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अयोध्या में मंदिर की बजाए विहिप का कार्यालय बनाने की योजना: स्वामी स्वरूपानंद

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 06 Feb 2021 11:39 PM IST
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prayagraj news : शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती।
prayagraj news : शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती। - फोटो : prayagraj
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ज्योतिष्पीठ और द्वारिका-शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने शनिवार को प्रयागराज पहुंचने पर अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए गठित राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन पर उंगली उठाई। उन्होंने कहा कि इस ट्रस्ट में एक भी ऐसा व्यक्ति नहीं है, जो भगवान राम के मंदिर निर्माण के लिए प्राण प्रतिष्ठा करने लायक हो। उन्होंने आरएसएस औ विहिप के राम को सनातनधर्मियों के आराध्य भगवान राम से अलग बताया। शंकराचार्य स्वरूपानंद ने कहा कि अयोध्या में अयोध्या में भगवान राम का मंदिर नहीं, बल्कि विहिप का कार्यालय बनाने की रूपरेखा तैयार की गई है। 
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मौनी अमावस्य पर संगम स्नान के लिए शनिवार को कटनी (एमपी) से चलकर यमुना किनारे सरस्वती घाट स्थित मनकामेश्वर मंदिर पहुंचे शंकराचार्य स्वरूपानंद ने पत्रकारों से बातचीत में अयोध्या में मंदिर निर्माण पर अपनी बात कही। लंबे समय से रामालय ट्रस्ट की ओर से अयोध्या में मंदिर निर्माण कराने की वकालत करने वाले स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि विहिप और आरएसएस के लोग भगवान राम को महापुरुष मानते हैं। उनके लिए  प्रभु राम भगवान नहीं हैं। यही वजह है कि अयोध्या में प्रभु श्रीराम का मंदिर नहीं, बल्कि आने वाले दिनों में विहिप का कार्यालय बनाया जाने वाला है।


 शंकराचार्य ने बताया कि कुछ महीने पहले प्रयागराज में दो महापुरुषों के साथ भगवान राम की मूर्ति रखी गई थी। जबकि,लोगों को ध्यान रखना चाहिए कि भगवान राम महापुरुष नहीं हैं। शंकराचार्य ने रामालय ट्रस्ट की व्यापक सोच को भी मीडिया के सामने रखा। बताया कि उनके रामालय ट्रस्ट में शंकराचार्य के अलावा रामानंदाचार्य और सभी 13 अखाड़ों के भी प्रतिनिधि थे। जबकि, मौजूदा सरकार के मंदिर ट्रस्ट में ऐसा संतुलन नहीं है। शंकराचार्य ने कहा कि वह हमेशा चाहते रहे हैं अयोध्या सनातनधर्मियों का सबसे बड़ा आराधनास्थल बने।

उन्होंने मंदिर निर्माण के लिए चलाए जा रहे धन संग्रह समर्पण निधि अभियान पर भी सवाल खड़ा किया। उन्होंने मंदिर के नाम पर जब तब किए जाने वाले धन संग्रह को लेकर कहा कि पहले भी धन इकट्ठा किया जा चुका है, लेकिन उसका कोई हिसाब-किताब नहीं है। सोने की ईट के लिए भी धन इकट्ठा किया गया था। उन्होंने किसान आंदोलन का समाधान न निकलने पर भी चिंता जताई। आरोप लगाया कि यह सरकार नोटबंदी से लेकर कृषि कानूनों तक एक पक्षीय फैसले ले रही है। यह अफसोसजनक है।

संगम पर कल्पवासी आरओ वाटर पीने के लिए मजबूर: शंकराचार्य

शंकराचार्य स्वरूपानंद ने गंगा की अविरलता-निर्मलता का भी मुद्दा उठाया। कहा कि गंगा में नालों का गंदा पानी गिर रहा है। संगम पर शिविरों में रहने वाले कल्पवासी गंगा जल की जगह आरओ वाटर पी रहे हैं। शंकराचार्य ने कहा कि नमामि गंगे योजना के अलावा गंगा निर्मलीकरण के लिए विभाग तो बनाया गया है, लेकिन सरकार के पास इच्छाशक्ति का अभाव है। उन्होंने कहा कि कुंभ में संतों-भक्तों को निर्मल गंगा की धारा मिलनी चाहिए। शंकराचार्य 13 फरवरी तक मनकामेश्वर मंदिर में ही प्रवास करेंगे। इस दौरान वह माघ मेले में आयोजित कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेंगे।

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