऐसा काम करें, जिससे उसके साथ ही दूसरे लोगों के भी सामाजिक जीवन में बदलाव आए। ज्योति को भरोसा है कि मोदी की वापसी से इस बार दलितों का कायाकल्प जरूर होगा। इसी तरह चौबी देवी भी गदगद हैं। उनके नाते-रिश्तेदारों में भी खुशी का माहौल है। चौबी देवी कहती हैं कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि अब मोदी उनके लिए कुछ करेंगे जरूर।  

कुंभ में दलितों के पांव धोकर देश में दोबारा सत्ता हासिल करने वाले पीएम नरेंद्र मोदी को अब उस वर्ग के उत्थान की योजना बनानी चाहिए। उनकी आर्थिक कमजोरी दूर करने के साथ ही सामाजिक विकास के लिए बेहतर शिक्षा के लिए पूरे देश के स्कूलों में मुफ्त पढ़ाई का इंतजाम होना चाहिए। -सुनील राजदान, सचिव, अखिल भारतीय दलित साधु अखाड़ा परिषद।

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